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Nirjala Ekadashi Vrat Vidhi: क्या निर्जला एकादशी में पानी पी सकते हैं? जानिए क्या है साल की सबसे बड़ी एकादशी की व्रत विधि

Nirjala Ekadashi Vrat Vidhi: निर्जला एकादशी व्रत बेहद पुण्यदायी माना जाता है। बाकी एकादशी व्रतों से ये काफी कठिन होता है क्योंकि इसमें जल ग्रहण नहीं किया जाता। कहते हैं इस व्रत को करने से आत्मा की शुद्धि, पापों का नाश और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। चलिए आपको बताते हैं इस व्रत की विधि क्या है।

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Nirjala Ekadashi Vrat Vidhi: क्या निर्जला एकादशी में पानी पी सकते हैं? जानिए क्या है साल की सबसे बड़ी एकादशी की व्रत विधि

Nirjala Ekadashi Vrat Vidhi: निर्जला एकादशी व्रत हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि को रखा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि इस व्रत में पानी नहीं पिया जाता है। पारंपरिक मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति इस एकादशी का व्रत निर्जल रूप में यानी बिना जल ग्रहण किये रखे, तो उसे सभी एकादशी व्रतों का फल एक साथ प्राप्त हो जाता है। इस साल ये व्रत 6 जून को रखा जा रहा है। चलिए आपको बताते हैं इस व्रत को रखने की विधि क्या है।

निर्जला एकादशी व्रत विधि (Nirjala Ekadashi Vrat Vidhi)

  • निर्जला एकादशी व्रत रखने वाले सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान करें और इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को ध्यान करते हुए कहें कि “मैं आज निर्जला एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लेता/लेती हूं।”
  • इस दिन की पूजा के लिए तुलसी के पत्ते, फल, कच्चे नारियल, मिश्री, पान के पत्ते, घी में बने दीपक, धूप-अगरबत्ती सारी सामग्री तैयार कर लें।
  • एकादशी के पूरे दिन (सुबह से रात तक) जल ग्रहण न करें।
  • पूरे दिन विष्णु–भजन, कीर्तन, श्रीमद् भागवत कथा या विष्णु सहस्त्रनाम का निरंतर श्रवण-चिंतन करें।
  • रात भर जागरण करें और सुबह शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
  • निर्जला एकादशी में वैसे तो जल और अन्न ग्रहण नहीं किया जाता लेकिन जो लोग बीमार हैं या बुजुर्ग हैं वो स्वास्थ्य कारणों को ध्यान में रखते हुए जल ग्रहण कर सकते हैं।

निर्जला एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं? (Nirjala Ekadashi Vrat Mein Pani Pi Sakte Hai)

इस व्रत में अन्न और जल बिल्कुल भी ग्रहण नहीं किया जाता। व्रती को एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक व्रत रखना होता है।

निर्जला एकादशी व्रत का महत्व (Nirjala Ekadashi Vrat Ka Mahatva)

शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि यदि कोई भक्त निर्जला एकादशी का व्रत रखता है, तो उसे सभी एकादशी व्रतों का फल एक साथ प्राप्त हो सकता है। यह व्रत अति-कठोर व्रत माना गया है।

Laveena Sharma
लवीना शर्मा author

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करि... और देखें

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