Unique temples in India: भारत में मंदिरों की पहचान केवल उनकी प्राचीनता, वास्तुकला या धार्मिक महत्व से ही नहीं होती, बल्कि कई मंदिर अपने अनोखे रीति-रिवाजों और चढ़ावे की परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध हैं। जहां अधिकांश मंदिरों में श्रद्धालु फूल, फल, मिठाई और नारियल चढ़ाते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जहां परंपराएं बिल्कुल अलग (Unusual Temple Customs) हैं। कहीं भक्त देवी-देवता को शराब अर्पित करते हैं, तो कहीं चप्पल पहनकर ही मंदिर में प्रवेश करना नियम माना जाता है। आइए जानते हैं देश के ऐसे पांच अनोखे मंदिरों के बारे में।
1. काल भैरव मंदिर, उज्जैन
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित काल भैरव मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां भक्त भगवान काल भैरव को प्रसाद के रूप में शराब अर्पित करते हैं। मंदिर के पुजारी पात्र में शराब लेकर भगवान के मुख से लगाते हैं और मान्यता है कि वह रहस्यमय तरीके से गायब हो जाती है। मान्यता है कि काल भैरव भगवान शिव के उग्र स्वरूप हैं और उन्हें मदिरा अर्पित करना सदियों पुरानी परंपरा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस अनोखी पूजा को देखने पहुंचते हैं।
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2. करणी माता मंदिर, बीकानेर
राजस्थान के बीकानेर स्थित करणी माता मंदिर को "चूहों वाला मंदिर" भी कहा जाता है। यहां हजारों काले चूहे स्वतंत्र रूप से मंदिर परिसर में घूमते हैं। इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि भक्त चूहों द्वारा खाया गया प्रसाद भी शुभ मानकर ग्रहण करते हैं। यदि किसी श्रद्धालु को सफेद चूहा दिखाई दे जाए तो उसे विशेष सौभाग्य का संकेत माना जाता है। यहां चूहों को परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया जाता है।
3. देवजी महाराज मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में स्थित देवजी महाराज के मंदिरों में एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। जहां अधिकांश मंदिरों में जूते-चप्पल बाहर उतारना अनिवार्य होता है, वहीं यहां कुछ विशेष अवसरों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार श्रद्धालु चप्पल पहनकर मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा देवजी महाराज की इच्छा और क्षेत्रीय लोकविश्वास से जुड़ी हुई है। यहां आने वाले भक्त इस नियम का पालन श्रद्धा के साथ करते हैं।
4. कामाख्या मंदिर, असम
असम के नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है। यहां देवी की प्रतिमा नहीं, बल्कि प्राकृतिक योनिपीठ की पूजा होती है। इस मंदिर में लाल चुनरी, सिंदूर, लाल फूल और शक्ति के प्रतीक स्वरूप विशेष पूजन सामग्री चढ़ाई जाती है। अंबुबाची मेले के दौरान मंदिर से मिलने वाला लाल वस्त्र अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे देवी के आशीर्वाद का प्रतीक समझा जाता है।
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5. चीनी काली मंदिर, कोलकाता
कोलकाता का प्रसिद्ध चीनी काली मंदिर भारतीय और चीनी संस्कृति के अनोखे संगम का प्रतीक है। यहां देवी काली को पारंपरिक मिठाइयों के साथ-साथ नूडल्स, चावल, सब्जियां और चीनी शैली के व्यंजन भी प्रसाद के रूप में अर्पित किए जाते हैं। यह मंदिर दर्शाता है कि श्रद्धा का स्वरूप संस्कृति के अनुसार बदल सकता है, लेकिन आस्था का भाव हमेशा एक जैसा रहता है।
आस्था और विविधता की पहचान
भारत के ये मंदिर बताते हैं कि धार्मिक परंपराएं केवल एक जैसी नहीं होतीं। अलग-अलग क्षेत्रों की लोक मान्यताएं, इतिहास और संस्कृति मंदिरों की पूजा-पद्धति और चढ़ावे को विशिष्ट बनाती हैं। हालांकि इन परंपराओं का पालन केवल संबंधित मंदिरों की मान्यताओं के अनुसार ही किया जाना चाहिए। किसी भी मंदिर में दर्शन से पहले वहां के स्थानीय नियमों और रीति-रिवाजों की जानकारी लेना और उनका सम्मान करना हर श्रद्धालु का दायित्व है।
