Sixth Navratri Aarti, Mantra (Maa Katyayani Mantra And Aarti): नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायानी की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि मां कात्यायानी की पूजा करने से साधक को आसानी से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। मां कात्यायानी का स्वरूप बहुत ही तेजमयी है। माता कात्यायानी को ब्रह्म जी की मानस पुत्री के रूप में भी पूजा जाता है। देवी कात्यायानी की पूजा करने से साधक को परम पद की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा करने से शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। ऐसे में आइए यहां पढ़ें मां कात्यायानी की आरती और मंत्र।
मां कात्यायानी मंत्र (Maa Katayayani Matnra)
1.या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
2.चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|
कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि||
Maa Katyayani Aarti (मां कात्यायानी आरती और मंत्र)
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।जय जग माता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
