Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। 16 जुलाई 2026 को ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाला यह महापर्व न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर साल लाखों भक्त इस पल के साक्षी बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं, जबकि करोड़ों लोग घर बैठे इस ऐतिहासिक आयोजन को देखते हैं।
अगर आपके मन में सबसे बड़ा सवाल है कि आज जगन्नाथ रथयात्रा कितने बजे शुरू होगी? तो इसका सीधा जवाब - दोपहर 4:00 बजे है। जी हां पुरी में तीनों रथों को खींचने की मुख्य प्रक्रिया (Jagannath Rath Pulling Time) आज शाम 4 बजे शुरू की जाएगी। हालांकि रथयात्रा का धार्मिक क्रम सुबह से ही शुरू हो जाता है। इसमें अलग-अलग तरह से रस्मों को निभाया जाता है। जिनका अपना विशेष महत्व है।
सुबह से शुरू होंगे अनुष्ठान
श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार रथयात्रा केवल रथ खींचने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह कई प्राचीन वैदिक और शाही रस्मों का संगम है।
| समय | अनुष्ठान | क्या होता है? |
|---|---|---|
| सुबह 6:00 बजे | मंगला आरती | भगवान की विशेष आरती के साथ दिन की शुरुआत |
| सुबह 9:30 बजे | पहंडी | भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को गर्भगृह से रथों तक लाया जाता है |
| दोपहर 2:00–3:00 बजे | छेरा पहरा | गजपति महाराज सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं |
| दोपहर 4:00 बजे | रथ खींचना | श्रद्धालु रस्सियों से तीनों रथों को गुंडिचा मंदिर की ओर खींचना शुरू करते हैं |
नोट: यह समय-सारिणी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुरूप है। जिसमें स्थानीय परिस्थितियों और धार्मिक प्रक्रिया के अनुसार समय में हल्का बदलाव संभव है।
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रथयात्रा के तीनों रथों के बारे में जानें
रथयात्रा की सबसे खास बात यह है कि भगवान, उनके भाई और बहन तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान होते हैं। हर रथ की अपनी पहचान, रंग और धार्मिक महत्ता है।
- भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदीघोष है, जो लाल और पीले रंग के आवरण से सुसज्जित होता है।
- भगवान बलभद्र के रथ का नाम तालध्वज है, जो लाल और हरे रंग की छटा लिए हुए है।
- देवी सुभद्रा के रथ का नाम दर्पदलन (देवदलन) है, जो लाल और काले रंग के आवरण से अलंकृत होगा।
हर साल इन रथों का निर्माण नई लकड़ी से पारंपरिक शिल्पकारों द्वारा किया जाता है। यही परंपरा रथयात्रा को दुनिया के सबसे अनूठे धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है। इन रथों का निर्माण देखने भी लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं।
रथयात्रा की सबसे अनोखी रस्म क्या है
रथयात्रा की सबसे प्रतीकात्मक परंपरा छेरा पहरा है। इस दौरान पुरी के गजपति महाराज सोने की झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह रस्म इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने राजा और सामान्य भक्त सभी समान हैं। भारतीय धार्मिक परंपराओं में समानता और सेवा का ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है।
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पुरी जाए बिना रथयात्रा में कैसे शामिल हो सकते हैं
जो श्रद्धालु आज पुरी नहीं पहुंच सके हैं, वे इस भव्य उत्सव का सीधा प्रसारण दूरदर्शन (DD National और DD Odia) पर सुबह से लाइव देख सकते हैं। इसके अलावा, ओडिशा टूरिज्म (Odisha Tourism) के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी इसका सीधा प्रसारण उपलब्ध रहेगा। आप इन सभी जगहों पर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की सीधा प्रसारण देख सकते हैं।
रथयात्रा के दिन पुरी में मौसम कैसा है?
रथयात्रा के दिन (16 जुलाई 2026) पुरी में मौसम बदलता रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, आज बादल छाए रहने के साथ बीच-बीच में बारिश की संभावना है, इसलिए श्रद्धालुओं को हल्का रेनकोट या छाता साथ रखने की सलाह दी जाती है।
इसके साथ ही पुरी शहर में सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम सरकार ने किए हैं। सभी जगह सुरक्षाबलों की तैनाती है और ट्रैफिक डायवर्जन किया गया है। श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सतर्क रहें।
क्यों खास माना जाता है रथयात्रा का दिन
रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। इसलिए इसे भगवान के दर्शन का सबसे सुलभ अवसर भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि रथ के दर्शन और उसकी रस्सी को स्पर्श करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
यही कारण है कि हर साल यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, शिल्प परंपरा और सामूहिक आस्था का सबसे भव्य उत्सव बन जाता है। अगर आप आज इस दिव्य आयोजन को देखने की योजना बना रहे हैं, तो याद रखें कि पुरी में मुख्य रथयात्रा दोपहर 4:00 बजे रथ खींचने के साथ शुरू होगी, जबकि इसकी आध्यात्मिक यात्रा सुबह 6:00 बजे मंगला आरती से ही आरंभ हो जाएगी।
