How Solar New Year Is Celebrated In India : हिंदू धर्म में मेष संक्रांति का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसी दिन से सौर नववर्ष यानी सोलर न्यू ईयर की शुरुआत मानी जाती है। जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तो यह समय नए साल, नई ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत देता है। आमतौर पर यह संक्रांति हर साल 14 या 15 अप्रैल को पड़ती है और पूरे भारत में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है।
मेष संक्रांति क्या है (Mesh Sankranti Kya Hai)
मेष संक्रांति वह समय होता है, जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। ज्योतिष में मेष राशि को राशिचक्र की पहली राशि माना जाता है, इसलिए इसे सौर वर्ष की शुरुआत माना जाता है। इस दिन से सूर्य की ऊर्जा नई दिशा में काम करना शुरू करती है, जिससे जीवन में नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव के संकेत मिलते हैं। यह दिन धार्मिक रूप से भी बेहद शुभ माना जाता है।
क्यों कहा जाता है सोलर न्यू ईयर (Solar New Year Ka Mahatva)
भारत में दो तरह के कैलेंडर चलते हैं—चंद्र और सौर। चंद्र कैलेंडर के अनुसार नववर्ष अलग समय पर आता है, जबकि सौर कैलेंडर के अनुसार मेष संक्रांति से नया साल शुरू होता है। यही कारण है कि इस दिन को सोलर न्यू ईयर कहा जाता है। यह समय प्रकृति में भी बदलाव लेकर आता है, जैसे नई फसल, नई ऊर्जा और मौसम में परिवर्तन आदि इस दौरान होता है।
देशभर में कैसे मनाया जाता है (India Mein Kaise Manaya Jata Hai)
मेष संक्रांति पूरे भारत में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है, जो इसकी खासियत को और बढ़ा देती है।
- ओडिशा में इसे पना संक्रांति या महा विशुब संक्रांति कहा जाता है। इस दिन खास तरह का पेय ‘पना’ बनाकर भगवान को अर्पित किया जाता है और मंदिरों में पूजा की जाती है।
- पश्चिम बंगाल में यह दिन पोइला बोइशाख या नबवर्ष के रूप में मनाया जाता है। लोग नए साल की शुरुआत करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और व्यापारियों के लिए यह दिन खास होता है।
- असम में इसे बोहाग बिहू या रंगाली बिहू के रूप में मनाया जाता है, जो खेती और नई फसल से जुड़ा बड़ा त्योहार है। इस दौरान नृत्य, संगीत और उत्सव का माहौल रहता है।
- केरल में इस दिन को विशु कहा जाता है। यहां ‘विशुक्कणी’ देखने की परंपरा होती है, जिसमें सुबह उठते ही शुभ वस्तुओं को देखा जाता है।
- तमिलनाडु में यह दिन पुथंडु यानी तमिल नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। लोग घर सजाते हैं और भगवान की पूजा करके नए साल का स्वागत करते हैं।
- पंजाब में इसे बैसाखी के रूप में मनाया जाता है, जो एक प्रमुख फसल उत्सव भी है। इस दिन लोग खुशी और उत्साह के साथ नाच-गाना करते हैं और गुरुद्वारों में मत्था टेकते हैं।
- उत्तराखंड में इसे बिखौती के रूप में मनाया जाता है, जबकि बिहार में यह दिन सतुआन के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सत्तू और गुड़ खाने की परंपरा होती है।
इस दिन क्या करें (Mesh Sankranti Par Kya Karein)
मेष संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा सूर्य देव की पूजा, अर्घ्य देना और दान-पुण्य करना भी विशेष फलदायी होता है। इस दिन तांबे के पात्र से सूर्य को जल चढ़ाना और गायत्री मंत्र का जाप करना जीवन में सकारात्मकता लाता है।
क्या है इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व (Spiritual aur Jyotish Mahatva)
ज्योतिष के अनुसार सूर्य का मेष राशि में प्रवेश उच्च का माना जाता है, यानी इस समय सूर्य अपनी सबसे मजबूत स्थिति में होता है। इसका असर व्यक्ति के आत्मबल, ऊर्जा और निर्णय क्षमता पर सकारात्मक रूप से पड़ता है। यह समय नई योजनाएं शुरू करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल माना जाता है।
जानिए मई में पूर्णिमा कब है 2026। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|
