Delhi News: केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली रेस क्लब के 53 एकड़ परिसर का कब्जा लेने के कुछ ही देर बाद वहां ध्वस्तीकरण का काम शुरू हो गया। इसके साथ ही, इस सौ साल पुराने संस्थान में घुड़दौड़ यानी होर्स रेसिंग की गतिविधियां नाटकीय ढंग से समाप्त हो गईं। मंगलवार को पटियाला हाउस अदालत ने क्लब की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें संपदा अधिकारी द्वारा सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) अधिनियम के तहत 11 अगस्त को जारी बेदखली के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद, केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग स्थित परिसर का कब्जा ले लिया।
कई ऐतिहासिक इमारतों पर चला बुलडोजर
क्लब के एक अधिकारी ने बताया कि बुलडोजर ने क्लब की कई ऐतिहासिक इमारतों को गिरा दिया, जिनमें अस्तबल, बुकमेकर्स रिंग, विनिंग पोस्ट, फोटो-फिनिश कैमरा, सैडलिंग एनक्लोजर और दूसरी सुविधाएं शामिल थीं, जो कभी दिल्ली में घुड़दौड़ का मुख्य केंद्र हुआ करती थीं। क्लब से जुड़े एक सूत्र ने कहा, "क्लब और रेसिंग से जुड़े किसी भी व्यक्ति के लिए यह बहुत परेशान करने वाला दृश्य था।" क्लब के अधिकारी ने कहा, "हमारे पास 250 से अधिक घोड़े थे। इनमें से लगभग 200 घोड़ों को उनके मालिकों ने वापस ले लिया है, जबकि करीब 50 घोड़े अभी भी क्लब में हैं।" उन्होंने कहा, "हमें सब कुछ ठीक करने के लिए 14 सितंबर तक का समय दिया गया है। हम अगले एक-दो हफ्तों में बाकी घोड़ों को उनके मालिकों के पास भेजने की योजना बना रहे हैं।"
इस तरह से बनाया गया था क्लब
गौरतलब है कि 1940 के दशक में नए सिरे से बनाए गए क्लब के अस्तबलों को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि घोड़े दिल्ली की भीषण गर्मी से बचे रहें। अधिकारी ने कहा, "इस जगह को बहुत सावधानी से बनाया गया था ताकि घोड़ों को गर्मी से बचाया जा सके और अस्तबल में हवा-पानी का अच्छा इंतजाम रहे।" अपनी नस्ल और रेसिंग रिकॉर्ड के आधार पर 3 लाख से 50 लाख रुपये तक की कीमत वाले ये थोरब्रेड घोड़े देश के सबसे बेहतरीन और महंगे रेस के घोड़ों में से हैं।
कब शुरू हुआ था कानूनी विवाद?
सूत्रों ने बताया कि हर कुछ दिनों में, रेसकोर्स से घोड़ों को ले जाने वाली गाड़ी (हॉर्स फ्लोट) निकलती है और देश भर के रेसिंग सेंटर पर बने नए परिसरों में कीमती रेस-घोड़ों को पहुंचाती है। कानूनी विवाद मार्च में शुरू हुआ, जब भूमि एवं विकास कार्यालय ने क्लब को एक नोटिस जारी करके 15 दिनों के अंदर सरकारी जमीन खाली करने का निर्देश दिया। नोटिस में कहा गया था कि इस जमीन की जरूरत सार्वजनिक कार्यों के लिए है। क्लब ने दिल्ली हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 26 मई को उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसने क्लब के खिलाफ कारण बताओ कार्यवाही पर रोक लगा रखी थी, ताकि बेदखली की प्रक्रिया जारी रह सके।
