नए साल से पहले सकारात्मक ऊर्जा जगाने की परंपरा, क्यों खास है 31 दिसंबर को मंदिर की सफाई?
- Authored by: गुलशन कुमार
- Updated Dec 22, 2025, 06:31 PM IST
Temple Cleaning On 31 December : साल के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर को मंदिर की सफाई केवल स्वच्छता नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस दिन विशेष समय पर की गई सफाई नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। आइए जानते हैं इसके बारे में...
साल के अंत में मंदिर की सफाई
Temple Cleaning On 31 December : 31 दिसंबर को मंदिर की सफाई एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो नए वर्ष की शुरुआत के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करती है। इस दिन विशेष ग्रहों के प्रभाव के कारण इसकी महत्वता और बढ़ जाती है। शास्त्रों के अनुसार, दिन के विशेष समय में सफाई करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सफाई की प्रक्रिया में सही इरादा, वस्तुओं का सम्मानपूर्वक निकालना, और पुनर्जीवित करना शामिल है। इस परंपरा के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी नए वर्ष का स्वागत करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
क्यों करते हैं साल के अंत में मंदिर की सफाई?
हर साल 31 दिसंबर का दिन एक साल के अंत और नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक होता है। इस दिन को मनाने के लिए विभिन्न परंपराएं और रीति-रिवाज हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण परंपरा है मंदिर की सफाई। ज्योतिषी सिद्धार्थ एस. कुमार के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन धनु राशि में चार ग्रहों का संयोग बन रहा है। इस दिन का प्रभाव विशेष रूप से गुरु ग्रह द्वारा संचालित होगा, जो इसे आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।

मंदिर की सफाई का महत्व
31 दिसंबर को मंदिर की सफाई का सही समय
शास्त्रों के अनुसार, मंदिर की सफाई दिन के समय में ही करनी चाहिए। रात में सफाई की अनुमति नहीं है। दिन के कुछ विशेष समय इस प्रकार हैं-
1. 7:14 – 8:05 AM
2. 9:49 – 10:41 AM
3. 12:24 – 1:16 PM
4. 1:16 – 2:08 PM
5. 3:51 – 4:43 PM
सफाई की विधि
1. सही इरादा तय करें: सफाई शुरू करने से पहले एक मिनट के लिए मंदिर के सामने खड़े होकर ब्रह्मांड से अनुमति लें और सही इरादे से सफाई का कार्य आरंभ करें।
2. सामग्री निकालें: मंदिर में रखी सभी वस्तुओं को धीरे-धीरे निकालें, जैसे कि मूर्तियाँ, तस्वीरें, दीपक आदि, और उन्हें एक साफ कपड़े पर रखें।
3. पानी से सफाई: गंगाजल और गुलाब की पंखुड़ियों के साथ पानी का मिश्रण बनाएं और मंदिर की सफाई करें। इसे ऊपर से नीचे की ओर करें, जिससे पुरानी ऊर्जा को छोड़ने का प्रतीक बन सके।
4. मूर्तियों की सफाई: मूर्तियों और अन्य पवित्र वस्तुओं को नरम और साफ कपड़े से धीरे-धीरे साफ करें।
5. मंदिर को पुनर्जीवित करें: सफाई के बाद सभी वस्तुओं को ध्यानपूर्वक वापस रखें और एक घी का दीपक जलाएं, जिससे स्थान को पुनर्जीवित किया जा सके।
साल के अंत की अन्य परंपराएं
भारत में 31 दिसंबर के आसपास कई अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी होती हैं। जैसे कि पुणे में "धारणा" रिट्रीट, जो नए वर्ष की शुरुआत को एक शांतिपूर्ण और विचारशील तरीके से मनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करता है। यहां योग, ध्यान, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे लोग नए वर्ष का स्वागत करते हैं।