अध्यात्म

भयंकर परेशानी और पीड़ा से मुक्ति दिलाएगी बसंत पंचमी, पूरे दिन में कभी भी कर लें ये शक्तिशाली स्तोत्र

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  • Updated Jan 23, 2026, 03:00 PM IST

Benefits of Neel Saraswati Stotra: अगर आप परेशान हैं या आप भारी नुकसान से जूझ रहे हैं तो आज 23 जनवरी बसंत पंचमी का दिन आपको इस परेशानी से निकाल सकता है। माना जाता है कि अगर इस दिन व्यक्ति नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ करता है तो बड़ी से बड़ी आपत्ति भी दूर हो जाती है। आइए जानते हैं कि यह स्तोत्र क्या है और इसका पाठ कैसे करें ?

नील सरस्वती स्तोत्र

नील सरस्वती स्तोत्र

Benefits of Neel Saraswati Stotra: किसी भी प्रकार की दिक्कत को अगर आप अपनी लाइफ में फेस कर रहे हैं। चाहे वह शारीरिक हो, पारिवारिक हो या मानसिक हो। कैसी भी दिक्कत हो, उसका अंत आप बसंत पंचमी के दिन कर सकते हैं। इसके लिए आपको बस एक स्तोत्र का पाठ करने की आवश्यकता है। यह स्तोत्र इतना ज्यादा शक्तिशाली है कि इसके सामने किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं ठहर सकती है। इस नील सरस्वती स्तोत्र है, जो माता सरस्वती का उग्र रूप है। आइए जानते हैं कि नील सरस्वती स्तोत्र क्या है और इसका पाठ करने के क्या लाभ है।

क्या है नील सरस्वती स्तोत्र?

नील सरस्वती स्तोत्र मां सरस्वती के उग्र और तांत्रिक स्वरूप को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। नील सरस्वती को मां तारा के नाम से जाना जाता है। मां तारा 10 महाविद्याओं में से एक हैं। तंत्र साधना में इनका विशेष स्थान माना गया है। सामान्य रूप से मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत और वाणी की देवी माना जाता है, जबकि नील सरस्वती उनका वह स्वरूप हैं जो अज्ञान, शत्रु बाधा, भय और मानसिक जड़ता का नाश करता है।

इस स्तोत्र को महामंत्र स्वरूप माना गया है, जिसका नियमित पाठ साधक को विद्या, बुद्धि और आत्मबल प्रदान करता है। धार्मिक मान्यता है कि नील सरस्वती स्तोत्र का सकारात्मक प्रभाव केवल बाहरी शत्रुओं पर ही नहीं, बल्कि भीतर की नकारात्मक सोच और भ्रम पर भी पड़ता है।

बसंत पंचमी पर नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

आज बसंत पंचमी का पावन पर्व है और यह दिन मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आज के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर मां सरस्वती या नील सरस्वती का चित्र स्थापित करें और दीपक जलाएं। इसके बाद मन को शांत करके पहले मां सरस्वती का स्मरण करें और फिर नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ आरंभ करें। दरअसल बसंत पंचमी को माघ माह की गुप्त नवरात्रि का पांचवां दिन होता है। इस कारण यह पूजा बेहद ही प्रभावशाली होती है।

यह पाठ आप शाम के समय सूर्यास्त के बाद संध्या काल में कर सकते हैं। आज बसंत पंचमी के दिन शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक का समय नील सरस्वती स्तोत्र के पाठ के लिए अच्छा माना जाता है। इस समय दीपक जलाकर शांत वातावरण में बैठकर श्रद्धा के साथ स्तोत्र का पाठ करें। पाठ के समय मन को एकाग्र रखें और जल्दबाजी न करें। यदि पूरा स्तोत्र ज्यादा बार पढ़ना कठिन लगे, तो कम से कम एक बार ध्यानपूर्वक पाठ अवश्य करें।

नील सरस्वती स्तोत्र के लाभ

नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति की बुद्धि तीव्र होती है और स्मरण शक्ति मजबूत होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से स्टूडेंट्स, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों, लेखन और ज्ञान से जुड़े लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही यह स्तोत्र शत्रु बाधा, भय और मानसिक दबाव से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसका नियमित पाठ करने से विद्या, धन और मोक्ष तीनों की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। जो लोग जीवन में बार-बार असफलता, भ्रम या निर्णय की कमजोरी महसूस करते हैं, उनके लिए नील सरस्वती स्तोत्र का पाठ अत्यंत उपयोगी बताया गया है।

कैसा है नील सरस्वती माता का स्वरूप

नील सरस्वती माता (तारा मां) का स्वरूप सामान्य सरस्वती माता से भिन्न और रहस्यमय माना जाता है। माता का वर्ण नीला या श्याम होता है, जो गहराई और शक्ति का प्रतीक है। उनके केश जटाजूट में बंधे होते हैं और स्वरूप में उग्रता के साथ करुणा भी दिखाई देती है। यह स्वरूप यह दर्शाता है कि माता अज्ञान और मूर्खता का नाश करने वाली हैं। नील सरस्वती का यह रूप साधक को भयभीत नहीं करता, बल्कि उसे भीतर से मजबूत बनाता है और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।

श्री नील सरस्वती स्तोत्र (हिन्दी अर्थ सहित)

ॐ श्रीं ह्रीं हसौ: हूँ फट नीलसरस्वत्ये स्वाहा ॥

ॐ ह्री ऐं हुं नील सरस्वती फट् स्वाहा ॥

ॐ ब्लूं वें वद वद त्रीं हूं फट् ॥

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौ: क्लीं ह्रीं ऐं ब्लूं स्त्रीं

महानीला सरस्वती द्रां द्रीं क्लीं ब्लूं स:।

ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौ: सौ: ह्रीं स्वाहा ॥

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयङ्करि।

भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥1॥

अर्थ – भयानक रूप धारण करने वाली, शत्रुओं को भयभीत करने वाली और भक्तों को वर देने वाली हे देवी, मेरी रक्षा करें।

ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।

जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥2॥

अर्थ – देव, दानव, सिद्ध और गंधर्वों द्वारा पूजित हे देवी, आप मेरी रक्षा करें।

जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।

द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥3॥

अर्थ – जटाजूट से सुशोभित और बुद्धि को तीव्र करने वाली देवी, मेरी रक्षा करें।

सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते।

सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम्॥4॥

अर्थ – सौम्य और उग्र दोनों रूप धारण करने वाली देवी, मुझे शरण दें।

जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।

मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥5॥

अर्थ – मूर्खता का नाश करने वाली देवी, मेरी रक्षा करें।

वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः।

उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्॥6॥

अर्थ – उग्र आपदाओं से तारने वाली देवी, मेरी रक्षा करें।

बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।

मूढ़त्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम्॥7॥

अर्थ – हे देवी, मुझे बुद्धि, यश और विद्या प्रदान करें।

इन्द्रादिविलसद्द्वन्द्ववन्दिते करुणामयि।

तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणागतम्॥8॥

अर्थ – करुणामयी देवी, मेरी रक्षा करें।

अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां यः पठेन्नरः।

षण्मासैः सिद्धिमाप्नोति नात्र कार्या विचारणा॥9॥

अर्थ – निश्चित समय पर पाठ करने से सिद्धि प्राप्त होती है।

मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।

विद्यार्थी लभते विद्यां तर्कव्याकरणादिकम्॥10॥

अर्थ – मोक्ष, धन और विद्या की प्राप्ति होती है।

इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयान्वितः।

तस्य शत्रुः क्षयं याति महाप्रज्ञा प्रजायते॥11॥

अर्थ – शत्रुओं का नाश होता है और महान बुद्धि प्राप्त होती है।

पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये।

य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशयः॥12॥

अर्थ – हर स्थिति में यह स्तोत्र कल्याणकारी है।

इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनिमुद्रां प्रदर्शयेत्॥13॥

॥ नील सरस्वती स्तोत्र सम्पूर्ण ॥

ग्रह दोष होता है दूर

यह स्तोत्र इतना ज्यादा पावरफुल है कि इसके पाठ से सभी प्रकार के ग्रह दोषों, पितदोष या अन्य दोषों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। किसी प्रकार की नकारात्मक शक्ति, टोने या टोटके व काला जादू का असर इस स्तोत्र के आगे नहीं टिकता है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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