अध्यात्म

पौष पूर्णिमा 2026 कब है आज या कल, जानिए साल 2026 की पहली पूर्णिमा की सही तिथि, पूजन व दान का शुभ मुहूर्त

Purima Aaj Ya Kal (पूर्णिमा कब है आज या कल 2026) Puja Vidhi Timing Details in Hindi: नववर्ष 2026 की शुरुआत हो चुकी है। इस साल की पहली पूर्णिमा पौष माह की पूर्णिमा पड़ने वाली है। पूर्णिमा तिथि को बेहद ही खास तिथि माना जाता है। इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि के दिन पवित्र नदी में स्नान और जरूरतमंदों को दान करने से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। आइए जानते हैं कि साल 2025 की पहली पूर्णिमा तिथि किस दिन है।

साल 2026 की पहली पूर्णिमा तिथि कब है?

साल 2026 की पहली पूर्णिमा तिथि कब है?

Purima Aaj Ya Kal 2026 (पूर्णिमा कब है आज या कल 2026): सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान, दान और तप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 की पहली पूर्णिमा पौष माह में आ रही है, जिसका विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन से प्रयागराज में माघ मेले की पावन शुरुआत भी हो रही है, जो इसे और भी खास बनाता है।

पौष पूर्णिमा 2026 कब है (Purima Kab Hai)

वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को शाम 06:53 बजे से होगी और इसका समापन 3 जनवरी 2026 को दोपहर 03:32 बजे होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान 3 जनवरी 2026, शनिवार को ही करना शास्त्रसम्मत रहेगा। वहीं, 2 जनवरी को चंद्रमा का उदय शाम के समय होगा, इसलिए रात में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य आदि पूजा इसी दिन विशेष फलदायी रहेगी। 3 जनवरी की सुबह पवित्र नदी में स्नान, पूजा और दान करना शुभ रहेगा।

पौष पूर्णिमा 2026 तिथि शुभ मुहूर्त का समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:25 से 6:20 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:46 बजे तक
  • पौष पूर्णिमा 2026 का आरंभ: 2 जनवरी की शाम 6:53 बजे से
  • पौष पूर्णिमा 2026 की समाप्ति: 3 जनवरी 2026 को दोपहर 3:32 बजे
  • व्रत रखने का शुभ समय: 3 जनवरी 2026, शनिवार

पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

पौष पूर्णिमा साल की सभी पूर्णिमाओं में विशेष स्थान रखती है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और जीवन के दुख-कष्ट दूर होते हैं। सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या पढ़ना इस दिन अत्यंत फलदायी है। कई संत और भक्त इस दिन तीर्थों पर स्नान-दान करते हैं। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पर किए गए स्नान-दान से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

पौष पूर्णिमा की पूजा विधि

  • 3 जनवरी पौष पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें।
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
  • यदि संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।
  • सूर्य मंत्रों का जाप करें।
  • सत्यनारायण कथा पढ़ें या सुनें।
  • 2 जनवरी की शाम को चंद्रमा के दर्शन करें।
  • चंद्रमा को देखकर ध्यान और प्रार्थना करें।
  • रात में चंद्रमा को दूध या खीर का भोग अर्पित करें।
  • मान्यता है कि पूर्णिमा की रात की साधना शीघ्र फल देने वाली होती है।

पौष पूर्णिमा के दिन क्या दान करें?

  • पूर्णिमा के दिन दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ता है।
  • यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, तो विशेष रूप से सफेद वस्तुओं का दान करें।
  • दान में दूध, चावल, चीनी और चांदी शामिल कर सकते हैं।
  • सफेद वस्त्र, सफेद चंदन या खीर का दान भी शुभ माना जाता है।
  • इसके अलावा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
  • ऐसा करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • मान्यता है कि दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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