Parvati Jayanti 2026: पार्वती जयंती का पर्व माता पार्वती की पूजा और उनकी कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं और श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और सुखी दांपत्य जीवन, परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। अगर आपने कभी पार्वती जयंती की पूजा देखी हो, तो एक बात जरूर नोट की होगी कि ज्यादातर लोग लाल, पीले या हरे रंग के कपड़े पहनते हैं। कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इन तीन रंगों को ही इतना शुभ क्यों माना जाता है? दरअसल, सनातन परंपरा में हर रंग का अपना एक अलग अर्थ और संदेश है। आइए जानते हैं कि पार्वती जयंती पर इन तीन रंगों को पहनने की परंपरा क्यों चली आ रही है।
पार्वता जयंती पर लाल रंग क्यों पहनते हैं
पार्वती जयंती पर लाल रंग सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि लाल रंग शक्ति, प्रेम, सौभाग्य और खुशहाल वैवाहिक जीवन का प्रतीक है। माता पार्वती को शक्ति का स्वरूप माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा में लाल चुनरी, लाल फूल और सिंदूर चढ़ाया जाता है। यही वजह है कि इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन में प्रेम और अपनापन बना रहता है।
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पीला रंग क्या संदेश देता है
पीला रंग शुभता, ज्ञान और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ में हल्दी और पीले वस्त्र का इस्तेमाल भी इसी वजह से किया जाता है। पार्वती जयंती पर पीले रंग के कपड़े पहनने का मतलब है कि व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति और अच्छे विचारों का स्वागत कर रहा है। यही कारण है कि कई लोग इस दिन पीले रंग को शुभ मानकर पहनते हैं।
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हरे रंग का माता पार्वती से क्या संबंध है
हरा रंग हरियाली, नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। माता पार्वती का संबंध प्रकृति से भी जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन हरे रंग के कपड़े या हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। खासकर विवाहित महिलाएं इसे परिवार की खुशहाली, पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़कर देखती हैं। हरा रंग जीवन में ताजगी और उम्मीद का भी प्रतीक माना जाता है।
क्या इन तीन रंगों के बिना पूजा नहीं हो सकती
ऐसा बिल्कुल नहीं है। किसी भी धार्मिक ग्रंथ में यह नहीं कहा गया कि पूजा तभी सफल होगी, जब इन तीन रंगों के कपड़े पहने जाएं। ये रंग केवल शुभता और परंपरा का प्रतीक हैं। पूजा में सबसे जरूरी चीज सच्ची श्रद्धा और साफ मन होता है। अगर आपके पास लाल, पीले या हरे रंग के कपड़े नहीं हैं, तो भी पूरी श्रद्धा से की गई पूजा का उतना ही महत्व माना जाता है।
रंग नहीं भावना सबसे ज्यादा मायने रखती है
पार्वती जयंती पर लाल, पीले और हरे रंग पहनने की परंपरा हमें केवल धार्मिक रीति नहीं, बल्कि जीवन का एक सुंदर संदेश भी देती है। लाल रंग प्रेम और शक्ति की याद दिलाता है, पीला रंग शुभ सोच और ज्ञान का प्रतीक है, जबकि हरा रंग खुशहाली और नई उम्मीद का संदेश देता है। इसलिए अगर इस पार्वती जयंती आप भी इन रंगों के कपड़े पहनें, तो केवल परंपरा निभाने के लिए नहीं, बल्कि इनके पीछे छिपे सुंदर अर्थ को समझकर पहनें। आखिर पूजा का सबसे बड़ा आधार रंग नहीं, बल्कि सच्ची आस्था और श्रद्धा होती है।
