अध्यात्म

Sandhya Arghya Time Today (27 October 2025): पटना, पूर्णिया, आरा, भागलपुर, सीवान, बेगुसराय में आज सूर्यास्त का समय, छठ पूजा संध्या अर्घ्य, सूरज कितने बजे तक डूबेगा यहां देखें सनसेट डिटेल्स

Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today (27-OCT-25) पूर्णिया, आरा, भागलपुर, रायपुरा, बेगुसराय में आज सूर्यास्त का समय, छठ पूजा संध्या अर्घ टाइमिंग, सूर्य कितने बजे तक डूबेगा (सनसेट डिटेल्स): इस समय पूरा बिहार छठ मैया की भक्ति में डूबा हुआ है। सभी लोग छठ घाट पहुंच रहे हैं और घरों में छठ की चांदनी बिखरी हुई है। अब बस इंतजार है तो सूर्यास्त का, जब सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाएगा। यहां से आप जान सकते हैं कि बिहार के अलग-अलग शहरों में आज सूरज कितने बजे डूबने वाला है।

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बिहार में सूर्यास्त का समय 27 अक्टूबर 2025 (pic credit: canva)

Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today (27-OCT-25): संध्या अर्घ्य यानी सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य देना। ये छठ पूजा के तीसरे दिन यानी आज होता है, जब व्रती महिलाएँ और परिवार सूर्य देव के अस्त होते रूप को जल अर्पित कर धन्यवाद देती हैं। आज हर किसी को सूर्यास्त का इंतजार रहता है। सूरज डूबने के समय, डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। यहां से आप जान सकते हैं कि बिहार में सूर्यास्त कितने बजे होने वाला है। यहां बिहार के अलग-अलग जगहों के सूरज डूबने के समय के बारे में बताया गया है। लिस्ट में से आप अपने शहर का नाम ढूंढ सकते हैं।

Bihar Mein Aaj Suryast Kitne Baje Hoga-

पटना5:12 PM
गया5:13 PM
भागलपुर5:03 PM
मुजफ्फरपुर5:02 PM
दरभंगा5:08 PM
पूर्णिया5:01 PM
भोजपुर5:13 PM
सुपौल5:04 PM
बेगूसराय5:07 PM
सहरसा5:05 PM
सीवान5:14 PM
मधेपुरा5:06 PM
नालंदा5:11 PM
बक्सर5:15 PM
सीतामढ़ी5:08 PM

बिहार में छठ संध्या अर्घ्य के बाद क्या होता है?

बिहार में छठ पूजा बेहद श्रद्धा और परंपरा से मनाई जाती है, और संध्या अर्घ्य (तीसरे दिन) के बाद का समय तो पूरे पर्व का सबसे भावनात्मक और भक्ति से भरा पल होता है। जब सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद सूर्य अस्त हो जाता है, तो व्रती महिलाएँ और परिवार की अन्य महिलाएँ दीप जलाकर आरती करती हैं। इसके बाद वे कोसी भरने की रस्म निभाती हैं, इसमें बांस की सुप में गेहूँ, फल, ठेकुआ, दीपक, सिंदूर और हल्दी रखी जाती है। छठ के गीत गाए जाते हैं। संध्या अर्घ्य के बाद घाटों और घरों में दीपक जलाए जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण दीपों की चाँदनी से जगमगा उठता है। नदी के किनारे, गली-मोहल्ले और घरों की छतों पर दीयों की कतारें लगाई जाती हैं। इसे छठ की चाँदनी कहा जाता है। अर्घ्य के बाद महिलाएँ रातभर जागरण करती हैं। छठ मैया और सूर्यदेव की स्तुति में भजन-कीर्तन गाती हैं।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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