अध्यात्म

पांडु नहीं तो किसके पुत्र थे पांडव, कौन थे युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम और नकुल व सहदेव के असली माता-पिता

Pandavon Ke Asli Mata Pita Kaun The : महाभारत युद्ध में विजयी होने वाले पांडवों को राजा पांडु का पुत्र माना जाता है, लेकिन इन वीरों में से एक भी राजा पांडु के पुत्र नहीं था।

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कौन थे पांडवों के पिता

Pandavon Ke Asli Mata Pita Kaun The : द्वापरयुग में अधर्म के खिलाफ हुए धर्मयुद्ध महाभारत में विजयी होने वाले पांच वीरों युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव को पांडु पुत्र कहा जाता है। सीरियल्स और अन्य कथाओं के अनुसार हम आजतक यही मानते आए हैं कि राजा पांडु के पांच पुत्र थे, जिन्हें पांडव कहा जाता है, लेकिन सत्य इससे बिल्कुल अलग है।

जी हां, महाभारत के आदि पर्व के अंतर्गत संभव पर्व में अध्याय 123 से 125 में पांडवों के जन्म की कथा के अनुसार इन पांचों वीरों में से एक भी राजा पांडु के पुत्र नहीं थे। दरअसल, पांडवों के जन्म की कहानी बेहद रोचक और रहस्यों से भरी हुई है। महाभारत के अनुसार, राजा पांडु एक श्राप के कारण संतान उत्पन्न करने में असमर्थ थे।

ऐसे में उनकी पत्नी कुंती को मिले एक दिव्य मंत्र के कारण पांडवों का जन्म हुआ। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पांडवों को सामाजिक और राजवंश की दृष्टि से पांडु के पुत्र ही माना गया, लेकिन उनके जैविक पिता अलग-अलग थे। आइए जानते हैं कि पांचों पांडवों के जन्म की पूरी कहानी और उनके असली माता-पिता कौन थे।

कौन थे राजा पांडु

राजा पांडु हस्तिनापुर के राजा थे। वे वेदव्यास और अंबालिका के पुत्र थे। उनके बड़े भाई धृतराष्ट्र जन्म से नेत्रहीन थे, इसलिए राजगद्दी की जिम्मेदारी पांडु को दी गई। पांडु का विवाह दो राजकुमारियों से हुआ था। पहली पत्नी थीं कुंती, जो राजा शूरसेन की पुत्री थीं और दूसरी पत्नी थीं माद्री, जो मद्र देश की राजकुमारी थीं।

पांडु को मिला था श्राप

महाभारत के अनुसार, एक दिन राजा पांडु अपनी दोनों पत्नियों के साथ जंगल में शिकार करने गए थे। वहां उन्होंने एक हिरण के जोड़े को देखा और उन पर बाण चला दिया। बाण लगते ही वह हिरण अपने वास्तविक रूप में आ गया। वह कोई साधारण हिरण नहीं बल्कि ऋषि किंदम और उनकी पत्नी थे, जो हिरण का रूप धारण करके जंगल में विचरण कर रहे थे।

मृत्यु के समय ऋषि किंदम ने पांडु को श्राप दिया कि जिस तरह उन्होंने उन्हें पत्नी के साथ रहते समय मारा है, उसी तरह यदि पांडु कभी अपनी पत्नी के करीब जाएंगे तो उनकी भी मृत्यु हो जाएगी। इस श्राप के कारण पांडु ने सांसारिक जीवन से दूरी बना ली और अपनी पत्नियों के साथ वन में रहने लगे। इस श्राप के कारण पांडु सांसारिक रूप से पिता बनने में असमर्थ हो गए।

कुंती को मिला था दिव्य मंत्र

वन में रहने के दौरान कुंती ने पांडु को बताया कि उन्हें युवावस्था में ऋषि दुर्वासा से एक दिव्य मंत्र प्राप्त हुआ था। इस मंत्र की सहायता से वह किसी भी देवता का आह्वान कर सकती थीं और देवता के आशीर्वाद से संतान प्राप्त कर सकती थीं। पांडु ने वंश को आगे बढ़ाने के लिए कुंती को इस मंत्र का प्रयोग करने की अनुमति दी। इसी मंत्र के माध्यम से पांचों पांडवों का जन्म हुआ। इस कारण पांचों पांडवों में से तीन की माता कुंती और दो की माद्री थीं, लेकिन पिता अलग-अलग थे।

कौन थे युधिष्ठिर के पिता

कौन थे युधिष्ठिर के पिता

कौन थे युधिष्ठिर के असली माता-पिता

पांडवों में सबसे बड़े युधिष्ठिर थे। उनका जन्म धर्म के देवता धर्मराज के आशीर्वाद से हुआ था। कुंती ने धर्मराज का आह्वान किया था, जिसके फलस्वरूप युधिष्ठिर का जन्म हुआ। उन्हें सत्य, न्याय और धर्म का प्रतीक माना जाता था। महाभारत में उन्हें धर्म पालन और सत्य बोलने के लिए जाना जाता है। राजा पांडु ने युधिष्ठिर को अपना पुत्र माना और उन्हें हस्तिनापुर के राजकुमार के रूप में स्वीकार किया।

कौन थे भीम के पिता

कौन थे भीम के पिता

भीम के पिता कौन थे

दूसरे पांडव भीम थे। उनका जन्म वायु देव के आशीर्वाद से हुआ था। कुंती ने वायु देव का आह्वान किया था, जिसके बाद भीम का जन्म हुआ। वायु देव की शक्ति के कारण ही भीम को असाधारण बल प्राप्त था। महाभारत में भीम को सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक बताया गया है। वायुपुत्र होने के कारण उन्हें हनुमान जी का भाई माना जाता है।

कौन थे अर्जुन के पिता

कौन थे अर्जुन के पिता

देवताओं के राजा थे अर्जुन के पिता

तीसरे पांडव अर्जुन थे। उनका जन्म देवताओं के राजा इंद्र के वरदान से हुआ था। कुंती ने इंद्र देव का आह्वान किया था, जिसके बाद अर्जुन का जन्म हुआ। अर्जुन को धनुर्विद्या में अद्वितीय माना जाता था। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर महाभारत युद्ध के सबसे प्रमुख योद्धाओं में शामिल हुए। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को ही कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में गीता का ज्ञान दिया था।

कौन थे नकुल-सहदेव के पिता

कौन थे नकुल-सहदेव के पिता

किसके पुत्र थे नकुल और सहदेव

पांडवों में चौथे और पांचवें भाई नकुल और सहदेव थे। उनका जन्म कुंती से नहीं बल्कि राजा पांडु की दूसरी पत्नी माद्री से हुआ था। जब कुंती ने माद्री को भी अपना मंत्र बताया, तब माद्री ने उस मंत्र का प्रयोग करके अश्विनी कुमारों का आह्वान किया। अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य माने जाते हैं। उनके आशीर्वाद से माद्री के गर्भ से जुड़वा पुत्रों का जन्म हुआ, जिन्हें नकुल और सहदेव कहा गया। नकुल को सुंदरता और घुड़सवारी में निपुण माना जाता था, जबकि सहदेव बुद्धिमान और ज्योतिष ज्ञान में कुशल थे।

क्यों कहा जाता है पांडव

धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से पांडवों को राजा पांडु के पुत्र ही माना गया है। उस समय की परंपरा के अनुसार, यदि किसी पुरुष को संतान प्राप्ति में समस्या होती थी तो विशेष परिस्थितियों में देव आशीर्वाद या नियोग विधि से पत्नी गर्भधारण कर सकती थी। महाभारत में पांडवों का पालन-पोषण पांडु और उनकी पत्नियों ने किया। इस कारण वे पांडव कहलाए और हस्तिनापुर के राजवंश के उत्तराधिकारी बने।

कर्ण भी थे कुंती के पुत्र

कुंती को विवाह से पहले ही एक पुत्र प्राप्त हुआ था। उन्होंने ऋषि दुर्वासा के मंत्र की परीक्षा लेने के लिए सूर्य देव का आह्वान किया था, जिससे कर्ण का जन्म हुआ। कुंती ने लोक-लाज के भय से कर्ण को नदी में बहा दिया था। बाद में कर्ण का पालन-पोषण अधिरथ और राधा ने किया। इस तरह कर्ण पांडवों के सबसे बड़े भाई थे, लेकिन यह रहस्य लंबे समय तक छिपा रहा।

कैसे हुई पांडु की मृत्यु

ऋषि किंदम के श्राप के कारण पांडु हमेशा सावधानी रखते थे, लेकिन एक दिन वन में रहते हुए वह स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पाए और अपनी पत्नी माद्री के करीब चले गए। श्राप के प्रभाव से उसी समय उनकी मृत्यु हो गई। माद्री अपने पति की मृत्यु का दुख सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने भी उनके साथ प्राण त्याग दिए। इसके बाद कुंती ने पांचों पांडवों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभाली और उन्हें लेकर हस्तिनापुर लौट आईं।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी महाभारत शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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