अध्यात्म

9 या 10, मई में कब है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, नोट करें सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग व्रत करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। यहां से जानें कि मई की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कब है।

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मासिक कृष्ण जन्माष्टमी तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि, आरती (pc: canva)

Masik Krishna Janmashtami: भगवान कृष्ण के भक्तों के बीच कृष्ण जन्माष्टमी व्रत अत्यंत पवित्र माना जाता है, जो प्रत्येक चंद्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन, भक्त सुबह पवित्र स्नान करके व्रत रखने का संकल्प लेते हैं। व्रत दिनभर रखा जाता है। शाम को भगवान कृष्ण की प्रतिमा के समक्ष विधिपूर्वक पूजा की जाती है। भोग में पंचामृत, तुलसी के पत्ते, माखन मिश्री, दूध, फल, धूप और दीया शामिल होते हैं। भक्त श्रीमद् भागवतम् या भगवद् गीता का पाठ करते हैं, भक्ति गीत गाते हैं और रात भर भगवान कृष्ण की बचपन की लीलाओं को याद करते हुए भक्तिमय ध्यान में लीन रहते हैं। यहां से आप जान सकते हैं कि मई के महीने में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी और इस दिन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी तिथि-

मई 2026 में 9 तारीख को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन शनिवार है।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मुहूर्त-

  • सूर्योदय - 5:52 AM
  • सूर्यास्त - 6:53 PM
  • चन्द्रोदय - May 09 12:34 AM
  • चन्द्रास्त - May 10 12:37 PM
  • अभिजीत मुहूर्त - 11:57 AM – 12:49 PM
  • अमृत काल - 12:23 PM – 02:08 PM
  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:15 AM – 05:03 AM
  • सर्वार्थसिद्धि योग - May 08 09:19 PM - May 09 11:24 PM

कान्हा जी के भोग-

  • खीर
  • माखन
  • मिश्री
  • पंचामृत
  • लड्डू

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि-

  • मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़ें पहने।
  • सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
  • इसके बाद घंटी बजाकर लड्डू गोपाल को उठाएं।
  • लड्डू गोपाल को स्नान कराने के बाद साफ-सुथरे और नए वस्त्र पहनाएं।
  • लड्डू गोपाल को चंदन का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक उनका शृंगार करें।
  • फूलमाला अर्पित करें।
  • देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जप करें।
  • तुलसी का पत्ता डालकर माखन-मिश्री या पंचामृत का भोग लगाएं।
  • कृष्ण जी के मंत्रों का जप करते हुए अंत में आरती करें।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी आरती-

।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ।। [1]

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।

श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।

गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग,

अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।

स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच,

चरन छवि श्री बनवारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद,

टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

।। आरती कुंज बिहारी की... ।। [1, 2]

।। इति आरती कुंज बिहारी की ।।

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Srishti
सृष्टि author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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