Sakat Chauth 2026 Prasad Importance: सकट चौथ का व्रत संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है। पूजा में तिल-गुड़ के लड्डू मुख्य प्रसाद होते हैं, हालांकि कई क्षेत्रों में शकरकंद (स्वीट पोटेटो) का प्रसाद शामिल करना अनिवार्य माना जाता है। बिना शकरकंद के प्रसाद को अधूरा समझा जाता है। आज 6 जनवरी 2026, मंगलवार को सकट चौथ का व्रत रखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि प्रसाद में शकरकंद क्यों जरूरी है और इसके धार्मिक व वैज्ञानिक कारण क्या हैं?
क्यों सकट चौथ के प्रसाद में शामिल होती है शकरकंद?
धार्मिक परंपरा के अनुसार, सकट चौथ पर गणेश जी को तिल-गुड़ के साथ शकरकंद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। कई जगहों पर व्रत का पारण दूध और शकरकंद खाकर किया जाता है। मान्यता है कि शकरकंद का प्रसाद चढ़ाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं।
उत्तर भारत, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे क्षेत्रों में शकरकंद को पूजा सामग्री में शामिल करना परंपरा है। यह भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और संतान की रक्षा होती है। पूजा में शकरकंद न होने से प्रसाद अधूरा माना जाता है, जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है। माना जाता है कि शकरकंद सकट माता और गणेश जी को काफी पसंद है। इस कारण इसको भोग में शामिल किया जाता है।
क्या हैं शकरकंद खाने के फायदे?
सकट चौथ सर्दियों के अंत में आता है, जब मौसम बदलाव से शरीर कमजोर हो सकता है। शकरकंद गर्म तासीर वाला होता है और इसके सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। शकरकंद में विटामिन ए, सी, आयरन, कैल्शियम और फाइबर भरपूर होता है, जो इम्यूनिटी बढ़ाता है और सर्दी-जुकाम से बचाता है। दूध के साथ शकरकंद खाने से थकान दूर होती है और पाचन सुधारता है। लंबे निर्जला व्रत के बाद शकरकंद और दूध का सेवन शरीर को ऊर्जा देता है और कमजोरी नहीं होने देता। यह पोषक तत्वों से भरपूर होने से बच्चों के विकास के लिए भी फायदेमंद है।
सकट चौथ प्रसाद में शकरकंद कैसे शामिल करें
पूजा में गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू के साथ उबला या भुना शकरकंद चढ़ाएं। चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देने पर व्रत पारण दूध और शकरकंद से करें। प्रसाद के रूप में परिवार में बांटें।
