mantra jaap ke fayde: यदि आप साधना के पथ पर चल रहे हैं या चलना चाहते हैं तो इसके लिए आपने किसी न किसी गुरु से मंत्र दीक्षा जरूर ली होगी। मंत्र दीक्षा प्राप्त होने के बाद या फिर किसी मंत्र को जपने से पहले मंत्र जाप का सही तरीका पता होना बहुत ही जरूरी होता है। मंत्र जप तभी सफल होता है जब साधक उसे सिद्ध कर लेता है।
पंडित वैभव जोशी के अनुसार अध्यात्म के रास्ते पर चलने वाला साधक हो या आम व्यक्ति प्रतिदिन की पूजा में किसी न किसी मंत्र का जाप करता जरूर है। मंत्र जप आप किसी भी उद्देश्य के लिए कर रहे हों लेकिन आप उसे किस तरह से कर रहे हैं, ये बहुत अधिक महत्व रखता है।
मंत्र जप के प्रकार
मंत्र जप तीन तरह से किया जाता है। पहला है वाचिक, जिस मंत्र को करते समय अन्य सुन सके यानी आप मंत्र उच्चारण के साथ कर रहे हैं उसे वाचिक मंत्र कहते हैं। दूसरा है उपांशु, जिस मंत्र को आप अपने हृदय की गहराई में उतर कर जपें और अन्य न सुन सके, उसे उपांशु जप कहते हैं। वहीं तीसरी तरह का जप होता है मानसिक। ये मंत्र जप करने का सबसे आदर्श तरीका है। मानसिक जप में आप मंत्र को अपने मन ही मन में करते हैं। इसे करते हुए जब आप अभ्यस्त हो जाते हैं तो आप अजपा की स्थिति में पहुंच जाते हैं। अजपा यानी वो स्थिति जब मंत्र आपके मन मस्तिष्क में हर क्षण चलता रहे। फिर चाहे आप नींद में ही क्याें न हों। लगातार मंत्र जप करते रहने से आप मंत्र सिद्धि की ओर भी बढ़ सकते हैं।
मंत्र जपें लेकिन संकल्प के साथ
किसी भी मंत्र को जपना तभी सफल होता है जब आप उस मंत्र को सिद्ध कर लें। अन्यथा वो मंत्र मात्र शब्द ही बनकर रह जाते हैं। मंत्र सिद्ध करने के लिए आपको उसे एक संकल्प लेकर करना होता है। जैसे आप नौ दिन में सवा लाख मंत्रों का जाप करेंगे। इसके बाद नवे दिन संकल्प पूरा होने पर आप कम से कम 108 मंत्र जाप करते हुए हवन में आहुति करें। इसी तरह का छोटे− छोटे संकल्प लेकर पूरे 14 लाख मंत्र जप करने के बाद इसी तरह हवन करें। कम से कम 14 लाख मंत्र जप करने के बाद ही आपका मंत्र सिद्ध होता है। जब मंत्र सिद्ध हो जाता है तो आप अपनी मनोकामना पूर्ति भी मंत्र के उच्चारण के माध्यम से कर सकते हैं। सबसे अच्छा तो रहेगा कि आप आत्मज्ञान के मार्ग की ओर बढ़ सकते हैं।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
