अध्यात्म

आखिर जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के बाद रथ के पहियों का क्या होता है? जानिए कीमत, नियम और पूरी प्रक्रिया

Jagannath Puri Rath Yatra: थ के जिन हिस्सों का धार्मिक उपयोग समाप्त हो जाता है, उन्हें मंदिर प्रशासन (SJTA) एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत श्रद्धालुओं, मठों और संस्थाओं के लिए उपलब्ध कराता है।

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जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के बाद 15 दिन में खुल कर अलग होता है रथ (AI Generated Image)

Jagannath Puri Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में आज विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की शुरुआत हो गई है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों में सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे। यहां तीनों देवता सात दिनों तक रहेंगे। इसके बाद 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा के जरिए वे मुख्य मंदिर लौटेंगे। परंपरा के अनुसार भगवान दो दिन तक रथों पर ही विराजेंगे और 27 जुलाई को दोबारा श्रीमंदिर में प्रवेश करेंगे। इसके कुछ समय बाद मंदिर प्रशासन रथों को खोलने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

बहुत से लोगों के मन में सवाल आता है कि इतने विशाल रथों और उनके पहियों का आखिर क्या होता है? क्या उन्हें हमेशा के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है या फिर किसी और काम में इस्तेमाल किया जाता है? दिलचस्प बात यह है कि रथयात्रा खत्म होने के बाद इन रथों के साथ जो होता है, वह भी उतना ही अनूठा है जितनी स्वयं यह परंपरा।

हर साल नए बनते हैं रथ

जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं पर मशहूर लेखक अन्ना चार्लोट एशमैन ने अपनी किताब द कल्ट ऑफ जगन्नाथ (The Cult of Jagannath) में लिखा है कि रथयात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ हर वर्ष नए बनाए जाते हैं। इनका निर्माण अक्षय तृतीया से शुरू होता है और इसके लिए खास तरह की पवित्र लकड़ियों का उपयोग किया जाता है।

हर साल बनाए जाते हैं नए रथ (AI Generated Image)

हर साल बनाए जाते हैं नए रथ (AI Generated Image)

इन तीनों रथों के नाम, उनकी ऊंचाई और उनमें लगने वाले पहियों की संख्या भी अलग-अलग होती है। भगवान जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष', भगवान बलभद्र का 'तालध्वज' और देवी सुभद्रा का रथ 'दर्पदलन' कहलाता है।

यात्रा के बाद रथ कैसे खोले जाते हैं?

रथयात्रा और फिर 'बहुदा यात्रा' पूरी होने के बाद रथों को एक साथ या झटके से नहीं तोड़ा जाता। यह पूरी प्रक्रिया बेहद पवित्र और धार्मिक विधि-विधान के अनुसार होती है।

जगन्नाथ संस्कृति के प्रसिद्ध शोधकर्ता हर्मन कुल्के ने अपनी किताब जगन्नाथ रिविजिटेड (Jagannath Revisited) में बताया है कि रथों को बहुत ही व्यवस्थित ढंग से क्रमवार अलग किया जाता है। सबसे पहले रथ का ऊपरी हिस्सा (कलश, छत्र आदि) हटाया जाता है। इसके बाद लकड़ी के मुख्य ढांचे को अलग किया जाता है और अंत में रथ के पवित्र पहियों को निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई करीब 15 दिनों का समय लग जाता है।

क्या रथ के सभी हिस्से बिक जाते हैं?

नहीं, यही इस परंपरा का सबसे रोचक और आस्था से जुड़ा पहलू है। परंपरा के अनुसार रथ के कुछ विशेष हिस्सों की कभी भी नीलामी या बिक्री नहीं की जा सकती। इनमें शामिल हैं:

- लकड़ी के पवित्र घोड़े और सारथी की प्रतिमाएं

- रथ पर सुशोभित देवी-देवताओं की पार्श्व मूर्तियां

- रथ की पवित्र लोहे की कीलें और विशेष नक्काशी वाले हिस्से

इन सभी को अत्यंत पूजनीय माना जाता है और इन्हें 'श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन' (SJTA) की देखरेख में हमेशा के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है।

SJTA रथ की सारी चीजें नहीं बेचता। ये खास चीजें अगल साल रथयात्रा के लिए संभालकर रख ली जाती हैं।

SJTA रथ की सारी चीजें नहीं बेचता। ये खास चीजें अगल साल रथयात्रा के लिए संभालकर रख ली जाती हैं।

रथ के किन हिस्सों को खरीद सकते हैं श्रद्धालु?

रथ के जिन हिस्सों का धार्मिक उपयोग समाप्त हो जाता है, उन्हें मंदिर प्रशासन (SJTA) एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत श्रद्धालुओं, मठों और संस्थाओं के लिए उपलब्ध कराता है। मुख्य रूप से तीनों रथों के पहिए, खंभे, पटिए और अन्य सहायक लकड़ियां बिक्री के लिए रखी जाती हैं।

चूंकि इन पहियों को साक्षात भगवान के रथ का हिस्सा होने के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए इन्हें प्राप्त करने के लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं और बड़ी संस्थाओं में भारी प्रतिस्पर्धा होती है।

रथ के पहियों की संख्या और निर्धारित मूल्य (2025 के अनुसार)

मंदिर प्रशासन हर साल इन पहियों की बिक्री के लिए एक न्यूनतम मूल्य तय करता है। यदि एक पहिए के लिए एक से अधिक दावेदार होते हैं, तो अधिकतम बोली लगाने वाले को इसे सौंप दिया जाता है। साल 2025 में तय की गई कीमतें इस प्रकार थी:

रथ का नामभगवान/देवीकुल पहियों की संख्यान्यूनतम निर्धारित मूल्य (प्रति पहिया)
नंदीघोषभगवान जगन्नाथ16 पहिए₹ 3,00,000
तालध्वजभगवान बलभद्र14 पहिए₹ 2,00,000
दर्पदलनदेवी सुभद्रा12 पहिए₹ 1,50,000

गाइडलाइन: अगर आप रथ का पहिया खरीदना चाहते हैं, तो क्या है प्रक्रिया?

रथ का कोई भी हिस्सा या पहिया खरीदना किसी सामान्य व्यावसायिक नीलामी जैसा नहीं होता। इसके लिए 'श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन' (SJTA) के कड़े नियम हैं:

आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक श्रद्धालु या संस्था को सीधे पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) कार्यालय में एक औपचारिक आवेदन देना होता है।

शपथ पत्र और कड़े नियम: खरीदार को लिखित रूप में एक कानूनी घोषणा/शपथ पत्र देना पड़ता है कि वह इस पवित्र पहिए को पूर्ण सम्मान के साथ अपने घर, संस्थान या मठ में रखेगा।

व्यावसायिक उपयोग पर रोक: सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह होती है कि खरीदार इसे आगे किसी अन्य व्यक्ति को व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं बेच सकता। ऐसा रथ की पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखने के लिए किया जाता है।

बची हुई लकड़ियों का क्या होता है?

जो लकड़ियां बिक्री या नीलामी के बाद बच जाती हैं, उनका उपयोग मंदिर परिसर के भीतर ही किया जाता है। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, इन पवित्र लकड़ियों का उपयोग मुख्य रूप से भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध 'महाप्रसाद' तैयार करने के लिए मंदिर की विशाल रसोई में ईंधन के रूप में किया जाता है।

नए संसद भवन में भी पहुंचेंगे पहिये

समय-समय पर मंदिर प्रशासन द्वारा ये ऐतिहासिक पहिए देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों को सम्मान स्वरूप भेंट या प्रदान किए गए हैं। ओडिशा विधानसभा परिसर, भुवनेश्वर स्थित राज्य अतिथि भवन और कटक के कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों में इन्हें पूरी मर्यादा के साथ स्थापित किया जा चुका है। इसके अलावा, भारत के नए संसद भवन परिसर में भी तीनों रथों का एक-एक पहिया लगाने का प्रस्ताव स्वीकार किया जा चुका है।

तो देखा आपने कि जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा समाप्त होने के बाद भी इन रथों की कहानी खत्म नहीं होती। उनके पहिए और लकड़ियां श्रद्धा का हिस्सा बनकर नए घरों और संस्थानों तक पहुंचते हैं। एक साधारण-सा दिखने वाला लकड़ी का पहिया भी लाखों रुपये में इसलिए बिकता है, क्योंकि उसकी असली कीमत उसकी लकड़ी नहीं, उससे जुड़ी करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था और भगवान का आशीर्वाद तय करता है।

FAQs

रथ के पहिए को घर में रखने के क्या नियम हैं?

चूंकि यह भगवान के रथ का हिस्सा है, इसलिए इसे घर के किसी साफ और पवित्र स्थान पर स्टैंड के सहारे सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाता है। इसे कभी भी जमीन पर लावारिस या अपवित्र जगह पर नहीं रखा जाना चाहिए।

क्या रथ के पहियों की ऑनलाइन नीलामी होती है?

पहियों की बिक्री से मिलने वाले धन का क्या किया जाता है?

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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