Aaj ka puja time 15 April 2026 (आज का पूजा मुहूर्त 15 अप्रैल 2026): हिंदू धर्म में पंचांग केवल तिथि बताने का साधन नहीं, बल्कि दिनभर की आध्यात्मिक ऊर्जा को समझने का मार्ग भी है। 15 अप्रैल 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन बुध प्रदोष व्रत (Pradosh vrat), मासिक शिवरात्रि और त्रयोदशी तिथि का संयोग बन रहा है। ऐसे में शिव-भक्तों के साथ गणेश भक्तों के लिए भी यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। पंचांग के अनुसार सही समय पर पूजा करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
आज 15 अप्रैल 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार 15 अप्रैल बुधवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। त्रयोदशी भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है और इसी दिन संध्या काल में प्रदोष व्रत रखा जाता है। बुधवार होने के कारण इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जो बुद्धि, संतुलन और पारिवारिक सुख के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
आज 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत पर शिव जी की पूजा का समय
प्रदोष व्रत की सबसे महत्वपूर्ण बात है- प्रदोष काल। यही वह समय होता है जब भगवान शिव की पूजा विशेष फल देती है। आज 15 अप्रैल को प्रदोष पूजा मुहूर्त शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा।
यह लगभग दो घंटे से अधिक का अत्यंत शुभ काल माना गया है। इस समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करना श्रेष्ठ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि संध्या के इस काल में कैलाश पर देवताओं द्वारा शिव आराधना की जाती है, इसलिए इसे ‘प्रदोष’ कहा गया है।
आज 15 अप्रैल को शिव पूजा की सरल विधि
प्रदोष व्रत के दिन पूजा जटिल नहीं बल्कि श्रद्धा आधारित मानी गई है। सुबह स्नान के बाद व्रत संकल्प लें। दिनभर सात्विक आहार रखें या फलाहार करें। संध्या में शिवलिंग का अभिषेक करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
दीपक जलाकर शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष लाभकारी माना जाता है।
आज 15 अप्रैल को गणेश जी की पूजा का शुभ मुहूर्त
हर मंगल कार्य की शुरुआत भगवान गणेश से होती है। इसलिए प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजा से पहले गणेश पूजन करना शुभ माना गया है।
आज गणेश पूजा का श्रेष्ठ समय:
- सुबह सूर्योदय के बाद से दोपहर तक
- विशेष रूप से प्रातःकाल और प्रदोष पूजा से पहले
गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करने से विघ्न दूर होते हैं और पूजा सफल मानी जाती है।
आज 15 अप्रैल क्यों खास है
दो संयोग होने के नाते 15 अप्रैल 2026 केवल एक व्रत का दिन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है। बुध प्रदोष व्रत के साथ मासिक शिवरात्रि योग बनने से ध्यान, साधना और संकल्प शक्ति मजबूत करने का श्रेष्ठ अवसर मिलता है। पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन की गई शिव आराधना मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और आर्थिक स्थिरता प्रदान करने वाली मानी जाती है।
जानिए मई में पूर्णिमा कब है 2026। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|
