अध्यात्म

रमजान में भूल से भी न करें ये 6 गलतियां, टूट सकता है रोजा, करना पड़ेगा कजा और कफ्फारा

The Common Mistakes That Can Break: रमजान के पाक महीने में लोग रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। यह हर बालिग मुसलमान का फर्ज होता है। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, यह आध्यात्मिक और आत्मिक शुद्धि का अभ्यास है। इस कारण रोजा रखने के दौरान काफी सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि जरा सी लापरवाही के चलते रोजा टूट भी सकता है। आइए जानते हैं कि रोजेदारों को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

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रोजा रखने के दौरान कौन सी गलतियां न करें?

The Common Mistakes That Can Break: रमज़ान का महीना इस्लाम में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस महीने में रोज़ा रखना हर बालिग, समझदार और स्वस्थ मुस्लिम पुरुष व महिला पर फर्ज़ है। रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, परहेज़गारी और आध्यात्मिक शुद्धि का अभ्यास है। इस दौरान 5 वक्त की नमाज भी अनिवार्य मानी गई है।

इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार पांचों वक्त की नमाज़ अदा करना अनिवार्य है। केवल रोज़ा रखना और नमाज़ न पढ़ना अधूरी इबादत माना जाता है। रोज़ा आत्मशुद्धि का साधन है और नमाज़ उसके साथ मिलकर इबादत को पूर्ण बनाती है। इस कारण यह जानना जरूरी है कि किन कार्यों से रोज़ा टूट जाता है और किन परिस्थितियों में शरई छूट दी गई है।

इन कार्यों से टूट जाता है रोज़ा?

  • अगर कोई जानबूझकर रोजे के दौरान कुछ खा या पी लेता है तो रोजा टूट जाता है। यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि वह रोज़े में है, भोजन या पानी ग्रहण करता है, तो उसका रोज़ा अमान्य हो जाता है। अगर रोजे के दौरान पति-पत्नी के बीच संबंध बनाते हैं तो भी रोजा टूट जाता है। इसके लिए केवल क़ज़ा (छूटा रोज़ा बाद में रखना) ही नहीं, बल्कि कफ़्फ़ारा भी जरूरी हो सकता है।
  • अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के बारे में जानबूझकर झूठ बोलना अत्यंत गंभीर माना गया है। जानकारों के अनुसार यह भी रोज़े को नष्ट कर देता है, क्योंकि रोज़ा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक अनुशासन भी है।
  • पूरे सिर को जानबूझकर पानी में डुबोना, धुआं या भाप को जानबूझकर अंदर लेना अथवा किसी प्राकृतिक छिद्र (जैसे मुंह या नाक) से वस्तु को शरीर के अंदर पहुंचाना भी रोज़ा तोड़ सकता है। इसी प्रकार जानबूझकर उल्टी करना भी रोज़ा तोड़ देता है, हालांकि यदि उल्टी अनजाने में हो जाए तो रोज़ा बरकरार रहता है।
  • जनाबत (वीर्य स्राव के कारण अशुद्धता) की अवस्था में सुबह तक रहना, यानी फज्र से पहले गुस्ल न करना भी रोज़े की शर्तों के खिलाफ माना जाता है। किसी भी तरह से वीर्यपात करना भी रोज़ा तोड़ने वाले कार्यों में शामिल है।
  • ऐसे इंजेक्शन या ड्रिप जिनसे पोषक तत्व शरीर में पहुंचते हैं और भोजन का काम करते हैं, वे भी रोज़ा तोड़ सकते हैं। हालांकि सामान्य दवा के इंजेक्शन के बारे में अलग-अलग मत हैं, लेकिन पोषण देने वाले इंजेक्शन से रोज़ा अमान्य माना जाता है।
  • यात्रा करना भी रोज़े पर असर डालता है। यदि कोई व्यक्ति अपने निवास स्थान से लगभग आठ फरासिख (करीब 27–50 मील) या उससे अधिक दूरी की यात्रा करता है, तो उसे रोज़ा तोड़ने की अनुमति है, लेकिन बाद में उतने दिनों की क़ज़ा करना अनिवार्य है।

रोजा टूटने पर क्या करें (Roza Tutne Par Kya Karen)

अगर कोई व्यक्ति अनजाने में रोजा तोड़ता है या गलती से टूट जाता है तो उसको कजा करनी होगी। वहीं, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर रोज़ा तोड़ता है, तो उसे केवल एक दिन की क़ज़ा नहीं करनी होती है, बल्कि कफ़्फ़ारा भी अदा करना पड़ता है। कफ़्फ़ारा के रूप में या तो 60 जरूरतमंदों को भोजन कराना होता है या प्रत्येक छूटे हुए दिन के बदले लगातार 60 दिनों तक रोज़ा रखना होता है।

क्या होती है क़ज़ा? (Kya Hoti Hai Qaza)

क़ज़ा का मतलब है कि जो रोज़ा किसी वजह से छूट गया हो, उसकी बाद में भरपाई करना। अगर कोई व्यक्ति रमज़ान में किसी सही कारण से रोज़ा नहीं रख पाता, जैसे बीमारी, यात्रा, मासिक धर्म, गर्भावस्था या भूलवश रोज़ा टूट जाना, तो उस दिन के बदले में बाद में एक रोज़ा रखना होता है। इसे ही क़ज़ा कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी ने बीमारी की वजह से 3 रोज़े नहीं रखे, तो ठीक होने के बाद उसे 3 रोज़े रखने होंगे। क़ज़ा में केवल उतने ही रोज़े रखने होते हैं जितने छूटे हों, न ज्यादा, न कम।

क्या होता है कफ़्फ़ारा? (Kya Hota Hai Kaffara)

कफ़्फ़ारा का मतलब प्रायश्चित है। यह जानबूझकर रोजा तोड़ने वालों के लिए अनिवार्य होता है। अगर कोई व्यक्ति बिना किसी मजबूरी के, जानबूझकर खाना-पीना कर ले या रोज़े की हालत में शारीरिक संबंध बना ले, तो सिर्फ क़ज़ा काफी नहीं होती, बल्कि कफ़्फ़ारा भी देना पड़ता है।कफ़्फ़ारा के तौर पर आमतौर पर दो विकल्प बताए जाते हैं। इनमें पहला लगातार 60 दिन रोज़ा रखना है। वहीं, दूसरा 60 गरीब लोगों को खाना खिलाना है। अगर 1 दिन का रोजा तोड़ा गया तो 1 कजा और 60 रोजों को कफ्फारा या 60 जरूरतमंदों को भोजन कराना होगा।

किन्हें रोज़ा न रखने की छूट है? (Kinko Roza Na Rakhne Ki Riyayat Hai)

इस्लाम में रोज़ा फर्ज़ तो है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में छूट भी दी गई है। जो व्यक्ति बीमार है और रोज़ा रखने से उसकी बीमारी बढ़ सकती है, उसे रोज़ा न रखने की अनुमति है। यदि वह बाद में स्वस्थ हो जाए, तो उसे छूटे हुए रोज़ों की क़ज़ा करनी होगी। यदि बीमारी लंबी चले और एक वर्ष बाद भी वह ठीक न हो पाए, तो उसे हर छूटे दिन के बदले जरूरतमंद को भोजन देना होगा।

मासिक धर्म और प्रसव के दौरान महिलाओं को रोज़ा रखना वर्जित है। इन दिनों में वे रोज़ा नहीं रखेंगी, लेकिन बाद में उतने ही दिनों की क़ज़ा करना अनिवार्य होगा। मासिक धर्म समाप्त होने के बाद गुस्ल करके वे दोबारा रोज़ा शुरू कर सकती हैं।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं यदि यह महसूस करें कि रोज़ा रखने से बच्चे को नुकसान हो सकता है, तो उन्हें रोज़ा तोड़ने की अनुमति है। उन्हें बाद में छूटे हुए रोज़ों की भरपाई करनी होगी।

अस्थायी मानसिक बीमारी, बेहोशी, या ऐसी बीमारी जिसमें लगातार प्यास लगती हो और ठीक होने की उम्मीद न हो, ऐसे लोगों पर रोज़ा अनिवार्य नहीं है। बहुत अधिक वृद्ध और कमजोर व्यक्ति जिन्हें रोज़ा रखना कठिन हो, उन्हें भी छूट दी गई है। यदि वे बाद में रोज़ा रख सकें तो बेहतर है, अन्यथा उन पर कफ़्फ़ारा भी अनिवार्य नहीं है। बच्चों और मानसिक रूप से असमर्थ व्यक्तियों पर रोज़ा फर्ज़ नहीं है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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