Mahesh Navami 2025 Date: महेश नवमी का पर्व ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। बता दें भगवान शिव के विभिन्न पवित्र नामों में से एक नाम महेश भी है। महेश नवमी त्योहार महेश्वरी समाज की उत्पत्ति से जुड़ा हुआ है। एक कथा के अनुसार इस दिन भगवान महेश और माता पार्वती ने 72 क्षत्रियों को शापमुक्त किया था और उन्हें कहा था कि, "आज से तुम्हारे वंश पर हमारी छाप रहेगी और तुम माहेश्वरी कहलाओगे"। इसलिए ही ये त्योहार महेश्वरी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जानिए इस साल महेश नवमी कब है और इसकी पूजा विधि क्या है।
महेश नवमी 2025 तिथि (Mahesh Navami 2025 Date)
महेश नवमी 4 जून 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। नवमी तिथि का प्रारम्भ 3 जून 2025 को रात 9:56 बजे होगा और समापन 4 जून 2025 को रात 11:54 बजे होगा।
महेश नवमी मुहूर्त 2025 (Mahesh Navami Puja Muhurat 2025)
लाभ - उन्नति - 05:23 से 07:07
अमृत - सर्वोत्तम - 07:07 से 08:51
शुभ - उत्तम - 10:35 से 12:20
लाभ - उन्नति - 17:32 से 19:16
शुभ - उत्तम - 20:32 से 21:48
महेश नवमी पूजा सामग्री (Mahesh Navami Puja Samagri)
बेलपत्र, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल (पंचामृत), सफेद फूल, अक्षत (चावल), धूप, दीपक, फल, मिठाई।
महेश नवमी पूजा विधि (Mahesh Navami Puja Vidhi)
- ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लें: “मैं भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने हेतु महेश नवमी व्रत करता/करती हूँ”
- शिवलिंग का अभिषेक करें।
- “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ पार्वत्यै नमः” मंत्रों का जाप करें।
- व्रत के दौरान महेश नवमी की कथा सुनें।
- दिनभर व्रत रखें और संयम का पालन करें।
- व्रत के अंत में ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
- वस्त्र, अन्न, जल और दक्षिणा का दान करें।
महेश नवमी का महत्व (Mahesh Navami Ka Mahatva)
यह दिन परिवार में सुख-शांति और सद्भावना बनाए रखने के लिए शुभ होता है। जो जातक इस दिन शिव-पार्वती का पूजन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विवाहित स्त्रियां इस दिन पति की दीर्घायु और गृह सुख के लिए उपवास करती हैं। नवविवाहित जोड़े यदि एक साथ यह व्रत करें तो वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है।
