अध्यात्म

गुप्त नवरात्रि पर किन 10 महाविद्याओं की पूजा होती है, किस दिन कौन सी देवी की करें पूजा, जानिए पूजा विधि और महत्व

Gupt Navratri 2026 Mahavidya Puja: हर साल 4 बार नवरात्रि आती हैं। इसमें दो गुप्त और दो सामान्य नवरात्रि होती हैं। जहां सामान्य नवरात्रि में माता के नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है। वहीं, गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि पूरी सृष्टि इन्हीं 10 महाविद्याओं में समाहित है। साल 2026 में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से गई है। आइए जानते हैं कि इन ये 10 महाविद्या कौन सी देवियां हैं और किस दिन कौन सी देवी की पूजा की जाएगा।

10 महाविद्याओं के क्या-क्या हैं नाम

10 महाविद्याओं के क्या-क्या हैं नाम

Gupt Navratri 2026 Mahavidya Puja: सनातन धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व सामान्य नवरात्रियों की तरह उत्सव प्रधान नहीं होता, बल्कि इसे गहन साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का समय माना जाता है। वर्ष 2026 में माघ मास की गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी सोमवार से शुरू होकर 28 जनवरी बुधवार तक चलेगी। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा की उपासना गुप्त रूप से की जाती है और साथ ही दस महाविद्याओं की विशेष साधना का विधान बताया गया है।

गुप्त नवरात्रि कब होती है और क्यों खास मानी जाती है?

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि को सामान्य नवरात्रि कहा जाता है, जिन्हें सार्वजनिक रूप से व्रत, पूजा और उत्सव के साथ मनाया जाता है। वहीं माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि को खास इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें देवी की उपासना बाहरी दिखावे के बिना, पूर्ण संयम और कठोर नियमों के साथ की जाती है। तांत्रिक साधना, शक्ति उपासना और सिद्धि प्राप्ति के लिए इस काल को अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।

माघ गुप्त नवरात्रि 2026 की तिथि और काल?

पंचांग के अनुसार माघ गुप्त नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी 2026 को रात 01 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। इसी प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी। वर्ष 2026 में यह नवरात्रि 19 जनवरी से 28 जनवरी तक कुल नौ दिनों तक रहेगी।

गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना का महत्व

गुप्त नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से की जाती है। कलश को देवी शक्ति का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार घट में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, मातृशक्तियां, वेद, समस्त तीर्थ और देवी शक्तियों का वास माना जाता है। घटस्थापना के बाद देवी को नौ दिनों तक साधक के घर या साधना स्थल पर स्थिर रूप से आमंत्रित किया जाता है, जिससे पूजा और साधना सफल मानी जाती है।

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का विधान

गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक दिन एक विशेष महाविद्या की उपासना की जाती है, जिससे अलग-अलग प्रकार की सिद्धि और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

पहला दिन: मां काली की पूजा

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की आराधना की जाती है। मां काली को शक्ति, भय नाश और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाली देवी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन मां काली की पूजा करने से शनि दोष, भय और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन उत्तर दिशा की ओर मुख करके साधना करना शुभ माना जाता है। मां काली की पूजा में 'क्रीं ह्रीं काली ह्रीं क्रीं स्वाहा' और 'ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके स्वाहा' मंत्रों का जप किया जाता है।

दूसरा दिन: मां तारा की पूजा

गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां तारा की पूजा का विधान है। मां तारा को बुद्धि, वाणी और संतान सुख प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इस दिन की गई साधना से मानसिक स्थिरता और निर्णय क्षमता मजबूत होती है। मां तारा की उपासना में 'ॐ ह्रीं स्त्रीं हूं फट' मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है।

तीसरा दिन: मां त्रिपुरसुंदरी (षोडशी) की पूजा

तीसरे दिन मां त्रिपुरसुंदरी, जिन्हें मां षोडशी भी कहा जाता है, की पूजा की जाती है। यह साधना सौंदर्य, व्यक्तित्व निखार और बुध ग्रह से जुड़े दोषों की शांति के लिए मानी जाती है। इस दिन मां त्रिपुरसुंदरी के 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुंदरीये नमः' मंत्र का जप किया जाता है।

चौथा दिन: मां भुवनेश्वरी की पूजा

गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की उपासना की जाती है। मां भुवनेश्वरी को सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। उनकी साधना मोक्ष प्राप्ति, दान-पुण्य और चंद्रमा से जुड़े दोषों की शांति के लिए की जाती है। इस दिन 'ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः' मंत्र का जप किया जाता है।

पांचवां दिन: मां छिन्नमस्ता की पूजा

पांचवें दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा का विधान है। मां छिन्नमस्ता को शत्रु नाश, रोग मुक्ति और राहु दोष शांति से जोड़कर देखा जाता है। यह साधना कठिन मानी जाती है, लेकिन सही विधि से की जाए तो शीघ्र फल देने वाली मानी गई है। इस दिन 'श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैररोचनिए हूं हूं फट स्वाहा' मंत्र का जप किया जाता है।

छठा दिन: मां त्रिपुर भैरवी की पूजा

गुप्त नवरात्रि के छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी की पूजा की जाती है। यह साधना नजर दोष, भय, नकारात्मक शक्तियों और कुंडली के लग्न दोष को शांत करने के लिए की जाती है। मां त्रिपुर भैरवी के 'ॐ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा' मंत्र का जप इस दिन विशेष फलदायी माना गया है।

सातवां दिन: मां धूमावती की पूजा

सातवें दिन मां धूमावती की उपासना की जाती है। मां धूमावती को दरिद्रता नाश और जीवन की बड़ी बाधाओं को दूर करने वाली देवी माना गया है। इस दिन की गई साधना से जीवन में स्थिरता और धैर्य बढ़ता है। मां धूमावती के 'धूं धूं धूमावती दैव्यै स्वाहा' मंत्र का जप किया जाता है।

आठवां दिन: मां बगलामुखी की पूजा

गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन मां बगलामुखी की साधना की जाती है। मां बगलामुखी को शत्रु नाश, कोर्ट-कचहरी और नौकरी से जुड़ी समस्याओं में विजय दिलाने वाली देवी माना गया है। इस दिन 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां मुखं स्तम्भय स्वाहा' मंत्र का जप किया जाता है।

नौवां दिन: मां मातंगी और मां कमला की पूजा

गुप्त नवरात्रि के नौवें दिन दो महाविद्याओं की पूजा का विधान है। मां मातंगी की साधना प्रेम, आकर्षण और बुद्धि वृद्धि के लिए की जाती है, जबकि मां कमला की पूजा धन, सुख-समृद्धि और लक्ष्मी कृपा प्राप्ति के लिए की जाती है। इस दिन 'क्रीं ह्रीं मातंगी स्वाहा' और 'क्रीं ह्रीं कमला स्वाहा' मंत्रों का जप किया जाता है।

गुप्त नवरात्रि में साधना के विशेष नियम

गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक को सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य और संयम का विशेष पालन करना चाहिए। पूजा और मंत्र जाप को यथासंभव गुप्त रखना आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन और उद्यापन करने से साधना पूर्ण मानी जाती है।

गुप्त नवरात्रि का क्या है आध्यात्मिक महत्व

देवी भागवत पुराण के अनुसार, जिस प्रकार सामान्य नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा होती है, उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना का विधान है। यह समय तांत्रिक सिद्धि, शक्ति जागरण और आत्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से की गई साधना से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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