Sawan Shivratri 2023 Puja Vidhi: सावन का सिद्ध महीना चल रहा है, और श्रावण मास में 15 जुलाई की तारीख को पवित्र श्रावण माह का त्रयोदशी पर्व यानी की शिवरात्रि के रूप में मनाया जाएगा। भगवान शिव जगत पिता हैं और माता पार्वती जगत माता हैं। भगवान शिव प्रारब्ध तक को मिटा सकते हैं और परम् ब्रम्ह शिव कुंडली के अकाल मृत्यु को मिटाकर दीर्घायु प्रदान करते हैं। भोलेनाथ प्रसन्न होते ही दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देते हैं। चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित होते हैं। सावन शिवरात्रि के दिन शनिवार भी है, जो इस तिथि को और शुभ बनाता है। इस पुनीत अवसर पर शिव उपासना से अनन्त पुण्य की प्राप्ति होती है। समस्त पाप नष्ट होते हैं।
इस दिन श्रद्धापूर्वक करें रुद्राभिषेक
श्रावण शिवरात्रि को भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। परमपिता को प्रसन्न करने तथा मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए रुद्राभिषेक बहुत ही आवश्यक है।
कैसे करें रुद्राभिषेक?
- गाय के दुग्ध से रुद्राभिषेक करने से संपन्नता आती है तथा मन में की गई मनोकामना पूर्ण होती है।
- जो लोग रोग से पीड़ित हैं तथा प्रायः अस्वस्थ रहते हैं या किसी गंभीर महा बीमारी से परेशान हैं उनको कुशोदक से रुद्राभिषेक करना चाहिए। कुश को पीसकर गंगा जल में मिला लीजिए फिर भगवान शिव का नियम तथा श्रद्धा पूर्वक रुद्राभिषेक करें।
- धन प्राप्ति के लिए देसी घी से रुद्राभिषेक करें।
- निर्विध्न रूप से किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए तीर्थ स्थान के नदियों के जल से रुद्राभिषेक करें। इससे भक्ति भी प्राप्त होती है। मोक्ष तक की प्राप्ति पवित्र तीर्थों के जल से भगवान के अभिषेक से प्राप्त होता है।
- गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करने से कार्य बाधाएं समाप्त होती हैं तथा वैभव और सम्पन्नता में वृद्धि होती है।
- शहद से रुद्राभिषेक करने से जीवन के दुख समाप्त होते हैं तथा खुशियां आती हैं। वाहन व घर मिलता है। किसी शिव मंदिर में शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें या घर पर ही पार्थिव का शिवलिंग बनाकर रुद्राभिषेक करें।
इस दिन करें महामृत्युंजय मंत्र का जप
इस दिन महामृत्युंजय मंत्र के जप से रोगों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति दीर्घायु होता है। गंभीर रोग से पीड़ित लोग निश्चित संख्या मवन शिवमंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान बैठाएं। इस प्रकार महाशिवरात्रि को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बनाएं। निर्मल मन से की गई पूजा पर भगवान शिव मनोवांछित फलों को प्रदान करते हैं।
इस दिन कराएं अखंड श्री रामचरितमानस का पाठ
भगवान शिव को श्री राम कथा बहुत प्रिय है। इस दिन किसी शिव मंदिर में अखंड श्री रामचरितमानस का पाठ कराकर भंडारा कराएं। भगवान नाम का संकीर्तन करें-कलयुग में भगवान के नाम जप का बहुत महत्व है। ॐ नमः शिवाय मन्त्र का निरंतर जप करते रहें।
