Saraswati puja Pushpanjali Mantra: बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 पर मां सरस्वती की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पुष्पांजलि अर्पण करना होता है। इस समय हाथों में फूल लेकर सरस्वती पुष्पांजलि मंत्र का उच्चारण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के साथ फूल अर्पित करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे बुद्धि, ज्ञान, एकाग्रता, वाणी की मधुरता और कला-संस्कृति में सफलता मिलती है। पुष्पांजलि मंत्र सरस्वती पूजा को पूर्णता प्रदान करता है और इसकी सही विधि से अर्पण करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
सरस्वती पुष्पांजलि मंत्र क्या है?
पुष्पांजलि मंत्र सरस्वती माता को समर्पित एक छोटा लेकिन बहुत शक्तिशाली मंत्र है। यह मंत्र मुख्य रूप से देवी सरस्वती के स्वरूप, उनके गुणों और उनके द्वारा धारण की गई वस्तुओं (वीणा, पुस्तक) का वर्णन करता है। पूजा के समय इस मंत्र का उच्चारण करते हुए फूलों की अंजलि मां के चरणों में अर्पित की जाती है।
सरस्वती पुष्पांजलि मंत्र
ॐ चराचर सारे कुच जुग शोभित मुक्ता हारे।
वीणा रंजित पुस्तक हस्ते भगवती भारती देवी नमस्तुते नमः॥
भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः।
वेद-वेदांग-वेदांत विद्या रूपे च ते नमः॥
एष स-चन्दन पुष्पो बिल्व पत्रांजलिं
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
मंत्र का अर्थ
हे चराचर जगत की आधार देवी, जिनके वक्ष पर मोतियों का हार शोभित है, हाथों में वीणा और पुस्तक धारण करने वाली, हे भगवती भारती (सरस्वती) देवी, आपको बार-बार नमस्कार है। हे भद्रकाली और सरस्वती, वेद, वेदांग और वेदांत की विद्या रूपा, आपको नमस्कार है। यह चंदन, पुष्प और बिल्व पत्र की अंजलि आपको अर्पित है। इसके बाद इस मंत्र ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ का जाप करें।

पुष्पांजलि मंत्र
मां सरस्वती को पुष्पांजलि कैसे अर्पित करें
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के समय पुष्पांजलि अर्पण करने की विधि इस प्रकार है। सबसे पहले पूजा के मुख्य मुहूर्त 23 जनवरी 2026 को सुबह 7:13 से दोपहर 12:33 तक में सरस्वती माता की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें। सफेद या पीले वस्त्र पहनें। दोनों हाथों में पीले फूल लें। इसके साथ में थोड़ा चंदन और बिल्व पत्र (या आम के पत्ते) भी लें। शांत मन से मंत्र का उच्चारण करें। मंत्र के अंतिम भाग में ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ कहते हुए फूलों की अंजलि माता के चरणों में अर्पित करें। यह क्रिया 3, 5, 7 या 11 बार दोहराएं। अर्पण के बाद ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ का 21 या 108 बार जप करें। पूजा के अंत में सरस्वती आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।
पुष्पांजलि मंत्र का महत्व और लाभ
इस मंत्र का जाप करने से बुद्धि तेज होती है, एकाग्रता बढ़ती है और वाणी में मधुरता आती है। छात्रों के लिए यह मंत्र परीक्षा में सफलता दिलाता है। वाणी कलाकारों, लेखकों और शिक्षकों के लिए यह मंत्र विशेष कृपा प्रदान करता है। साथ ही यह मंत्र पितृ दोष और नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा करता है। बसंत पंचमी पर पुष्पांजलि मंत्र के साथ फूल अर्पित करना सरस्वती पूजा को पूर्णता देता है। इस मंत्र का सही उच्चारण और श्रद्धा से जाप करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
