Mathura Holi List 2024 (मथुरा होली कैलेंडर 2024): मथुरा, वृंदावन और बरसाना की होली विश्व भर में प्रसिद्ध है। तभी तो हर साल लाखों की संख्या में लोग भगवान कृष्ण की नगरी में होली मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं। मान्यताओं अनुसार होली खेलने की शुरुआत सबसे पहले भगवान कृष्ण ने राधा रानी को रंग लगाकर की थी। कहते हैं तभी से इस दिन रंग लगाने की परंपरा शुरू हो गई थी। भारत में ये पर्व बेहद ही धूमधाम से मनाया जाता है। बच्चों का भी ये प्रिय त्योहार होता है। यहां जानिए मथुरा, वृंदावन और बरसाना में होली कब-कब खेली जाएगी।
होली कैलेंडर 2024 (Holi Calendar 2024)
लड्डू होली 2024 (17 मार्च 2024, रविवार)
कहते हैं नंदगांव से होली खेलने के लिए बरसाना आने का आमंत्रण स्वीकार करने की परंपरा लड्डू होली से जुड़ी हुई है, जिसका आज भी पालन किया जाता है। इस दौरान सैकड़ों किलो लड्डू बरसाए जाते हैं। इस बार ये होली 17 मार्च को खेली जाएगी।
बरसाना लठमार होली 2024 (18 मार्च, सोमवार)
लड्डू होली के एक दिन बाद बरसाना में लठमार होली खेली जाती है। नंद भवन के हुरयारे बरसाना में लठमार होली खेलने आते हैं, जहां गोपियां उन पर जमकर रंग डालती हैं और लठ से उनका स्वागत करती हैं। इस बार बरसाना की लठमार होली 18 मार्च को खेली जाएगी।
नंदगांव की लठमार होली 2024 (19 मार्च, मंगलवार)
बरसाना लठमार होली के बाद नंदगांव में लठमार होली खेली जाती है। इस साल नंदगांव की लठमार होली 19 मार्च को खेली जाएगी।
वृंदावन में फूलवाली होली 2024 (20 मार्च, बुधवार)
फिर लठमार होली के बाद वृंदावन में फूलवाली होली खेली जाती है। इस साल वृंदावन की ये होली 20 मार्च को खेली जाएगी।
गोकुल की छड़ीमार होली 2024 (21 मार्च, गुरुवार)
फूलवाली होली के बाद गोकुल की छड़ीमार होली खेली जाती है। जो इस साल 21 मार्च को मनाई जाएगी।
होलिका दहन 2024 (24 मार्च, रविवार)
इस साल होलिका दहन 24 मार्च को किया जाएगा।
रंगोंवाली होली 2024 (25 मार्च, सोमवार)
रंगवाली होली इस साल 25 मार्च को खेली जाएगी।
दाऊजी मंदिर में हुरंगा 2024 (26 मार्च, मंगलवार)
जैसे ब्रज की होली भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित होती है ठीक वैसे ही दाऊजी का हुरंगा श्री कृष्ण के बड़े भाई श्री बलदेवजी पर केंद्रित है। हुरंगा में गोपियां गोपों पर प्रेम स्वरूप कोड़े बरसाती हैं। इस साल दाऊजी मंदिर में हुरंगा 26 मार्च को है।
रंग पंचमी 2024 (30 मार्च, शनिवार)
रंग पंचमी होली का आखिरी दिन होता है। ये त्योहार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।
