Ganesh Ji Ki Kahani In Hindi (गणेश जी की कहानी): 24 फरवरी को माघ पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में इस पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना गया है। अगर आपने भी माघ पूर्णिमा का व्रत रखा है तो इस दिन माघ पूर्णिमा (Magh Purnima Katha) और सत्यनारायण की व्रत कथा (Satyanarayan Katha In Hindi) के साथ गणेश जी की कहानी भी जरूर पढ़ें। बता दें हिंदू धर्म में किसी भी व्रत पूजन के दौरान इस कहानी को पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Ganesh Ji Ki Kahani In Hindi (गणेश जी की कहानी)
गणेश जी की कहानी अनुसार एक बुढ़िया माई थी। जो मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। वो पूजा के लिए रोज मिट्टी के गणेश बनाती थी। उसकी गणेश जी की प्रतिमा मिट्टी की होने के कारण वो रोजाना ही गल जाती थी। एक दिन उसने एक सेठ का मकान बनते देखा। वो मकान बनाने वाले मिस्त्री के पास जाकर बोली मेरे लिए पत्थर का गणेश बना दो। मिस्त्री ने कहा कि जितने में हम तेरा पत्थर का गणेश घड़ेंगे उतने में अपनी दीवार ना चिनेंगे।
बुढ़िया को गुस्सा आ गया वो बोली राम करे तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। ऐसा कहते ही उनकी दीवार टेढ़ी हो गई। अब मिस्त्री जितनी बार दीवार चिनें और ढा देवें, चिने और ढा देवें। इस तरह शाम हो गई। शाम में सेठ जी आए और उन्होंने कहा आज कुछ भी नहीं किया।
वो कहने लगे एक बुढ़िया आई थी जो कह रही थी कि मेरा पत्थर का गणेश घड़ दो, हमने नहीं घड़ा तो उसने कहा तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए। हम लोग तभी से दीवार सीधी नहीं बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन बनाते हैं और ढ़ा देते हैं।
सेठ ने बुढ़िया को बुलवाया। सेठ ने कहा हम सोने का गणेश गढ़ देंगे। बस आप हमारी दीवार सीधी कर दो। सेठ ने बुढ़िया को सोने का गणेश गढ़ा दिया। इससे सेठ की दीवार सीधी हो गई। हे विनायक जी जैसे सेठ की दीवार सीधी की वैसी सबकी करना।
