Kalki Jayanti 2025: हिंदू धर्म में कल्कि जयंती के पर्व का खास महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु के दसवें अवतार भगवान कल्कि के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान कल्कि की पूजा- अर्चना की जाती है। कल्कि पुराण के अंतर्गत भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। कल्कि पुराण के अनुसार जब कलयुग में पाप अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएगा और कलयुग का अंतिम चरण होगा। तब भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि का जन्म होगा। कल्कि जयंती सावन की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन मनाई जाती है। आइए जानते हैं इस साल कल्कि जयंती कब मनाई जाएगी।
कब कल्कि जयंती 2025 (Kalki Jayanti 2025 Date)
कल्कि जयंती का पर्व हर साल सावन महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल कल्कि जयंती का पर्व 30 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कल्कि की पूजा की जाती है।
कल्कि जयंती 2025 शुभ मुहूर्त (Kalki Jayanti 2025 Shubh Muhurat)
इस साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 30 जुलाई को रात 12 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 31 जुलाई को रात 2 बजकर 41 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 30 अगस्त को कल्कि जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 04.06 PM बजे से शाम 06.38 PM तक तक रहने वाला है।
कब होगा कल्कि का जन्म
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, जिस समय कलयुग अपने अंत पर होगा। समाज में बुराईयां चारो तरफ फैल जाएगी और धर्म से ज्यादा लोग अधर्म करने लगेंगे। उस समय कलयुग का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के दसवें अवतार अपनी 64 कलाओं से परिपूर्ण होकर कल्कि रूप में जन्म लेंगे। भगवान कल्कि अर्धमियों का नाश करके धर्म की फिर से स्थापना करेंगे। भगवान कल्कि द्वारा कलयुग का अंत किया जाएगा। फिर दुबारा से सतयुग की शुरुआत होगी। भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का जन्म सावन मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन होगा। इस कारण हर साल विष्णु भक्त इस दिन पर कल्कि जयंती मनाते हैं।
कल्कि जयंती पूजा विधि (Kalki Jayanti Puja Vidhi)
इस दिन सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। यदि कल्कि जयंती के दिन व्रत करना चाहते हैं, तो व्रत का संकल्प लें। इस दिन पूजा करते समय पीले वस्त्र धारण करें। साफ चौकी पर माता लक्ष्मी और विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित करें। पूजा के समय मूर्ति पर फूल, अक्षत अर्पित करें। इसके बाद कथा और विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें। आरती के बाद भोग लगाकर सबको भोग बांटें।
