अध्यात्म

गंगातट पर आस्था का महासंगम: जानें कब से कब तक चलेगा हरिद्वार में अर्ध कुंभ मेला, नोट करें शाही स्नान की तिथियां

हरिद्वार में आयोजित होने वाला अर्ध कुंभ मेला 2027 एक बार फिर आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति का विराट संगम बनने जा रहा है। आइए जानते हैं कब से कब तक चलेगा अर्ध कुंभ मेला और शाही स्नान की तिथियां।

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हरिद्वार में अर्ध कुंभ मेला कब लगेगा

Haridwar Ardh Kumbh Mela 2027: उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित होने वाला अर्ध कुंभ मेला 2027 एक बार फिर आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति का विराट संगम बनने जा रहा है। कल यानी 14 अप्रैल 2026 को मेला प्रशासन द्वारा घोषित स्नान तिथियों ने श्रद्धालुओं के उत्साह को और बढ़ा दिया है। जनवरी से अप्रैल 2027 तक चलने वाले इस चार माह के आयोजन (Haridwar Ardh Kumbh Mela) में कुल 10 प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जिनमें तीन विशेष 'अमृत' या शाही स्नान भी शामिल हैं। यदि आप कुंभ में स्नान का प्लान बना रहे हैं, तो आपको सभी जरूरी तिथियां नोट कर लेनी चाहिए। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

कब से कब तक चलेगा हरिद्वार का अर्ध कुंभ मेला

हरिद्वार में अर्ध कुंभ मेला 2027 की शुरुआत 14 जनवरी (मकर संक्रांति) से होगी और इसका समापन 20 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) को होगा। लगभग चार महीने तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। आप भी इस पवित्र समय में गंगा में स्नान का प्लान बना सकते हैं।

हरिद्वार अर्ध कुंभ की महत्वपूर्ण तिथियां

हरिद्वार में अर्ध कुंभ की शुरुआत 14 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के पावन अवसर से होगी। इसके बाद 6 फरवरी को मौनी अमावस्या, 11 फरवरी को बसंत पंचमी, और 20 फरवरी को माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे। इसके बाद मार्च के महीने में 6 मार्च को महाशिवरात्रि और 8 मार्च को फाल्गुन अमावस्या के अवसर पर भी विशेष स्नान का आयोजन होगा।

इसके बाद 7 अप्रैल को नव संवत्सर (हिन्दू नववर्ष), 14 अप्रैल को मेष संक्रांति, 15 अप्रैल को विशेष स्नान और अंत में 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के साथ अर्ध कुंभ का समापन होगा। इन सभी स्नान पर्वों में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाकर आध्यात्मिक शुद्धि और मोक्ष की कामना करते हैं।

क्यों होता हैं कुंभ मेले का आयोजन?

कुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र धार्मिक आयोजन माना जाता है। इसकी परंपरा पौराणिक कथा 'समुद्र मंथन' से जुड़ी है, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत कलश को लेकर संघर्ष हुआ था। मान्यता है कि अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं। इन्हीं स्थानों पर क्रमशः कुंभ और अर्द्ध कुंभ मेलों का आयोजन होता है।

हरिद्वार में लगने वाला अर्ध कुंभ 2027 एक बार फिर करोड़ों लोगों को एक साथ धार्मिक आस्था से जोड़ने का काम करेगा। यह मेला 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को साकार करने में भी अपना योगदान निभाएगा। यदि आप पुण्य के भागी बनना चाहते हैं, तो नोट करें हरिद्वार अर्ध कुंभ का संपूर्ण कैलेंडर।

जानिए मई में पूर्णिमा कब है 2026। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

gulshan kumar
गुलशन कुमार author

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लो... और देखें

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