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Nirjala Ekadashi 2023 Date: मोहिनी एकादशी के बाद कब पड़ेगी अपरा और निर्जला एकादशी, जानें सही डेट

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated May 1, 2023, 10:23 AM IST

Nirjala Ekadashi 2023 Date: निर्जला एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस एकादशी व्रत को करने से साल में आने वाली सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है।

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May 2023 Ekadashi Dates: निर्जला एकादशी और अपरा एकादशी 2023 डेट

Nirjala Ekadashi 2023 Date: मई महीने में कुल 3 एकादशी पड़ेंगी। जिनमें से एक एकादशी 1 मई में यानि आज पड़ी है। ये मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2023) है। इसके बाद 5 मई को साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2023) लगेगा और इस उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Penumbral Lunar Eclipse 2023) के बाद दो और एकादशी पड़ेंगी। जिनमें से अपरा एकादशी (Apra Ekadashi 2023) 15 मई दिन सोमवार को पड़ेगी वहीं निर्जला एकादशी व्रत 31 मई दिन बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन गायत्री जयन्ती भी रहेगी। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत का काफी ज्यादा महत्व माना जाता है। ये व्रत हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। जानिए निर्जला एकादशी व्रत की पावन व्रत कथा।

May Ekadashi 2023 Date (मई एकादशी 2023 डेट)

मोहिनी एकादशी1 मई 2023, सोमवार
अपरा एकादशी15 मई 2023, सोमवार
निर्जला एकादशी31 मई 2023, बुधवार

Nirjala Ekadashi Vrat Katha (निर्जला एकादशी व्रत कथा)

एक बार पाण्डु पुत्र भीम ने महर्षि वेद व्यास जी से पूछा- हे परम आदरणीय मुनिवर! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी व्रत करते हैं और वे मुझे भी ये व्रत करने के लिए कहते हैं। लेकिन मैं भूखा नहीं रह सकता हूं अत: आप मुझे बिना उपवास किए एकादशी का फल कैसे प्राप्त करें इस बारे में बताएं।

भीम के अनुरोध पर वेद व्यास जी ने कहा- पुत्र तुम सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत करो। इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना होता है। जो भी मनुष्य इस एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना खाये पिये रहता है और पूरी श्रद्धा से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में आने वाली सभी एकादशी का फल इस एक एकादशी के व्रत से प्राप्त हो जाता है। महर्षि वेद व्यास के कहने अनुसार भीमसेन निर्जला एकादशी व्रत का पालन करने लगे।

Ekadashi Daan Significance (निर्जला एकादशी पर दान का महत्व)

एकादशी का व्रत रख अन्न, जल, वस्त्र, आसन, जूता, छतरी, पंखी और फल आदि का दान करना चाहिए। कहते हैं निर्जला एकादशी पर कलश का दान करने से वर्ष भर की एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। साथ ही इस एक एकादशी व्रत को करने से अन्य एकादशियों पर अन्न खाने के दोष से भी मुक्ति मिल जाती है। इस व्रत से दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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