अध्यात्म

Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि 2026 कब है,श्रावण मास की शिवरात्रि पर क्या रहेगा चार प्रहर की पूजा का समय

Sawan Shivratri 2026 (सावन शिवरात्रि 2026 कब है) : सावन का पूरा महीना ही शिव भक्ति को समर्पित होता है। इस मास में आने वाली शिवरात्रि विशेष महत्व वाली मानी जाती है। यहां देखें की सावन मास की शिवरात्रि 2026 में कब पड़ेगी। क्या है श्रावण शिवरात्रि की तारीख इंडिया में। साथ ही जानें श्रावण शिवरात्रि का महत्व और चार प्रहर की पूजा का समय।

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सावन शिवरात्रि 2026 में कब है (Pic: AI Image)

Sawan Shivratri 2026 (सावन शिवरात्रि 2026 कब है): सावन शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सावन मास की सबसे महत्वपूर्ण रात्रि मानी जाती है। यह व्रत सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें रात्रि पूजा का विशेष महत्व होता है। शिवभक्त इस दिन दिनभर व्रत रखते हैं और रात्रि के चारों प्रहर में विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं।

सावन शिवरात्रि 2026 कब है

वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि का व्रत 11 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। सावन 2026 में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि अगस्त 11, 2026 को 04:54 am से आरंभ होगी और इसका समापन 12 अगस्त, 2026 को 01:52 am पर होगा।

सावन शिवरात्रि 2026 कब से कब तक रहेगी

सावन शिवरात्रि की त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होकर रात्रि में विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि का व्रत उसी दिन किया जाता है, जिस दिन त्रयोदशी तिथि रात्रि में विद्यमान हो। 11 अगस्त 2026 को रात्रि में त्रयोदशी तिथि होने के कारण इसी दिन सावन शिवरात्रि का व्रत और पूजा की जाएगी। यही कारण है कि रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का विधान इस व्रत में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।

सावन शिवरात्रि 2026 में चार प्रहर की पूजा का समय

सावन शिवरात्रि की पूजा एक बार नहीं, बल्कि रात्रि के चार प्रहर में की जाती है। 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि की प्रथम प्रहर की पूजा शाम 07:04 बजे से 09:45 बजे तक होगी। इसके बाद द्वितीय प्रहर की पूजा 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक चलेगी, जो 12 अगस्त को प्रवेश करेगी। तृतीय प्रहर की पूजा 12:26 बजे से 03:05 बजे तक और अंत में चतुर्थ प्रहर की पूजा 03:05 बजे से सुबह 05:49 बजे तक की जाएगी। मान्यता है कि जो भक्त चारों प्रहर में श्रद्धा से शिवलिंग का अभिषेक करता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।

सावन शिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

सावन का महीना स्वयं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और शिवरात्रि इस महीने की सबसे पावन रात्रि मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी रात्रि भगवान शिव ने माता पार्वती को पति रूप में स्वीकार किया था। यह दिन तप, संयम और भक्ति का प्रतीक है। सावन शिवरात्रि का व्रत करने से जीवन में शांति, सुख-समृद्धि और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं इस दिन अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं।

सावन शिवरात्रि की पूजा कैसे करें

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। दिन में फलाहार या निर्जल व्रत किया जा सकता है। रात्रि में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भस्म और सफेद फूल भगवान शिव को अर्पित करें। ॐ नमः शिवाय - मंत्र का जाप करते हुए चारों प्रहर में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अंत में भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति और जीवन में सही मार्गदर्शन की प्रार्थना करें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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