अध्यात्म

गणगौर की फोटोज, गणगौर माता की तस्वीरें, गणगौर पूजा के लिए इमेज, ईसर और गौरी की तस्वीरें

Gangaur Images Download (गणगौर माता की तस्वीरें), गणगौर ईसर और गौरी की तस्वीरें: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर का पर्व मनाया जाता है। होली के बाद मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। गणगौर मनाने और गणगौर माता की पूजा के लिए आप यहां सुंदर फोटोज देख सकते हैं। इस फोटोज को सेव भी किया जा सकता है। यहां देखें गणगौर पूजा के लिए ईसर और गौरी की तस्वीरें, फोटोज, इमेज, पिक आदि।

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गणगौर माता की फोटो, तस्वीरें

Gangaur Images Download (गणगौर माता की तस्वीरें), गणगौर ईसर और गौरी की तस्वीरें: चैत्र मास के पावन दिनों में मनाया जाने वाला गणगौर का पर्व सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। खासतौर पर राजस्थान में यह त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन अब देशभर में इसकी छटा देखने को मिलती है। साल 2026 में गणगौर का पर्व 21 मार्च, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं और युवतियां पूरे श्रद्धा भाव से मां गौरी और भगवान शिव की पूजा करती हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। यहां आप गणगौर के लिए सुंदर तस्वीरें देख सकते हैं।

गणगौर की फोटोज

आजकल डिजिटल दौर में लोग गणगौर की सुंदर तस्वीरें (Gangaur Images) और शुभकामनाएं एक-दूसरे को भेजकर इस पर्व की खुशियां साझा करते हैं। सोशल मीडिया पर गणगौर की रंग-बिरंगी झलकियां इस त्योहार की रौनक को और बढ़ा देती हैं।

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गणगौर माता की फोटोज

गणगौर सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और परंपरा का खूबसूरत संगम है। साल 2026 में 21 मार्च को मनाया जाने वाला यह पर्व जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना से मनाया जाता है। यहां आप गणगौर माता की तस्वीरें, फोटोज देख सकते हैं।

Gangaur Mata ki Photo

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ईसर और गौरी की फोटोज

गणगौर पर गौरी और ईसर बनाए जाते हैं जो मां पार्वती और शिवजी का प्रतीक माने जाते हैं। गणगौर शब्द दो भागों से मिलकर बना है—‘गण’ यानी भगवान शिव और ‘गौर’ यानी माता पार्वती। यही कारण है कि यह पर्व शिव-पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

Gangaur ki Tasveerein

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गणगौर पूजा विधि

गणगौर के दिन महिलाएं सुबह स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र पहनती हैं और पूजा की तैयारी करती हैं। इस दिन मिट्टी या लकड़ी से बनी गणगौर (शिव-पार्वती) की प्रतिमा स्थापित की जाती है। जिनके पास प्रतिमा नहीं होती, वे फोटो के माध्यम से भी पूजा कर सकती हैं। पूजा में सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है। महिलाएं पारंपरिक गणगौर गीत गाती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।

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गणगौर पूजा में विसर्जन की परंपरा

गणगौर व्रत के अंतिम दिन महिलाएं पास के तालाब, नदी या जल स्रोत पर जाकर गणगौर को जल अर्पित करती हैं। इसके बाद विधि-विधान से प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। यह परंपरा जीवन में नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। विसर्जन के समय महिलाएं अगले वर्ष फिर से माता के आगमन की कामना करती हैं और अपने घर-परिवार के सुखी जीवन की प्रार्थना करती हैं।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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