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MP Holika Dahan Timing 2026: ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, सतना में होली में आग कब लगेगी, होलिका दहन का सही समय देखें यहां

Madhya Pradesh Holika Dahan 2026 Timing (होली में आग कब लगेगी), Holi Mein Aag Lagne ka Time (ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, सतना में होलिका दहन का सही समय क्या है): 2 मार्च 2026 को होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है। यदि आप मध्य प्रदेश में रहते हैं और अपने शहर में होलिका दहन का टाइम जानना चाहते हैं, तो पढ़ें ये लेख। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में होलिका दहन कब होगा?

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मध्य प्रदेश में होलिका दहन कितने बजे होगा?

Holika Dahan Timing 2026 in Madhya Pradesh: होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का प्रतीक है। हर साल फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की रात को होलिका दहन के लंबे समय से चले आ रहे परंपरा के तहत मनाया जाता है। इस बार 2 मार्च के दिन होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है। लेकिन इस साल होलिका दहन की तारीख और समय को लेकर काफी कन्फ्यूजन देखा जा रहा है। यदि आप मध्य प्रदेश के किसी शहर में रहते हैं और वहां होलिका दहन का समय जानना चाहते हैं, तो आगे पढ़ें मध्य प्रदेश में होलिका दहन का सही समय।

मध्य प्रदेश के शहरों में होलिका दहन कब होगा (Holika Dahan Time In Madhya Pradesh)

Madhya Pradesh Mein Holika Dahan Kab Hoga

शहर का नामहोलिका दहन का टाइम
भोपाल (Bhopal) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
इंदौर (Indore) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
जबलपुर (Jabalpur) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
ग्वालियर (Gwalior) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
उज्जैन (Ujjain) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
रीवा (Rewa) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
सागर (Sagar) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
सतना (Satna) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
रतलाम (Ratlam) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक
देवास (Dewas) में कब होगा होलिका दहनशाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक

होली और होलिका दहन का धार्मिक महत्व

होलिका दहन सिर्फ अग्नि जलाना भर नहीं है बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की विजय का भी प्रतीक है। कथा के मुताबिक भक्त प्रह्लाद की भक्ति से भयभीत होकर हिरण्यकश्यप अपने बेटे प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका की गोद में रखकर आग में प्रवेश करवाता है, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति से होलिका स्वयं जल जाती है और प्रह्लाद बच जाता है। इसी से सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति, सच्चाई और अच्छाई हमेशा विजयी होती है।

होलिका दहन की रात को पूजा के बाद अग्नि की परिक्रमा की जाती है और घर-परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। इसके बाद शांत हुई अग्नि की राख को तिलक के रूप में लगाया जाता है। यह तिलक भय से सुरक्षा और जीवन में शुभ का संकेत माना जाता है।

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गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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