Why Chandra Grahan Occurs On Purnima: साल का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई यानी शुक्रवार के दिन लग रहा है। इस दिन रात्रि में 08 बजकर 45 मिनट से चंद्रग्रहण आरंभ होगा। वहीं, इसका समापन देर रात 1 बजे पर होगा। इसकी कुल समयावधि 4 घंटे 18 मिनट तक की होगी। वैज्ञानिक दृष्टि, चंद्र ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी आ जाती है। यह एक खगोलीय घटना है, जो हर साल ही घटित होती है। लेकिन, गौर करने वाली बात ये है कि चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही क्यों लगता है और ये हर पूर्णिमा पर क्यों नहीं लगता। तो आइए इस लेख के मध्य से इन सारे सवालों के जवाब जान लेते हैं।
कैसे लगता है चंद्र ग्रहण? How Chandra Grahan Occurs
वास्तव में, पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है। इसी कड़ी में एक क्षण ऐसा आता है जब चंद्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी आ जाती है। इस प्रकार तीनों के एक सीध में आ जाने से सूर्य की रौशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती और इस स्थिति को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। लेकिन, अब सवाल ये है कि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही क्यों लगता है, यहां जानिए विस्तार से...
पूर्णिमा पर ही क्यों लगता है चंद्र ग्रहण? Why Chandra Grahan Occurs On Purnima Tithi Always
पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए जब भी चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, तो वो दिन पूर्णिमा का ही होता है। बात चंद्र ग्रहण की करें तो यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हों। ज्यामितीय प्रतिबन्ध के कारण, ये केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव है। इसलिए चंद्र ग्रहण हर बार पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है। लेकिन हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण न लगने की वजह ये है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा पर करीब 5 डिग्री झुकी हुई है। इस झुकाव के कारण कई बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश किए बिना ही ऊपर या नीचे से निकल जाता है। इस कारण से हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं लगता लेकिन चंद्रग्रहण जब भी लगता है तो पूर्णिमा तिथि पर ही।
कहां-कहां दिखेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण?
5 मई 2023, (Chandra Grahan 2023 Date) शुक्रवार के दिन साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा। दरअसल, ये उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। इसका दर्शन भारत में नहीं होगा। ये चंद्र ग्रहण यूरोप, एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, प्रशांत अटलांटिक और हिंद महासागर पर दिखाई देने वाला है।
