May Sankranti date name 2026: संक्रान्ति का अर्थ ही है ‘परिवर्तन’। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना प्रकृति और मानव जीवन दोनों में बदलाव का संकेत देता है। वृषभ संक्रान्ति को हिन्दू सौर वर्ष के दूसरे महीने की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इस दिन से मौसम में गर्मी का प्रभाव थोड़ा स्थिर होने लगता है और प्रकृति में एक तरह की स्थायित्व की ऊर्जा महसूस होती है। धार्मिक मान्यता है कि संक्रान्ति के समय किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। यहां देखें कि मई में संक्रांति कब है 2026, मई की संक्रांति का नाम।
मई 2026 में संक्रांति कब है
ज्येष्ठ सौर मास की शुरुआत का संकेत देने वाली वृषभ संक्रान्ति इस बार शुक्रवार, 15 मई 2026 को पड़ रही है। यह वह समय होता है जब सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। इस तरह मई 2026 में आने वाली संक्रान्ति का नाम वृषभ संक्रान्ति है।
मई 2026 वृषभ संक्रान्ति डेट एंड टाइम
वृषभ संक्रान्ति 2026 में मई 15 को शुक्रवार के दिन पड़ेगी। हिन्दू सौर कैलेंडर के अनुसार यह परिवर्तन सिर्फ खगोलीय घटना नहीं, बल्कि जीवन में नए संतुलन और ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है।
वृषभ संक्रान्ति 2026 पुण्य काल
15 मई को वृषभ संक्रान्ति का पुण्य काल सुबह 05:30 बजे से 06:28 बजे तक रहेगा, यानी कुल 58 मिनट का अत्यंत शुभ समय, जिसमें किए गए दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है।
वृषभ संक्रान्ति पुण्य काल में क्या करें
वृषभ संक्रान्ति का पुण्य काल भले ही छोटा हो, लेकिन इसकी महत्ता बहुत बड़ी मानी जाती है। इस समय स्नान, दान और भगवान सूर्य की उपासना करना विशेष फलदायी होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि संक्रान्ति से पहले की सोलह घटी और संक्रान्ति क्षण तक का समय दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम होता है। इस दौरान तिल, गुड़, वस्त्र और जल का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
वृषभ संक्रान्ति 2026 का क्या प्रभाव होगा
द्रिक पंचांग पर दी गई जानकारी के अनुसार, वृषभ संक्रान्ति व्यापारियों के लिए अच्छा संकेत लेकर आ रही है। हालांकि इस दौरान वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही समाज में थोड़ी तनावपूर्ण स्थितियां भी बन सकती हैं, लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा और देशों के बीच संबंध बेहतर होने के संकेत भी मिल रहे हैं। अनाज के भंडारण में वृद्धि भी इस संक्रान्ति का एक प्रमुख संकेत माना जा रहा है।
वृषभ संक्रान्ति पर गौदान का विशेष महत्व
वृषभ संक्रान्ति के दिन गौदान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। गाय को भारतीय संस्कृति में माता का दर्जा दिया गया है, और इस दिन उसका दान करने से व्यक्ति को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। अगर गौदान संभव न हो, तो गाय को हरा चारा खिलाना या गोशाला में दान देना भी उतना ही शुभ माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक सकारात्मक कदम है।
जानिए मई में पूर्णिमा कब है 2026। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|
