Mata ki Lal Chunri ka Mahatva: नवरात्र आते ही मां के लिए लाल चुनरी लेने के लिए भक्तों में एक अलग ही उत्साह दिखता है। लेकिन दुकान पर पहुंचते हैं तो लाल चुनरियों के बीच नजर ठहर जाती है। आपके मन में भी सवाल आया होगा कि मां को लाल रंग की चुनरी क्यों चढ़ाई जाती है। ऐसे में चुनरी पसंद करते हुए कई बार उलझन भी होती है। किसी की किनारी सुंदर लगती है, किसी पर बनी सुनहरी बूटियां। घर में मां की छोटी सी प्रतिमा है तो क्या बड़ी चुनरी लें? बजट कम है तो साधारण चुनरी चलेगी? ऐसे सवाल खासकर तब आते हैं, जब पहली बार अपने हाथों से देवी का श्रृंगार कर रहे हों। चलिए, इन बातों को एक-एक करके समझते हैं।
मां दुर्गा को लाल चुनरी क्यों चढ़ाई जाती है
मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में लाल रंग भी शक्ति, साहस और सौभाग्य से जुड़ा है। इसलिए देवी की पूजा में लाल चुनरी अर्पित करने का विशेष स्थान है।
चुनरी चढ़ाना देवी को वस्त्र अर्पित करने और उनका श्रृंगार करने का एक तरीका भी है। भक्त इसके साथ अपने मन की प्रार्थना रखते हैं। कोई घर में सुख-शांति की कामना करता है। कोई मुश्किल समय में हिम्मत मांगता है। कोई मन की इच्छा पूरी होने पर मां के प्रति आभार जताता है।
आपने देखा होगा कि देवी के दर्शन करने जाते समय लोग चुनरी बड़े ध्यान से संभालकर रखते हैं। मंदिर पहुंचकर उसे श्रद्धा से अर्पित करते हैं। इस छोटे से काम में मां के प्रति उनका लगाव दिखाई देता है।
क्या मां दुर्गा को छोटी चुनरी चढ़ा सकते हैं
हां, मां दुर्गा को छोटी चुनरी भी अर्पित कर सकते हैं। घर की छोटी प्रतिमा या तस्वीर के लिए छोटी चुनरी लेना सुविधाजनक रहता है। बड़ी चुनरी ही चढ़ानी चाहिए, ऐसा कोई एक नियम सभी घरों और मंदिरों पर लागू नहीं होता। मान लीजिए, आपके पूजा घर में मां की छोटी प्रतिमा है। उस पर बहुत बड़ी चुनरी ओढ़ाने से चेहरा और बाकी श्रृंगार ढक सकता है। ऐसे में प्रतिमा के आकार के अनुसार चुनरी चुनना बेहतर होगा। आप उसे आसानी से ओढ़ा भी पाएंगे और पूजा की जगह व्यवस्थित रहेगी।
मंदिर में चुनरी अर्पित करनी है तो वहां की व्यवस्था के अनुसार चलें। कुछ मंदिरों में भक्तों की दी हुई चुनरी पुजारी स्वीकार करते हैं। कहीं वस्त्र अर्पित करने के अलग नियम होते हैं। घर में कुलदेवी की पूजा की कोई विशेष परंपरा हो तो उसका ध्यान भी रखें।
नवरात्र में लाल रंग का क्या महत्व है
नवरात्र देवी उपासना का पर्व है। इन दिनों मां से साहस, सद्बुद्धि और जीवन में मंगल की कामना की जाती है। लाल रंग को परंपरागत रूप से ऊर्जा, शक्ति और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए देवी के वस्त्र, चुनरी, रोली और फूलों में यह रंग खूब दिखाई देता है।
जरा घर के दूसरे शुभ अवसर याद कीजिए। विवाह के जोड़े से लेकर पूजा की रोली तक, लाल रंग कई जगह मौजूद रहता है। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं में इसका रिश्ता सौभाग्य और उत्सव से भी है। हालांकि, देवी के अलग-अलग स्वरूपों और स्थानीय परंपराओं में दूसरे रंगों के वस्त्र भी अर्पित किए जाते हैं। हालांकि आपके घर में जिस तरह पूजा होती आई है, उस परंपरा के अनुसार श्रृंगार कर सकते हैं।
मां के लिए चुनरी कैसे खरीदें
चुनरी लेने से पहले घर की प्रतिमा या तस्वीर का आकार ध्यान में रख लें। दुकान पर केवल चमक देखकर चुनेंगे तो बाद में उसे ओढ़ाने में परेशानी हो सकती है। साफ और अच्छी स्थिति वाली चुनरी लें। यह कहीं से कटी या फटी नहीं होनी चाहिए। ये भी ध्यान रखें कि कपड़े की किनारी ऐसी हो जिसे आसानी से संभाला जा सके। बहुत भारी सजावट छोटी प्रतिमा पर टिकाना मुश्किल हो सकता है। तस्वीर के लिए चुनरी ले रहे हैं तो हल्के कपड़े का विकल्प सुविधाजनक रहेगा।
कीमत को लेकर भी बेवजह दबाव न लें। अपने बजट में चुनरी चुनें। साधारण चुनरी से भी मां का सुंदर श्रृंगार किया जा सकता है।
मां दुर्गा को चुनरी कैसे चढ़ाएं
पूजा के समय साफ हाथों से चुनरी लें और मां का स्मरण करते हुए अर्पित करें। प्रतिमा पर चुनरी को धीरे से ओढ़ाएं। उसे इस तरह रखें कि देवी का चेहरा दिखाई देता रहे और बाकी श्रृंगार भी ठीक से लगा रहे। यदि तस्वीर पर चुनरी रख रहे हैं तो उसे ऊपर या किनारों पर व्यवस्थित कर सकते हैं। तस्वीर को ढकने या उसके फ्रेम पर जरूरत से ज्यादा वजन डालने से बचें। चुनरी के खुले सिरे दीये और जलती धूप से दूर रखें।
मंदिर में स्वयं चुनरी ओढ़ाने की अनुमति न हो तो उसे पुजारी को सौंप दें। वहां की पूजा व्यवस्था का सम्मान करते हुए अर्पण करें।
साथ ही चुनरी चढ़ाते समय मां से सभी के स्वास्थ्य और मंगल की कामना करें। उनसे घर में शांति और सही रास्ते पर चलने की समझ का आशीर्वाद मांगें।
