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Kajri Teej Song Lyrics In Hindi: कजरी तीज के दिन गाएं ये लोकगीत, यहां देखें सॉन्ग लिरिक्स

Kajri Teej Song: कजरी तीज के दिन सुहागिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन कजरी तीज के गीत भी गाएं जाते हैं। यहां देखें करजी तीज के गीत लिरिक्स।

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Kajri Teej Song

Kajri Teej Song: कजरी तीज का व्रत हर साल भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल कजरी तीज का व्रत 22 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। कजरी तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन निमड़ी माता की भी पूजा की जाती है। कजरी तीज के दिन सारी महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं और लोकगीत गाती हैं। इस दिन लोकगीत गाने की खास परंपरा है। कजरी तीज के सॉन्ग प्राकृति से जुड़े हुए होते हैं। इसके साथ इन गीतों में स्त्रियों के हर भाव का वर्णन भी किया जाता है। आइए यहां देखें कजरी तीज के लोकगीत के लिरिक्स।

Kajri Teej Song (कजरी तीज गीत लिरिक्स)

आई सावन की बहार

छाई घटा घनघोर बन में, बोलन लागे मोर।

पनियां बरसै जोर मोरे प्यारे बलमू।।

चद्दर सिंआव, सारी सबज रंगाव।

वामें गोटवा टकाव, मोरे बारे बलमू।।

मैं तो जइहों कुंजधाम, सुनो कजरी ललाम।

जहाँ झूले राधे-श्याम, मोरे बारे बलमू।।

बलदेव क्यों उदास पुनि अइहौ तोरे पास।

मानो मोरा विसवास, मोरे बारे बलमू।।

तरसत जियरा हमार नैहर में

तरसत जियरा हमार नैहर में ।

बाबा हठ कीनॊ, गवनवा न दीनो बीत गइली बरखा बहार नैहर में ।

फट गई चुन्दरी, मसक गई अंगिया टूट गइल मोतिया के हार, नैहर में ।

कहत छ्बीले पिया घर नाही नाही भावत जिया सिंगार, नैहर में।

देखो सावन में हिंडोला झूलैं

देखो सावन में हिंडोला झूलैं मन्दिर में गोपाल।

राधा जी तहाँ पास बिराजैं ठाड़ी बृज की बाल।।

सोना रूपा बना हिंडोला, पलना लाल निहार।

जंगाली रंग, सजा हिंडोला, हरियाली गुलज़ार।।

भीड़ भई है भारी, दौड़े आवैं, नर और नार।

सीस महल का अजब हिंडोला, शोभा का नहीं पार ।।

छैला छाय रहे मधुबन में छैला

छाय रहे मधुबन में सावन सुरत बिसारे मोर।

मोर शोर बरजोर मचावै, देखि घटा घनघोर।।

कोकिल शुक सारिका पपीहा, दादुर धुनि चहुंओर।

झूलत ललिता लता तरु पर, पवन चलत झकझोर।।

ताखि निकुंज सुनो सुधि आवै श्याम संवलिया तोर।

विरह विकल बलदेव रैन दिन बिनु चितये चितचोर।।

फूल काँच मेहराब जु लागी पत्तन बांधी डार।

रसिक किशोरी कहै सब दरसन करते ख़ूब बहार।।

Jayanti Jha
जयंती झा author

बिहार के मधुबनी जिले से की रहने वाली हूं, लेकिन शिक्षा की शुरुआत उत्तर प्रदेश की गजियाबाद जिले से हुई। दिल्ली विश्वविद्यायलय से हिंदी ऑनर्स से ग्रेजुए... और देखें

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