अध्यात्म

सुबह, दोपहर या शाम क्या है पूजा का सही समय, जानिए क्या कहते हैं शास्त्र?

Puja Ka Sahi Samay (पूजा का सही समय): हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को ईश्वर के प्रति कतृज्ञता व्यक्त करने का एक जरिया माना गया है। माना जाता है कि परमशक्ति एक ही है, जिसके कई अंश हैं। जिनकी हम पूजा करते हैं। हालांकि शास्त्रों में पूजन के विधान और समय के बारे में काफी कुछ बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार हर पूजा का समय भिन्न-भिन्न होता है। आइए जानते हैं कि पूजा के लिए कौन सा समय शुभ माना जाता है।

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क्या है पूजा का सही समय?

Puja Ka Sahi Samay (पूजा का सही समय): हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का अर्थ आत्मा की शुद्धि और ईश्वर से सीधा संवाद से है। शास्त्रों में तीनों समयों सुबह, दोपहर और शाम की महत्ता बताई गई है, लेकिन सुबह को सर्वोत्तम माना गया है। माना जाता है कि परमब्रह्मा परमात्मा एक ही है। उसके अलग-अलग अंश है, जिन्हें हम ब्रह्मा, विष्णु, महेश या देवी रूप में पूजते हैं। परमात्मा की शक्ति से ही ये सभी अंश बने हैं। हालांकि सभी के पूजन का विधान अलग-अलग होता है। वेद, पुराण और स्मृतियों में इसको काफी विस्तार से बताया गया है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि कब और क्यों पूजा करनी चाहिए। आइए शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हैं कि आपके लिए कौन-सा समय सबसे उत्तम है।

सुबह की पूजा

सुबह का समय, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले, यानी प्रायः 4:00 से 5:30 बजे तक), पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मनुस्मृति में कहा गया है कि ब्राह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करने से चतुर्दश महाव्रत की प्राप्ति होती है। ऋग्वेद में वर्णित है कि इस समय देवता जागते हैं और सृष्टि में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है। वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने से मन शांत और एकाग्र रहता है। स्कंद पुराण के अनुसार सुबह की पूजा का पुण्य दोपहर या शाम में नहीं मिलता है। सूर्य की प्रथम किरणें शरीर को पवित्र करती हैं और मन में सकारात्मकता भरती हैं। इस कारण सुबह 4:00 बजे से सूर्योदय तक का समय सामान्य और विशेष पूजा दोनों के लिए आदर्श है।

दोपहर की पूजा

दोपहर का समय, खासकर मध्याह्न (लगभग 12:00 से 1:00 बजे तक), सूर्य देव और सात्विक शक्तियों की पूजा के लिए विशेष है। याज्ञवल्क्य स्मृति में कहा गया है कि मध्याह्न में सूर्य पूजन अनिवार्य है। भविष्य पुराण गायत्री मंत्र जप और सूर्य को अर्घ्य देने का यही समय बताता है। यह काल पितृ तर्पण के लिए भी उत्तम है, विशेषकर कुतुप मुहूर्त (11:48 से 12:36 तक) में यह कार्य किया जाना अच्छा माना जाता है। व्यापारियों और धन-समृद्धि चाहने वालों के लिए लक्ष्मी-कुबेर पूजा दोपहर में शुभ फल देती है। हालांकि यह समय सामान्य पूजा के लिए दूसरा विकल्प है, लेकिन सूर्य, विष्णु और पितरों से जुड़े अनुष्ठानों के लिए यह अद्वितीय है।

शाम की पूजा

शाम का समय, यानी सायंकाल संध्या (सूर्यास्त के आसपास, लगभग 5:30 से 7:00 बजे तक), देवी-देवताओं की आराधना और दीपदान के लिए उत्तम है। विष्णु पुराण के अनुसार शाम को संध्या और दीपदान अवश्य करना चाहिए। मार्कण्डेय पुराण में मां दुर्गा की पूजा शाम में विशेष फलदायी बताई गई है। यह समय लक्ष्मी, गणेश, हनुमान और काली की पूजा के लिए आदर्श है। सूर्यास्त के बाद तमोगुण बढ़ने से पहले दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। दीपावली, नवरात्रि और शुक्रवार व्रत की पूजा भी शाम में ही की जाती है। इस कारण शक्ति उपासना और रक्षा मंत्रों के लिए शाम का समय सबसे शक्तिशाली है।

रात की पूजा

रात में कभी भी सामान्य पूजा नहीं की जाती है। इस दौरान अधिकतर तांत्रिक अनुष्ठान या विशेष पूजन ही किया जाता है।

किस समय किस देवता की करें पूजा?

शास्त्रों की मानें तो सुबह के समय शिव, विष्णु, गणेश, सामान्य पूजा की जाती है। वहीं, दोपहर का समय सूर्य, गायत्री, पितृ के लिए अच्छा है। शाम का समय दुर्गा, लक्ष्मी, हनुमान और मां काली की पूजा के लिए बेस्ट है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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