Pithori Amavasya 2025: पिठोरी अमावस्या का दिनपितरों की पूजा, तर्पण और श्राद्ध के लिए शुभ समय होता है। जो लोग पितृ दोष से परेशान हैं, उनके लिए तो ये समय बेहद खास है। इस दिन तर्पण करने से घर की नकारात्मकता भी दूर हो जाती है। इस दिन स्नान दान का भी विशेष महतव है और इससे खास फल मिलते हैं। यहां से आप पिठोरी अमावस्या की सही डेट, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और पिठोरी अमावस्या के उपाय के बारे में विस्तार में जान सकते हैं।
पिठोरी अमावस्या तिथि (Pithori Amavasya 2025 Date)
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 22 अगस्त दोपहर 11.57 बजे शुरू होगी और 23 अगस्त को 11.37 बजे पूरी होगी। पिठोरी अमावस्या मध्यकाल में लग रही है इसलिए 22 अगस्त को ही पिठोरी अमावस्या मनाई जाएगी।
पिठोरी अमावस्या स्नान-दान शुभ मुहूर्त (Pithori Amavasya Snan Daan Shubh Muhurat)
स्नान दान मुहूर्त- सुबह 04:26 AM- 05:10 AM
अन्य शुभ समय-
- अभिजीत- 11:59 am से 12:43 pm तक
- विजय- 02:23pm से03:25 pm तक
- गोधूलि- 07:27 pm से 07:46pm तक
- ब्रम्हमुहूर्त- 04:15am से 05:06 am तक
- निशीथ काल- 05:42pm से 07:23 pm तक
- संध्या पूजा- 06:20pm से 07:09 pm तक
पिठोरी अमावस्या के उपाय (Pithori Amavasya Ke Upay)
- पिठोरी अमावस्या पर सुबह पवित्र नदी में स्नान करें या नहाने के पानी में गंगाजल मिला लें।
- पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण आदि करें।
- पीपल के पांच पत्तों पर पांच मिठाइयां पितरों के नाम पर रखें और पूजन करें। बस इन मिठाइयों को घर न लाएं।
- पीपल के पौधे की परिक्रमा करें। जड़ में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीया जलाएं।
- पितरों के नाम पर जरूरतमंदों को दान करें।
- पितृ स्तोत्र का पाठ करें।
- खीर का भोजन बनाकर भूखों को खिलाएं।
- कौवा, कुत्ता, चींटी और मछलियों का पेट भरें।
- सुख समृद्धि के लिए घर पर शमी का पौधा लगाएं।
- हनुमान चालीसा और शनि चालीसा का पाठ करें।
- शिवलिंग का काले तिल मिलाकर जलाभिषेक करें।
- नदी में 5 जलते हुए दीये और 5 लाल फूल प्रवाहित कर दें।
- तामसिक भोजन से दूर रहें। नाखून और बाल न काटें।
पिठोरी अमावस्या पूजा विधि (Pithori Amavasya Puja Vidhi)
प्रात:काल पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान कर जल में गंगाजल मिलाएं। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। इस दिन कुशा एकत्रित करने का विशेष महत्व है। एकत्र की गई कुशा को पवित्र स्थान पर रखकर आने वाले दिनों और पितृ पक्ष में प्रयोग करें। महिलाएं आटे से मां दुर्गा के 64 रूप बनाती हैं और इन्हें थाल में सजाकर पूजन करती हैं। प्रत्येक प्रतिमा को सिंदूर, चुनरी, बिंदी और चूड़ियां अर्पित की जाती हैं। लाल फूल और विशेषकर गुड़हल माता को अर्पित करना शुभ माना जाता है। स्नान और पूजन के बाद पितरों के लिए तर्पण करें। जल में तिल और कुशा डालकर उनका स्मरण करें और श्राद्ध करें। ब्राह्मण को भोजन कराना और दान देना इस दिन विशेष फलदायी होता है। इस दिन शिव और कृष्ण दोनों की पूजा का भी विधान है। दीपक जलाकर ओम नम: शिवाय का जाप करें और कृष्ण नाम का स्मरण करें।
