Phulera Dooj Katha In Hindi (फुलेरा दूज कथा): फुलेरा दूज का पावन पर्व फाल्गु शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। ये दिन बेहद शुभ होने की वजह से इस दिन रिकॉर्ड तोड़ शादियां होती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो कोई भी शादी के बंधन में बंध जाता है उस पर राधा-कृष्ण की विशेष कृपा रहती है। ये दिन संपत्ति खरीदने के लिए भी शुभ माना जाता है। जानिए फुलैरा दूज का पर्व क्यों मनाया जाता है और इसकी पौराणिक कथा क्या है।
फुलेरा दूज कथा (Phulera Dooj Katha In Hindi)
एक बार भगवान कृष्ण को राधा जी से मिले बहुत दिन हो गए थे। जिसके कारण राधा जी काफी उदास रहने लगी थीं। उनके दुखी होने की वजह से वृंदावन के सारे फूल मुरझा गए। साथ ही पेड़ भी सूखने लगे और डालिया भी टूटने लगीं। राधा जी की उदासी देखकर पक्षियों ने भी चहचहाना बंद कर दिया। नदी की धारा भी स्थिर हो गई और वृंदावन में हर तरफ उदासी छाने लगी। राधा जी बस भगवान कृष्ण के दर्शन की आस लगाए बैठी रहती थी। उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था।
जब भगवान कृष्ण को इस बात का पता चला तो भगवान कृष्ण जी वृंदावन के लिए निकल पड़े। जैसे ही कान्हा के आने की खबर मिली तो राधा जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई उनका चेहरा खिल उठते ही वृंदावन के सारे फूल खिलने लगे, पक्षी भी चहचाने लगे, पेड़-पौधे भी फिर से हरे भरे हो गए। सभी गोपियां भी खुश हो गईं। इसके बाद भगवान कृष्ण ने राधा जी मुलाकात की। जिससे राधा जी बहुत प्रसन्न हुईं। कान्हा ने पास से फूल तोड़ा और राधा जी पर फेंका।
यह देखकर राधा जी भी कान्हा पर फूल बरसाने लगीं। इसके बाद सभी ग्वाल और गोपियां भी एक दूसरे पर फूल फेंकने लगें। कहते हैं जिस दिन ये फूलों की होली खेली गई उस दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। इसलिए ही इस तिथि पर फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाने लगा। हर साल मथुरा वृंदावन में इसी दिन फूलों की होली खेली जाती है।
