अध्यात्म

Kalashtami Puja Vidhi: कालाष्टमी पर ऐसे करें कालभैरव की पूजा, इन मंत्रों के जाप से कट जाएंगे संकट

Kalashtami Puja Vidhi: कालाष्टमी के दिन काल भैरव के पूजन का विधान है, जो भगवान शिव के रूप माने जाते हैं। आज कालाष्टमी के दिन जानें कालाष्टमी की पूजा विधि और पूजन मंत्र।

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कालाष्टमी की पूजा विधि

Kalashtami Puja Vidhi: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप माने जाने वाले भगवान कालभैरव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से कालभैरव की पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से भय, संकट, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख, सुरक्षा और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालभैरव को समय और न्याय का देवता माना गया है। जो भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करता है, उसके जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। खासतौर पर कालाष्टमी की रात की पूजा को बेहद फलदायी माना गया है। आज कालाष्टमी के दिन जानें संपूर्ण पूजा-विधि...

कालभैरव की पूजा विधि

कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान कालभैरव की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। आपको आगे बताए गए क्रम में कालभैरव की पूजा करनी चाहिए।

  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं
  • काले तिल, फूल और नारियल अर्पित करें
  • भगवान को इमरती, जलेबी या उड़द से बने पकवान का भोग लगाएं
  • कालभैरव चालीसा और शिव मंत्रों का पाठ करें
  • पूजा के दौरान कुत्ते को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है

कालाष्टमी की रात्रि में की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया है। इसलिए प्रयास करें की आज का पूजन सूर्यास्त के बाद हो। इससे आपको पूजा का विशेष फल प्राप्त होगा।

कालाष्टमी पर करें इन मंत्रों का जाप - Kaal Bhairav Mantra

1. कालभैरव मूल मंत्र

“ॐ कालभैरवाय नमः”

इस मंत्र का 108 बार जाप करने से भय और नकारात्मकता दूर होने की मान्यता है।

2. भैरव गायत्री मंत्र

“ॐ कालकालाय विद्महे, कालहस्ताय धीमहि, तन्नो भैरवः प्रचोदयात्।”

इस मंत्र के जाप से मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ता है।

3. संकट दूर करने का मंत्र

“ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।”

यह मंत्र जीवन की बाधाओं और संकटों को दूर करने वाला माना जाता है।

कालाष्टमी की पूजा का महत्व

कालाष्टमी के दिन भगवान कालभैरव की पूजा करने से राहु-केतु और शनि से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है। यह पूजा मानसिक तनाव, भय और आर्थिक संकट से राहत दिलाने वाली मानी जाती है। तंत्र और आध्यात्म से जुड़े साधकों के लिए भी यह तिथि विशेष महत्व रखती है।

मान्यता है कि इस दिन कालभैरव की उपासना करने से व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। कई लोग इस दिन व्रत रखकर रात्रि में विशेष पूजा-अर्चना भी करते हैं।

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गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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