Krishna Mantra (कृष्ण जी के मंत्र): श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भक्तगण व्रत रखते हैं, लड्डू गोपाल को स्नान कराते हैं, सुंदर वस्त्र पहनाते हैं और झूले में झुलाते हैं। घरों और मंदिरों में झांकियां, भजन, कीर्तन और रासलीला का आयोजन होता है। रात 12 बजे, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय, विशेष पूजा और आरती की जाती है। श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, भक्ति, ज्ञान और धर्म की शिक्षा देता है। यहां से आप कान्हा जी के कुछ शक्तिशाली मंत्र देख सकते हैं। यहां कृष्ण के बीज मंत्र, कृष्ण गायत्री मंत्र समेत कई सारे मंत्र मौजूद हैं।
ॐ कृष्णाय नमः
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
यह मंत्र 12 अक्षरों का है, जिसे द्वादशाक्षरी मंत्र भी कहते हैं। इसे विष्णु और कृष्ण दोनों को समर्पित माना जाता है।
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने,
प्रणत: क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः।
ॐ श्री गोविंदाय नमः
श्रीकृष्ण के गोविंद रूप की उपासना के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ देवकीनंदनाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥
ॐ बालकृष्णाय विद्महे, वृंदावनप्रियाय धीमहि, तन्नो गोपालः प्रचोदयात्॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।।
कृष्ण भगवान को भोग लगाने के लिए 'त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर।।' मंत्र का जाप किया जाता है।
अर्थ- हे गोविन्द, जो भी मेरे पास है, वह सब आपका ही दिया हुआ है, मैं आपको ही समर्पित करता हूँ। कृपा करके इसे स्वीकार करें और मुझ पर प्रसन्न हों।