Ganga Dussehra 2026 : आज 25 मई 2026 को गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। यही कारण है कि इस पर्व को गंगा दशहरा कहा जाता है। यहां 'दशहरा' का अर्थ रावण वध वाला दशहरा नहीं, बल्कि 'दस प्रकार के पापों का हरण' माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति के शरीर, वाणी और मन से जुड़े 10 प्रकार के पापों का नाश होता है। स्कंद पुराण, निर्णय सिंधु और महाभारत जैसे ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है।
गंगा दशहरा का क्या अर्थ है
गंगा दशहरा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है —'गंगा' और 'दशहरा'। यहां दशहरा का मतलब है टदस पापों का नाश करने वालाट। धार्मिक मान्यता है कि मां गंगा के पवित्र जल में स्नान करने से मनुष्य के अंदर मौजूद नकारात्मकता और पाप दूर होते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है —
'कायिकं वाचिकं चैव मानसं त्रिविधं तथा।
एतान् दशविधान् पापन् हरते जाह्नवी नदी।।'
अर्थात मां गंगा शरीर, वाणी और मन से किए गए दस प्रकार के पापों को हर लेती हैं।
कौन से हैं 3 कायिक पाप
कायिक पाप वे माने गए हैं, जो मनुष्य अपने शरीर से करता है। शास्त्रों के अनुसार ये तीन प्रमुख पाप हैं ।
चोरी करना
किसी दूसरे की वस्तु को बिना अनुमति लेना या छल-कपट से हासिल करना चोरी माना गया है। इसे गंभीर पाप बताया गया है।
अकारण हिंसा करना
बिना वजह किसी जीव को कष्ट देना, मारना या हिंसा करना भी पाप माना गया है। धर्म में दया और करुणा को सबसे बड़ा गुण बताया गया है।
परस्त्री या परपुरुष गमन
अपने जीवनसाथी के प्रति निष्ठा न रखना और व्यभिचार करना भी कायिक पाप की श्रेणी में आता है। शास्त्रों में इसे परिवार और समाज दोनों के लिए हानिकारक बताया गया है।
वाणी से जुड़े 4 पाप कौन से हैं
धर्म ग्रंथों में वाणी की शुद्धता को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। गलत शब्द और कटु भाषा भी पाप का कारण बनते हैं।
कड़वी बातें करना
ऐसी बातें बोलना जिससे किसी का दिल दुखे या आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे, पारुष्य कहलाता है।
झूठ बोलना
अपने लाभ के लिए झूठ बोलना और दूसरों को भ्रमित करना भी बड़ा पाप माना गया है।
चुगली और निंदा करना
एक व्यक्ति की बात दूसरे तक पहुंचाकर विवाद बढ़ाना और पीठ पीछे बुराई करना भी वाणी का दोष माना गया है।
अफवाह और बेकार बातें फैलाना
बिना मतलब की बातें करना, भ्रम फैलाना या समाज में नकारात्मकता बढ़ाने वाली भाषा का इस्तेमाल करना भी पाप बताया गया है।
मानसिक पाप कौन से होते हैं
धर्म शास्त्रों में मन के विचारों को भी बहुत महत्व दिया गया है। मन में उठने वाले गलत भाव भी आत्मा को दूषित करते हैं।
दूसरे की संपत्ति देखकर लालच करना
किसी की सफलता या धन देखकर ईर्ष्या करना और उसे पाने की गलत इच्छा रखना मानसिक पाप माना गया है।
किसी का बुरा सोचते रहना
मन ही मन किसी को नुकसान पहुंचाने या उसके लिए गलत सोच रखना भी पाप की श्रेणी में आता है।
गलत बात पर अड़े रहना
जानते हुए भी गलत विचारों और अहंकार को न छोड़ना तथा सत्य को स्वीकार न करना भी मानसिक दोष माना गया है।
आत्मा की भी शुद्धि करता है गंगा स्नान
धार्मिक मान्यता है कि गंगा स्नान केवल शरीर की सफाई नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का माध्यम भी है। महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है कि गंगा स्नान का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब व्यक्ति के मन में सच्चा पश्चाताप और सुधार का भाव हो। गंगा दशहरा का असली संदेश यही माना जाता है कि इंसान अपने अंदर मौजूद बुराइयों, क्रोध, झूठ, लालच और अहंकार को त्यागने का संकल्प ले।
गंगा दशहरा पर क्या करें
गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, दान, जप और भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को जल, अन्न, वस्त्र और फल का दान करने से पुण्य फल मिलता है।
