Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today (27-OCT-25): संध्या अर्घ्य यानी सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य देना। ये छठ पूजा के तीसरे दिन यानी आज होता है, जब व्रती महिलाएँ और परिवार सूर्य देव के अस्त होते रूप को जल अर्पित कर धन्यवाद देती हैं। आज हर किसी को सूर्यास्त का इंतजार रहता है। सूरज डूबने के समय, डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। यहां से आप जान सकते हैं कि बिहार में सूर्यास्त कितने बजे होने वाला है। यहां बिहार के अलग-अलग जगहों के सूरज डूबने के समय के बारे में बताया गया है। लिस्ट में से आप अपने शहर का नाम ढूंढ सकते हैं।
Bihar Mein Aaj Suryast Kitne Baje Hoga-
| पटना | 5:12 PM |
| गया | 5:13 PM |
| भागलपुर | 5:03 PM |
| मुजफ्फरपुर | 5:02 PM |
| दरभंगा | 5:08 PM |
| पूर्णिया | 5:01 PM |
| भोजपुर | 5:13 PM |
| सुपौल | 5:04 PM |
| बेगूसराय | 5:07 PM |
| सहरसा | 5:05 PM |
| सीवान | 5:14 PM |
| मधेपुरा | 5:06 PM |
| नालंदा | 5:11 PM |
| बक्सर | 5:15 PM |
| सीतामढ़ी | 5:08 PM |
बिहार में छठ संध्या अर्घ्य के बाद क्या होता है?
बिहार में छठ पूजा बेहद श्रद्धा और परंपरा से मनाई जाती है, और संध्या अर्घ्य (तीसरे दिन) के बाद का समय तो पूरे पर्व का सबसे भावनात्मक और भक्ति से भरा पल होता है। जब सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद सूर्य अस्त हो जाता है, तो व्रती महिलाएँ और परिवार की अन्य महिलाएँ दीप जलाकर आरती करती हैं। इसके बाद वे कोसी भरने की रस्म निभाती हैं, इसमें बांस की सुप में गेहूँ, फल, ठेकुआ, दीपक, सिंदूर और हल्दी रखी जाती है। छठ के गीत गाए जाते हैं। संध्या अर्घ्य के बाद घाटों और घरों में दीपक जलाए जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण दीपों की चाँदनी से जगमगा उठता है। नदी के किनारे, गली-मोहल्ले और घरों की छतों पर दीयों की कतारें लगाई जाती हैं। इसे छठ की चाँदनी कहा जाता है। अर्घ्य के बाद महिलाएँ रातभर जागरण करती हैं। छठ मैया और सूर्यदेव की स्तुति में भजन-कीर्तन गाती हैं।
