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Phulera Dooj Katha In Hindi: फुलैरा दूज का त्योहार क्यों मनाया जाता है, जानने के लिए पढ़ें इसकी पौराणिक कथा

Phulera Dooj Katha In Hindi: फुलेरा दूज का दिन अबूझ मुहूर्त होता है। इसलिए इस दिन बड़ी संख्या में शादियां होती हैं। इस साल ये पावन पर्व 1 मार्च को मनाया जा रहा है। यहां जानिए इस पर्व की पावन कथा।

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Phulera Dooj Katha In Hindi

Phulera Dooj Katha In Hindi (फुलेरा दूज कथा): फुलेरा दूज का पावन पर्व फाल्गु शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। ये दिन बेहद शुभ होने की वजह से इस दिन रिकॉर्ड तोड़ शादियां होती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो कोई भी शादी के बंधन में बंध जाता है उस पर राधा-कृष्ण की विशेष कृपा रहती है। ये दिन संपत्ति खरीदने के लिए भी शुभ माना जाता है। जानिए फुलैरा दूज का पर्व क्यों मनाया जाता है और इसकी पौराणिक कथा क्या है।

फुलेरा दूज कथा (Phulera Dooj Katha In Hindi)

एक बार भगवान कृष्ण को राधा जी से मिले बहुत दिन हो गए थे। जिसके कारण राधा जी काफी उदास रहने लगी थीं। उनके दुखी होने की वजह से वृंदावन के सारे फूल मुरझा गए। साथ ही पेड़ भी सूखने लगे और डालिया भी टूटने लगीं। राधा जी की उदासी देखकर पक्षियों ने भी चहचहाना बंद कर दिया। नदी की धारा भी स्थिर हो गई और वृंदावन में हर तरफ उदासी छाने लगी। राधा जी बस भगवान कृष्ण के दर्शन की आस लगाए बैठी रहती थी। उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था।

जब भगवान कृष्ण को इस बात का पता चला तो भगवान कृष्ण जी वृंदावन के लिए निकल पड़े। जैसे ही कान्हा के आने की खबर मिली तो राधा जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई उनका चेहरा खिल उठते ही वृंदावन के सारे फूल खिलने लगे, पक्षी भी चहचाने लगे, पेड़-पौधे भी फिर से हरे भरे हो गए। सभी गोपियां भी खुश हो गईं। इसके बाद भगवान कृष्ण ने राधा जी मुलाकात की। जिससे राधा जी बहुत प्रसन्न हुईं। कान्हा ने पास से फूल तोड़ा और राधा जी पर फेंका।

यह देखकर राधा जी भी कान्हा पर फूल बरसाने लगीं। इसके बाद सभी ग्वाल और गोपियां भी एक दूसरे पर फूल फेंकने लगें। कहते हैं जिस दिन ये फूलों की होली खेली गई उस दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। इसलिए ही इस तिथि पर फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाने लगा। हर साल मथुरा वृंदावन में इसी दिन फूलों की होली खेली जाती है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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