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Raja Sankranti Wishes: राजा संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं, जानिए क्यों और कैसे मनाया जाता है ये पर्व

Raja Sankranti Wishes: राजा संक्रांति या रज पर्व ओडिशा के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है जो पूरे तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस त्योहार में भगवान विष्णु की पत्नी भूमा देवी की अराधना की जाती है। चलिए जानते हैं राजा संक्रांति के बारे में दिलचस्प बातें।

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Raja Sankranti 2024

Happy Raja Sankranti (राजा संक्रांति): हर साल ओडिशा में नारीत्व का जश्न मनाने के लिए तीन दिवसीय पर्व मनाया जाता है जिसे रजो पर्व (Rajo Festival) या राजा संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं अनुसार इन तीन दिनों के बीच धरती माता मासिक धर्म से गुजरती हैं और फिर चौथा दिन धरती मां के शुद्धिकरण स्नान का दिन होता है। ओडिशा में इन तीनों दिन महिलाएं कोई काम नहीं करती हैं। आमतौर पर इस दौरान रसोई तक पुरुष संभालते हैं। बता दें इस पर्व का पहला दिन पहिली रज (Pahili Raja), दूसरा दिन मिथुन संक्रांति (Mithun Sankranti) और तीसरा दिन भू दाह या बसी रज के नाम से जाना जाता है। चलिए जानते हैं राजा संक्रांति पर्व कैसे मनाया जाता है।

Raja Sankranti Wishes In Hindi

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रज पर्व कैसे मनाया जाता है? (How To Celebrate Raja Sankranti Festival)

यह मुख्यतः लड़कियों का त्यौहार है। इस दौरान लड़कियां पोड़ पीठा जैसे पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन का सेवन करती हैं और झूले झूलती हैं। ओडिया लोग इस त्योहार के समय कोई भी निर्माण कार्य नहीं करते। बता दें पहला दिन पहिली रजो के नाम से जाना जाता है ये धरती माता के मासिक धर्म का पहला दिन माना जाता है। इस दिन लड़कियां जमीन पर नंगे पांव नहीं चलती हैं। दूसरा दिन भूदेवी के रजस्वला का माना जाता है। जिसे मिथुन संक्रांति या रजो संक्रांति के नाम से जाना जाता है। तीसरा दिन शेष रजो के नाम से जाता है। इस दिन इस त्योहार समापन हो जताा है। इस दौरान पोडापीठा, चाकुली पीठा इत्यादि व्यंजन जरूर बनाया जाता है।

रज पर्व क्यों मनाया जाता है। (Why Raja Sankranti Is Celebrated)

पौराणिक कथाओं अनुसार भगवान विष्णु की पत्नी भूमा देवी (धरती माता) इस अवधि के दौरान अपने मासिक धर्म से गुजरती हैं। यह एक मात्र ऐसा त्योहार है जो स्त्रीत्व के मासिक धर्म वाले पहलू का जश्न मनाता है। क्योंकि मासिक धर्म को प्रजनन क्षमता का संकेत माना गया है इसलिए यह त्योहार महिलाओं द्वारा दूसरे जीवन को जन्म देने की उनकी क्षमता का जश्न मनाता है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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