अध्यात्म

Navratri 2025: माता रानी का अनोखा और रहस्यमयी मंदिर, पिंडी से रिसते जल से दूर होते हैं आंखों के रोग

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह विश्व की एकमात्र ऐसी मूर्ति है, जो चतुष्टय कोण में स्थित है। इस पिंडी से वर्षभर जल रिसता है, जिसकी उत्पत्ति आज भी रहस्य बनी हुई है। माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति छह महीने तक इस जल को अपनी आंखों में लगाता है तो आंखों से जुड़ी कई समस्याएं और दृष्टि दोष दूर हो सकते हैं।

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Navratri 2025: माता रानी का अनोखा और रहस्यमयी मंदिर, पिंडी से रिसते जल से दूर होते हैं आंखों के रोग

नवरात्रि का पर्व पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि नवरात्रि के 9 दिनों में देवी मां की विधिपूर्वक पूजन करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि शारीरिक रोग भी दूर होते हैं। जी हां, देवी मां का एक ऐसा मंदिर भी है जो आंखों के रोद दूर करता है, ऐसा लोगों का दावा है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित घाटमपुर कस्बे में देवी मां का मंदिर है। यहां देवी माता कूष्मांडा के रूप में विराजमान हैं। मां कूष्मांडा देवी चतुष्टय आकार में विराजमान हैं, जिनके दो मुख हैं और उनकी पिंडी जमीन पर लेटी हुई प्रतीत होती है। यह मंदिर अपनी अद्वितीय पिंडी के लिए प्रसिद्ध है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह विश्व की एकमात्र ऐसी मूर्ति है, जो चतुष्टय कोण में स्थित है। इस पिंडी से वर्षभर जल रिसता है, जिसकी उत्पत्ति आज भी रहस्य बनी हुई है। माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति छह महीने तक इस जल को अपनी आंखों में लगाता है तो आंखों से जुड़ी कई समस्याएं और दृष्टि दोष दूर हो सकते हैं।

घाटमपुर की यह अद्वितीय पिंडी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां आने वाले भक्तों के लिए आस्था और आश्चर्य का केंद्र भी बनी हुई है। श्रद्धालु यहां स्वास्थ्य, समृद्धि एवं सुरक्षा की कामना करते हैं।

यहां की पूजा परंपरा भी बेहद अनोखी है। अन्य मंदिरों में साधु-संत या पंडित पूजा करते हैं, लेकिन घाटमपुर में इस मंदिर में पूजा मलिन (फूल बांटने और श्रृंगार करने वाली महिलाएं) करती हैं। वही मां कूष्मांडा देवी का श्रृंगार करती हैं, उन्हें कपड़े पहनाती हैं और भोग अर्पित करती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और स्थानीय समाज में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

मां कूष्मांडा के स्वरूप की आराधना अन्य मां दुर्गा मंदिरों में भी की जाती है। उनके भक्त उन्हें सृष्टि की शक्ति, जीवन की ऊर्जा और रोगों से रक्षा करने वाली देवी मानते हैं। नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से चौथे दिन इस स्वरूप की पूजा करने से आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

(इनपुट-आईएएनएस)

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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