Tulsidas Ji ka Jivan Parichay: तुलसीदास जयंती हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है। इस बार ये तिथि 11 अगस्त 2024 को पड़ रही है। गोस्वामी तुलसीदास जी एक प्रमुख भारतीय कवि, संत और दार्शनिक थे, जिन्होंने 12 पुस्तकों की रचना की थी (Tulsidas Ji Ki Rachnaye) लेकिन "रामचरितमानस" में इन्हें सबसे ज्यादा ख्याति प्राप्त हुई। कई लोग इन्हें महर्षि वाल्मिकी का अवतार भी मानते थे। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस (Goswami Tulsidas Ramcharitmanas) की रचना अवधि भाषा में की जो उत्तर भारत में सबसे ज्यादा बोली जाती है। तुलसीदास जयंती (Tulsidas Jayanti Kab Hai) के मौके पर लोग रामचरितमानस का सबसे ज्यादा पाठ करते हैं। इसके अलावा इस दिन प्रभु राम, माता सीता और हनुमान जी की भी पूजा की जाती है। जानिए तुलसीदास जी का जीवन परिचय (Tulsidas Ji Ka Jeevan Parichay)।
तुलसीदास जी की जन्म और मृत्यु (Tulsidas Ji Ki Janam And Mrityu)
तुलसीदास जी के जन्म और मृत्यु को लेकर अलग-अलग बातें प्रचलित है। कुछ जगहों पर उनके जीवन काल को साल 1497 से 1623 ईं. के बीच बताया जाता है, तो वहीं कुछ के अनुसार तुलसीदास जी 1543 से 1623 तक जीवित रहे थे। जानकारी अनुसार उनकी माता का नाम हुलसी और पिता का नाम आत्माराम दुबे थे। उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और जन्म के समय उनका नाम रामबोला था।
तुलसीदास जयंती की पूजन विधि (Tulsidas Jayanit Puja Vidhi)
इस अवसर पर भक्तजन मंदिर जाकर भगवान राम, देवी सीता और हनुमान जी की आराधना करते हैं। अगर घर पर पूजा कर रहे हैं तो किसी साफ स्थान पर राम दरबार स्थापित करें। दरबार के सामने घी का दीपक जलाएं और प्रसाद अर्पित करें। प्रसाद और पूजा में तुलसी का उपयोग जरूर करना चाहिए। इसके बाद तुलसी की माला से तुलसीदास द्वार लिखे गए किसी भी दोहे का 108 बार जाप करें। फिर चौपाई का जाप करें। सबसे अंत में ईश्वर से अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
तुलसीदास जी का जीवन परिचय (Tulsidas Ji ka Jeevan Parichay in Hindi)
- तुलसीदास जी ने एक हिंदू संत और कवि के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई। ये भगवान राम के बड़े भक्त थे।
- तुलसीदास जी ने ही महर्षि वाल्मिकी द्वारा संस्कृत में लिखी मूल रामायण को अवधी भाषा में लिखा था जिसे ‘रामचरितमानस’ के नाम से जाना जाता है।
- तुलसीदास ने अपने जीवन का ज्यादातर समय वाराणसी में बिताया। इसी कारण वाराणसी के गंगा नदी पर बने प्रसिद्ध ‘तुलसी घाट’ को उन्हीं के नाम से जाना जाता है। कहते हैं इसी जगह पर तुलसीदास जी ने अपने जीवन का ज्यादातर समय बिताया था।
- तुलसीदास जी ने अपनी आखिरी सांस भी वाराणसी के ही अस्सी घाट पर ली थी।
- मान्यताओं अनुसार वाराणसी के प्रसिद्ध भगवान हनुमान के संकटमोचन मंदिर का निर्माण तुलसीदास जी ने ही किया था।
- ऐसी भी मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना से पहले तुलसीदास जी को भगवान हनुमान ने दर्शन दिए थे, जिसके बाद उन्होंने संकटमोचन मंदिर की स्थापना की।
- मान्यता है कि तुलसीदास जी भगवान हनुमान के बाद राम जी के दूसरे बड़े भक्त थे उनकी इसी भक्ति के चलते वो कलयुग के अकेले ऐसे मनुष्य थे जिन्हें भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान जी के दर्शन हुए थे।
- ‘हनुमान चालिसा’ भी तुलसीदास जी की ही प्रसिद्ध रचना है।
- मान्यताओं अनुसार तुलसीदास जी को रामचरितमानस लिखने में लगभग 2 साल 7 महीने और 26 दिन का समय लगा था।
- रामचरितमानस के साथ ही उन्होंने सतसई, वैराग्य संदीपनी, कृष्ण गीतावली, बैरव रामायण, पार्वती मंगल, गीतावली, विनय पत्रिका, आदि ग्रंथों की रचना भी की।
- ‘हनुमानाष्टक’ की भी रचना तुलसीदास जी द्वारा ही की गई है।
