अध्यात्म

Masik Durgashtami 2025: मासिक दुर्गाष्टमी व्रत कथा, पढ़ने से ही घर में आती है सुख- समृद्धि

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत कथा (Masik Durgashtami Vrat Katha): आज श्रावण मास की दुर्गाष्टमी है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत और पूजा, कथा के बिना अधूरी मानी जाती है। यहां से आप मासिक दुर्गाष्टमी की व्रत कथा का पाठ कर सकते हैं।

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मासिक दुर्गाष्टमी व्रत कथा (Photo Source: Canva)

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत कथा (Masik Durgashtami Vrat Katha): हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का दिन मासिक दुर्गाष्टमी का दिन होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूरे विधि-विधान से पूजा होती है। कुछ भक्त तो व्रत भी रखते हैं। माता के लिए रखे गए व्रत में मंत्रों का जाप भी किया जाता है। साथ ही इस पूजा का संपूर्ण फल पाने के लिए व्रत कथा भी पढ़ते हैं। अगर आप मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखते हैं या पूजा भी करते हैं तो आपको यहां से व्रत कथा देखकर उसका पाठ करना चाहिए। इसे पढ़ने मात्र के आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी।

मासिक दुर्गाष्टमी मंत्र (Masik Durgashtami Mantra)-

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत कथा (Masik Durgashtami Vrat Katha)-

पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नामक एक राक्षस हुआ करता था जिसने समस्त ब्रह्मांड में हाहाकार मचा रखा था। उसके अत्याचारों से देवता, मनुष्य, यश, गंधर्व, आदि सभी बहुत पीड़ित थे। एक दिन सभी देवता भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्म एव के पास पहुंचे। सभी ने त्रिदेवों से महिषासुर के अंत के लिए आग्रह किया तब त्रिदेवों ने देवताओं के साथ मिलकर माता पार्वती से महिषासुर के वध की प्राथना की। मां पार्वती ने देवताओं और त्रिदेवों की प्रार्थना स्वीकार की और महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। यह युद्ध बहुत भीषण हुआ। अनेकों वरदानों के कारण महिषासुर बहुत बलशाली हो गया था। माता पार्वती का महिषासुर के साथ 9 दिनों तक युद्ध चला लेकिन 10वें दिन माता पार्वती ने दुर्गा स्वरूप धारण कर महिषासुर का वध कर दिया। माता पार्वती और महिषासुर का यह युद्ध अश्विन माह में हुआ था। इन्हीं 9 दिनों को शारदीय नवरात्रि एवं दुर्गा पूजा के रूप में आज भी मनाया जाता है। वहीं, दशमी को महिषासुर के वध के दिवस के रूप में और मां दुर्गा की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसके बाद से मासिक दुर्गाष्टमी का विधान आरंभ हुआ जिसकी शुरुआत शिव जी ने की। भगवान शिव ने माता पार्वती के पराक्रम को देख यह वरदान दिया कि हर माह में मासिक दुर्गाष्टमी आएगी और महिषासुर की भांति ही भक्तों के जीवन से हर संकट का नाश करेगी। इसी कारण से मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जताई है और इस दिन मां की पूजा से सुखों की प्राप्ति होती है।

मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि (Masik Durgashtami Puja Vidhi)-

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठ जाएं। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इस दिन पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और लाल रंग के वस्त्र पहनें। घर और मंदिर की अच्छे से सफाई करने के बाद पूरे घर को गंगाजल का छिड़कर करें। इसके बाद पूजा के स्थान पर एक चौकी बिछाएं और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के दौरान देवी मां को सोलह श्रृंगार की साम्रगी अर्पित करें। क्योंकि लाल रंग मां दुर्गा का प्रिय रंग माना गया है, ऐसे में माता रानी को लाल चुनरी, लाल रंग का पुष्प जरूर अर्पिक करें। आप मां दुर्गा को भोग के रूप में मिठाई, नारियल और शरीफा अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर माता की आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बाटें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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