भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी व माता एकादशी की आरती लिरिक्स हिंदी में, इनके बिना अधूरी है एकादशी की पूजा
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 29, 2026, 11:40 AM IST
Jaya Ekadashi Aarti 2026 (जया एकादशी पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और एकादशी माता की संपूर्ण आरती हिंदी में): माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी का व्रत रखा जाता है। साल 2026 में यह व्रत 29 जनवरी को रखा जा रहा है। इस व्रत और पूजन के बाद आरती करना आवश्यक होता है। दरअसल कोई भी पूजा बिना आरती के संपन्न नहीं होती है। इस दिन भगवान विष्णु, माता एकादशी और माता लक्ष्मी की आरती करना चाहिए। आइए जानते हैं माता लक्ष्मी और माता एकादशी व भगवान विष्णु की आरती के लिरिक्स हिंदी में।
भगवान विष्ण, मां लक्ष्मी और माता एकादशी की आरती
Jaya Ekadashi Aarti 2026 (जया एकादशी पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और एकादशी माता की संपूर्ण आरती हिंदी में): हिंदू धर्म में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 29 जनवरी को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और आरती करने से साधक को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। जया एकादशी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और एकादशी माता की पूजा और आरती करना अत्यंत शुभ माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार एकादशी केवल व्रत तक सीमित नहीं होती, बल्कि इस दिन की गई आरती पूजा को पूर्णता प्रदान करती है। माना जाता है कि आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। जया एकादशी पर तीनों की आरती करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
जया एकादशी के दिन आरती का महत्व
जया एकादशी के दिन आरती करने का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। भगवान विष्णु की आरती से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है। माता लक्ष्मी की आरती से धन, वैभव और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जबकि एकादशी माता की आरती से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और भक्त को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने की शक्ति मिलती है। इसलिए इस दिन तीनों की आरती क्रम से करना श्रेष्ठ माना जाता है।
भगवान विष्णु जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।
जो ध्यावे फल पावे,
दुख बिनसे मन का।
स्वामी दुख बिनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का।
मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी।
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतर्यामी।
स्वामी तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी।
तुम करुणा के सागर,
तुम पालन करता।
स्वामी तुम पालन करता।
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता।
तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति।
दीनबंधु दुखहर्ता,
ठाकुर तुम मेरे।
स्वामी ठाकुर तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ,
द्वार पड़ा तेरे।
विषय विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा।
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।
एकादशी माता की आरती
जय एकादशी माता,
माता जय एकादशी माता।
विष्णु भक्त जनों की,
तुम हो त्राता।
शुक्ल पक्ष हो या हो कृष्ण,
जो भी व्रत धरता।
माता जो भी व्रत धरता।
पाप ताप सब नाशे,
सुख संपत्ति भरता।
धन धान्य की दात्री,
संतान सुखकारी।
माता संतान सुखकारी।
जो तुमको मन से ध्यावे,
हो विपदा हारी।
विधि विधान से पूजन,
जो नर नारी करता।
माता जो नर नारी करता।
भव सागर से उसको,
पल में पार उतरता।
विष्णु लोक को पावे,
मोक्ष गति पाता।
माता मोक्ष गति पाता।
एकादशी व्रत करने से,
सब दुख मिट जाता।
जय एकादशी माता,
माता जय एकादशी माता।
विष्णु भक्त जनों की,
तुम हो त्राता।
माता लक्ष्मी की आरती
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख सम्पत्ति दाता॥
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता॥
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता॥
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता॥
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता॥
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
मैया जो कोई जन गाता॥
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दोहा
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि।
हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।
पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे।
सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।
सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय।
आरती पूरी होने के बाद तुलसी में आरती जरूर दिखाना चाहिए, इसके बाद घर के लोगों को आरती लेनी चाहिए।