Sangrand May 2026 Date: मई का महीना शुरू होते ही लोगों के मन में एक सवाल उठने लगता है कि इस बार संग्रांद (Sangrand) कब है और इसका क्या महत्व है। खासकर पंजाब, हरियाणा और सिख समुदाय में संग्रांद का दिन बेहद श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यहां से नोट करें कि संग्रांद कब की है मई 2026 में।
मई में संग्रांद कब पड़ेगी 2026
साल 2026 में जेठ महीने की संग्रांद 15 मई, शुक्रवार को पड़ रही है। यह दिन पारंपरिक पंजाबी सौर कैलेंडर और नानकशाही कैलेंडर में नए महीने की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
संग्रांद क्या होती है
संग्रांद या संक्रांति उस समय को कहा जाता है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। भारतीय ज्योतिष और पारंपरिक सौर कैलेंडर में इसे नए महीने की शुरुआत माना जाता है। पंजाब में इसे संग्रांद कहा जाता है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में इसे संक्रांति के नाम से जाना जाता है।
हर महीने आने वाली संग्रांद का अपना अलग धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है, लेकिन जेठ संग्रांद खासतौर पर गर्मी के मौसम और नए कृषि चक्र की शुरुआत से भी जुड़ी मानी जाती है।
जेठ संग्रांद 2026 में कब है
साल 2026 में जेठ संग्रांद 15 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन से पंजाबी कैलेंडर के अनुसार जेठ महीने की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, पाठ और सेवा का विशेष फल मिलता है। कई लोग सुबह स्नान कर गुरुद्वारे जाते हैं और अरदास करते हैं।
सिख परंपरा में इस दिन गुरुबाणी का पाठ और बारहमाहा सुनने की परंपरा भी है। बारहमाहा गुरु नानक देव जी और गुरु अर्जन देव जी की रचनाएं हैं, जिनमें बारह महीनों के माध्यम से इंसान और परमात्मा के रिश्ते को बेहद भावुक तरीके से समझाया गया है।
गुरुद्वारों में विशेष दीवान और कीर्तन
संग्रांद के दिन कई गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजाए जाते हैं। श्रद्धालु सुबह से ही मत्था टेकने पहुंचते हैं और कीर्तन-शबद सुनते हैं। पंजाब के ग्रामीण इलाकों में लोग इस दिन नए काम की शुरुआत को भी शुभ मानते हैं।
कुछ परिवार इस मौके पर जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या अनाज दान करते हैं। यह दिन आत्मचिंतन, नई शुरुआत और आध्यात्मिक शांति का संदेश देता है।
सिर्फ धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक महत्व भी
संग्रांद केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह मौसम और जीवन के बदलाव का भी प्रतीक मानी जाती है। जेठ महीने की शुरुआत के साथ गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ती है और खेती-किसानी से जुड़े कई कामों की तैयारी भी शुरू हो जाती है।
पंजाबी संस्कृति में हर महीने की संग्रांद लोगों को प्रकृति के बदलावों से जोड़ने का काम करती है। यही वजह है कि आज भी गांवों और शहरों में लोग इस दिन को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं।
संग्रांद पर क्या करना चाहिए
संग्रांद के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। गुरुद्वारे जाकर अरदास करना, गुरुबाणी सुनना और जरूरतमंदों की मदद करना इस दिन की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। कई लोग इस दिन घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना से पाठ भी करवाते हैं।
