अध्यात्म

पिता महेश्वर शिवलिंग: 40 फीट गहरी सुरंग में विराजमान हैं भगवान शिव के पिता, सिर्फ महाशिवरात्रि पर होते हैं दर्शन

मंदिर में दो शिवलिंग हैं। पहला पिता महेश्वर– भगवान शिव के पिता के रूप में पूजे जाते हैं। दूसरा पर पिता महेश्वर– भगवान शिव के दादा के रूप में पूजे जाते हैं। यह शिवलिंग और गहराई में है और लगभग गुमनाम है।

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काशी का पिता महेश्वर शिवलिंग

Pita Maheshwar Shivlinga: काशी, भगवान शिव की नगरी। जहां हर कण में शिव का वास माना जाता है। यहां असंख्य शिवलिंग हैं, लेकिन एक ऐसा शिवलिंग है जो बिल्कुल अनोखा है- पिता महेश्वर शिवलिंग। यह शिवलिंग धरती से 40 फीट नीचे एक तंग सुरंग में विराजमान है। भक्त सामने से नहीं, बल्कि ऊपर बने छोटे छेद से झांककर दर्शन करते हैं। यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन महाशिवरात्रि पर खुलता है।

मंदिर की अनोखी संरचना और रहस्य

काशी की शीतला गली में स्थित यह मंदिर जमीन से 40 फीट नीचे है। सुरंग इतनी संकरी है कि एक व्यक्ति मुश्किल से अंदर जा सकता है। मंदिर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। भक्त सिर्फ ऊपर से बने छोटे छेद से दर्शन करते हैं। जलाभिषेक, बिल्वपत्र और अन्य अर्पण भी इसी छेद से किए जाते हैं। मंदिर की दीवारों पर प्राचीन निशान और छापें हैं, जो इसकी प्राचीनता का प्रमाण हैं। गहराई की वजह से गर्भगृह हमेशा ठंडा रहता है।

दो शिवलिंग: पिता महेश्वर और पर पिता महेश्वर

मंदिर में दो शिवलिंग हैं। पहला पिता महेश्वर– भगवान शिव के पिता के रूप में पूजे जाते हैं। दूसरा पर पिता महेश्वर– भगवान शिव के दादा के रूप में पूजे जाते हैं। यह शिवलिंग और गहराई में है और लगभग गुमनाम है। स्थानीय मान्यता है कि पर पिता महेश्वर क्रोधी स्वभाव के हैं, इसलिए भक्तों की पूजा नहीं होती। पुजारी ही उनकी पूजा करते हैं।

पौराणिक कथा और महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए, तब बनारस और गंगा अस्तित्व में नहीं थे। देवी-देवता बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आए, लेकिन अपने पिता को वहां न पाकर निराश हुए। भगवान शिव के आह्वान पर पिता महेश्वर प्रकट हुए। हालांकि किसी भी पुराण में भगवान शिव के परिवार का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, क्योंकि शिव को ही सृष्टि का आदि-अनादि माना गया है।

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मंदिर साल में सिर्फ महाशिवरात्रि पर खुलता है। पितृ पक्ष में भी भक्तों की भारी भीड़ लगती है। मान्यता है कि पिता महेश्वर शिवलिंग से पितृ तर्पण करने पर पितृदोष से मुक्ति मिलती है। सुरंग का रास्ता खतरनाक होने के कारण भक्तों को साल में एक बार ही अनुमति मिलती है।

यह मंदिर काशी की आस्था और रहस्य का प्रतीक है। 40 फीट गहरी सुरंग में विराजमान पिता महेश्वर शिवलिंग भक्तों को एक अनोखा दर्शन देते हैं – जहां शिव के पिता भी छिपे हुए हैं, जैसे शिव स्वयं अनंत और रहस्यमय हैं। यह स्थान बताता है कि शिव की महिमा कितनी गहरी और व्यापक है। अगर काशी जाएं तो इस मंदिर के छेद से झांककर दर्शन जरूर करें – यह अनुभव जीवन भर याद रहेगा।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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