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कुंडली मिलान में दिखें ये दोष तो न करें शादी, घरेलू कलह और अलगाव से लेकर तलाक की बन सकते हैं वजह

Kundli Milan Before Marriage : ज्योतिष के अनुसार शादी से पहले कुंडली मिलान में कितने भी गुण मिल रहे हों, लेकिन कुछ दोष होने पर शादी करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं वे दोष कौन से हैं।

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कुंडली मिलान में दिखें ये दोष तो न करें शादी, घरेलू कलह और अलगाव से लेकर तलाक की बन सकते हैं वजह

Kundli Milan Before Marriage : वैदिक ज्योतिष में विवाह को केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो संस्कारों का मिलन माना गया है। यही कारण है कि सनातन परंपरा में शादी से पहले कुंडली मिलान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कई लोग इसे केवल '36 गुण मिलान' तक सीमित समझते हैं, लेकिन असल में विवाह मिलान इससे कहीं ज्यादा गहरा विषय है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ ऐसे दोष और योग होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करने पर वैवाहिक जीवन में लगातार तनाव, अलगाव, मानसिक दूरी, घरेलू हिंसा, आर्थिक परेशानी और यहां तक कि तलाक जैसी स्थिति तक बन सकती है। बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, जातक पारिजात, फलदीपिका, विवाह पटल और मुहूर्त चिंतामणि जैसे ग्रंथों में विवाह से पहले कई विशेष बातों का मिलान करने का उल्लेख मिलता है। आइए जानते हैं कि कुंडली में कौन-कौन से दोष या गुण न मिलने पर शादी करने से बचना चाहिए।

केवल 36 गुण मिलना ही काफी नहीं

ज्योतिषाचार्य पं. सत्यम विष्णु अवस्थी कहते हैं कि अक्सर लोग मान लेते हैं कि यदि 18 से ज्यादा गुण मिल गए तो शादी सफल हो जाएगी, लेकिन ज्योतिष में ऐसा जरूरी नहीं माना गया है। कई बार 30 से ज्यादा गुण मिलने के बाद भी रिश्ते टूट जाते हैं, क्योंकि ग्रहों की वास्तविक स्थिति और दोषों की जांच नहीं की गई होती है।

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में बताया गया है कि सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, गुरु, चंद्रमा और मंगल की स्थिति विवाह सुख को प्रभावित करती है। इसलिए केवल अंक देखकर निर्णय लेना ठीक नहीं माना जाता है।

गंभीर है नाड़ी दोष

गंभीर है नाड़ी दोष

सबसे गंभीर है नाड़ी दोष

अष्टकूट मिलान में नाड़ी दोष को सबसे ज्यादा 8 अंक दिए गए हैं। इसका कारण यह है कि नाड़ी का संबंध स्वास्थ्य, संतति (संतान) और मानसिक तालमेल से माना जाता है। यदि वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो, तो नाड़ी दोष बनता है। मुहूर्त चिंतामणि और जातक तत्व में कहा गया है कि गंभीर नाड़ी दोष होने पर वैवाहिक जीवन में मानसिक दूरी, स्वास्थ्य समस्याएं और संतान सुख में बाधा आ सकती है।

हालांकि, हर नाड़ी दोष खतरनाक नहीं होता है। यदि दोनों की कुंडली में गुरु मजबूत हो, सप्तम भाव शुभ हो या दोष का परिहार बन रहा हो, तो इसका प्रभाव कम हो सकता है, लेकिन बिना उचित विश्लेषण के इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं माना जाता है।

तलाक तक की आ सकती है नौबत

तलाक तक की आ सकती है नौबत

भकूट दोष से बढ़ता है अलगाव का खतरा

भकूट दोष का संबंध चंद्र राशि के आपसी संबंध से होता है। अष्टकूट मिलान में इसे 7 अंक दिए गए हैं। ज्योतिष में 6-8 और 2-12 संबंध वाली राशियों को विवाह के लिए कठिन माना गया है। फलदीपिका के अनुसार, ऐसा संबंध पति-पत्नी के बीच मानसिक मतभेद, आर्थिक अस्थिरता और अलग रहने की स्थिति पैदा कर सकता है। विशेष रूप से यदि भकूट दोष के साथ मंगल दोष या राहु-केतु का प्रभाव भी जुड़ जाए, तो रिश्ते में लगातार टकराव बना रह सकता है।

मंगल दोष को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

मंगल को ऊर्जा, क्रोध और आक्रामकता का ग्रह माना जाता है। यदि मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में बैठा हो, तो मांगलिक दोष बनता है। बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में बताया गया है कि उग्र मंगल वैवाहिक जीवन में विवाद, क्रोध, हिंसक व्यवहार और अलगाव का कारण बन सकता है। इसे घरेलू हिंसा और अत्यधिक गुस्से वाले स्वभाव में अशुभ मंगल की भूमिका मानी जाती है।

हालांकि, यदि दोनों पक्ष मांगलिक हों या मंगल उच्च का हो, गुरु की दृष्टि हो या मंगल शुभ योग बना रहा हो, तो इसका असर कम हो सकता है, लेकिन एक मांगलिक और दूसरा पूरी तरह अमांगलिक हो, तो सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

बढ़ती है घरेलू हिंसा

बढ़ती है घरेलू हिंसा

कमजोर हो सप्तम भाव तो रिश्ते में आती है दूरी

ज्योतिषार्च पं, सत्यम विष्णु अवस्थी के अनुसार, कुंडली का सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी का भाव माना जाता है। यदि इस भाव में राहु, केतु, शनि या मंगल जैसे पाप ग्रह अशुभ स्थिति में हों, तो वैवाहिक सुख प्रभावित हो सकता है। जातक पारिजात के अनुसार, सप्तम भाव पर पाप ग्रहों का अत्यधिक प्रभाव पति-पत्नी के बीच अविश्वास, दूरी और बार-बार झगड़े का कारण बनता है। यदि सप्तमेश भी नीच राशि में हो, अस्त हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो शादी के बाद रिश्ता टिकाने में कठिनाई आ सकती है।

ग्रहों की यह स्थिति दे सकती है तलाक के संकेत

ज्योतिष में कुछ विशेष योग ऐसे माने गए हैं जो वैवाहिक टूटन की संभावना बढ़ाते हैं। जैसे सप्तम भाव में राहु-केतु का अशुभ प्रभाव, शुक्र और मंगल की उग्र युति, सप्तमेश का अष्टम या द्वादश भाव में पीड़ित होना, चंद्रमा का राहु या केतु से ग्रसित होना, नवमांश कुंडली का कमजोर होना आदि योग तलाक की स्थिति तक दे सकते हैं।

फलदीपिका में कहा गया है कि यदि विवाह कारक शुक्र अत्यधिक पीड़ित हो और साथ में चंद्रमा भी कमजोर हो, तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से अस्थिर हो सकता है। इससे रिश्ते लंबे समय तक नहीं टिकते हैं।

घरेलू हिंसा के पीछे जिम्मेदार हैं ये ग्रह

वैदिक ज्योतिष में घरेलू हिंसा को केवल एक ग्रह से नहीं जोड़ा जाता, बल्कि कई ग्रहों के अशुभ मेल को कारण माना जाता है। यदि मंगल और राहु की युति हो, मंगल पर शनि की क्रूर दृष्टि हो या चंद्रमा कमजोर होकर पाप ग्रहों से घिरा हो, तो व्यक्ति का स्वभाव अत्यधिक गुस्सैल और हिंसक हो सकता है। बृहत जातक में मंगल-शनि के उग्र संबंध को मानसिक कठोरता और आक्रामक व्यवहार से जोड़ा गया है। वहीं राहु व्यक्ति के व्यवहार को असंतुलित और अचानक क्रोधी बना सकता है।

केवल गुण नहीं, मानसिक स्वभाव भी देखना जरूरी

आज के समय में कई रिश्ते इसलिए टूट रहे हैं क्योंकि केवल गुण मिलाकर शादी कर दी जाती है, लेकिन मानसिक और व्यवहारिक स्वभाव का विश्लेषण नहीं किया जाता है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है। यदि दोनों की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अत्यधिक विरोधी हो, तो सोच और भावनाएं मेल नहीं खातीं। इससे छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगते हैं। इसी तरह शुक्र प्रेम और आकर्षण का ग्रह है। यदि शुक्र पीड़ित हो, तो रिश्ते में प्यार और सम्मान की कमी आने लगती है।

नवामांश कुंडली देखे बिना नहीं लेना चाहिए निर्णय

ज्योतिष में नवांश कुंडली को विवाह का सूक्ष्म विश्लेषण माना जाता है। कई बार मुख्य कुंडली अच्छी दिखाई देती है, लेकिन नवांश कमजोर होने पर शादी के बाद समस्याएं शुरू हो जाती हैं। पराशर होरा शास्त्र में नवांश को विवाह सुख का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। यदि नवांश में सप्तम भाव पीड़ित हो या शुक्र कमजोर हो, तो रिश्ते में स्थिरता नहीं रहती।

इन स्थितियों में शादी टालना माना जाता है बेहतर

ज्योतिषाचार्य सत्यम विष्णु अवस्थी के अनुसार, कुछ स्थितियों में विवाह को लेकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इनमें गंभीर नाड़ी दोष और उसका परिहार न होना, मजबूत मंगल दोष के साथ राहु-शनि का प्रभाव, सप्तम भाव और सप्तमेश दोनों का पीड़ित होना, नवांश कुंडली में विवाह कारक ग्रहों का कमजोर होना, चंद्रमा और शुक्र दोनों का अशुभ प्रभाव में होना, भकूट दोष के साथ मानसिक असंगति आदि स्थितियों में उन जोड़ों की शादी नहीं करनी चाहिए।

क्या दोष होने पर शादी नहीं करनी चाहिए

ज्योतिष में हर दोष का मतलब यह नहीं होता कि शादी नहीं हो सकती है। कई बार ग्रहों के शुभ प्रभाव दोषों को कम कर देते हैं। इस कारण केवल इंटरनेट या सामान्य गुण मिलान देखकर निर्णय लेना सही नहीं माना जाता है।

कुंडली मिलान का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित समस्याओं को समझना होता है। सही ज्योतिषीय विश्लेषण से कई दोषों का परिहार भी संभव माना गया है। विवाह जीवन का सबसे बड़ा निर्णय होता है। इसलिए केवल आकर्षण या जल्दबाजी में नहीं, बल्कि मानसिक, पारिवारिक और ज्योतिषीय सभी पहलुओं को देखकर ही फैसला लेना बेहतर माना जाता है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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