अध्यात्म

Panchak 2026: साल 2026 का पहला पंचक स्टार्ट, 25 जनवरी तक क्या न करें? जानिए नियम

Panchak 2026: 21 जनवरी 2026 दिन बुधवार की सुबह 1 बजकर 36 मिनट पर साल 2026 के पहले पचंक की शुरुआत हो चुकी है। यह पंचक 25 जनवरी तक रहेंगे। हालांकि बुधवार को शुरू होने के कारण ये पंचक दोष रहित हैं। इसके बाद भी इस दौरान कुछ कार्यों को करने से बचना होगा। आइए जानते हैं कि वे कौन से काम हैं, जो इन पंचक के 5 दिनों में नहीं करने चाहिए।

पंचक कब से शुरू हो रहे हैं

पंचक कब से शुरू हो रहे हैं

Panchak 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार आज बुधवार, 21 जनवरी 2026 से पंचक की शुरुआत हो गई है। पंचक को ज्योतिष शास्त्र में एक विशेष समय माना गया है, जिसमें कुछ कार्यों को करना वर्जित बताया गया है। मान्यता है कि पंचक के दौरान किए गए शुभ और मांगलिक कार्यों में बाधा, देरी या नुकसान की स्थिति बन सकती है। यही वजह है कि पंचक लगते ही लोग कई कामों को टालना बेहतर समझते हैं।

कब से कब तक रहेगा पंचक?

पंचांग के अनुसार पंचक की शुरुआत 21 जनवरी 2026 की रात 1 बजकर 36 मिनट से हो चुकी है, जबकि इसका समापन 25 जनवरी 2026 को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर होगा। इस दौरान चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र से लेकर रेवती नक्षत्र तक गोचर करेगा। धनिष्ठा पंचक का पहला नक्षत्र माना जाता है।

पंचक क्या होता है?

ज्योतिष के अनुसार पंचक पांच विशेष नक्षत्रों के समूह को कहा जाता है। ये नक्षत्र धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती हैं। जब चंद्रमा इन नक्षत्रों में प्रवेश करता है, तब पंचक काल शुरू हो जाता है। यही समय पंचक कहलाता है।

पंचक को अशुभ क्यों माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान किए गए कार्यों में स्थिरता नहीं रहती है। ऐसे समय में किए गए शुभ कार्यों में रुकावट, नुकसान या अनचाही परेशानी आने की आशंका बनी रहती है। हालांकि पंचक की प्रकृति इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह किस दिन से शुरू हो रहा है।

ये पंचक होते हैं दोषरहित

जनवरी 2026 में लग रहा पंचक बुधवार से शुरू हुआ है, इसलिए इसे ज्योतिष में दोषरहित पंचक कहा गया है। मान्यता है कि ऐसे पंचक में भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा का प्रभाव रहता है, जिससे पंचक दोष का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी नियम खत्म हो जाते हैं।

पंचक में कौन-से काम नहीं करने चाहिए?

पंचक के दौरान घर से जुड़ा कोई भी बड़ा निर्माण कार्य नहीं कराना चाहिए। खासकर लकड़ी से संबंधित काम, जैसे पलंग या फर्नीचर बनवाना, अशुभ माना जाता है। इस समय घर की नींव डालना, छत ढलवाना या नया निर्माण शुरू करने से बचना चाहिए। पंचक काल में लकड़ी या लोहे का सामान खरीदना भी उचित नहीं माना जाता है। इसके अलावा बाल और नाखून कटवाने से भी बचना चाहिए। मान्यता है कि पंचक में विवाहित महिलाओं को ससुराल या मायके जाने से भी परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे वैवाहिक जीवन में तनाव आ सकता है। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

दोषरहित पंचक में भी किन बातों से बचें?

भले ही यह पंचक दोषरहित माना गया हो, फिर भी कुछ कार्य वर्जित रहते हैं। दक्षिण दिशा की यात्रा, भारी निर्माण कार्य, छत ढलवाना और लकड़ी का फर्नीचर बनवाना अब भी शुभ नहीं माना जाता है। यदि कोई कार्य अत्यंत जरूरी हो, तो योग्य पंडित या ज्योतिषाचार्य की सलाह लेना बेहतर रहता है।

पंचक में क्या किया जा सकता है?

पंचक काल धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इस दौरान जप, पाठ, ध्यान, दान-पुण्य और पुराने अधूरे कार्यों को पूरा किया जा सकता है। आत्मिक शुद्धि और मानसिक संतुलन के लिए यह समय अच्छा माना गया है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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