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Ganesh Chaturthi Vrat Katha: गणेश चतुर्थी का व्रत होगा सिद्ध, यहां पढ़ें गणेश चतुर्थी कथा इन हिंदी, गणेश जी की कहानी क्या है

Ganesh Chaturthi Vrat Katha, गणेश चतुर्थी व्रत कथा इन हिंदी: आज गणेश चतुर्थी है, आज के दिन गणपति बप्पा की पूजा के साथ साथ व्रत कथा का पाठ करने का भी महत्व है।यहां पढ़ें गणेश चतुर्थी कथा, गणेश चतुर्थी की कहानी क्या है, गणेश जी की कथा इन हिंदी।

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Ganesh Chaturthi Vrat Katha, गणेश चतुर्थी व्रत कथा इन हिंदी, गणेश चतुर्थी की कहानी क्या है

Ganesh Chaturthi Vrat Katha, गणेश चतुर्थी व्रत कथा इन हिंदी, गणेश चतुर्थी की कहानी क्या है: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन पर घरों में गणेश जी की स्थापना होती है और विधिवत पूजा पाठ किया जाता है। पूजा के साथ गणेश चतुर्थी पर व्रत कथा का पाठ करने का भी महत्व है।

मान्यता है कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के प्रथम पूज्य देवता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए किसी भी नए काम से पहले उनका स्मरण करने की परंपरा रही है। गणेश चतुर्थी पर भक्त पूजा के साथ गणपति से जुड़ी पौराणिक कथाओं का पाठ करते हैं। यहां पढ़ें गणेश चतुर्थी व्रत कथा, गणेश चतुर्थी की कहानी क्या है, गणेश जी की कथा इन हिंदी।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक बालक का स्वरूप बनाया और उसमें प्राण डाल दिए। माता ने उस बालक को अपना पुत्र माना और द्वार पर पहरा देने के लिए कहा। उन्होंने समझाया कि उनकी अनुमति के बिना किसी को भी अंदर प्रवेश न करने दिया जाए। कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे। बालक ने उन्हें भी अंदर जाने से रोक दिया, क्योंकि उसे माता का आदेश याद था। शिवजी ने समझाया कि वे पार्वती के पति हैं, लेकिन बालक अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटा। इस बात से क्रोधित होकर भगवान शिव ने उसका सिर अलग कर दिया।

जब माता पार्वती को यह बात पता चली तो वे बहुत दुखी हुईं। उन्होंने भगवान शिव से अपने पुत्र को फिर से जीवित करने का आग्रह किया।

माता की पीड़ा देखकर शिवजी ने अपने गणों को एक ऐसे जीव का सिर लाने के लिए भेजा, जिसका मुख उत्तर दिशा की ओर हो। गणों को हाथी का सिर मिला। उसे बालक के शरीर से जोड़ा गया और भगवान शिव ने उसे फिर जीवन प्रदान किया। इस तरह बालक को नया रूप मिला और वह गणेश कहलाए। गणेश जी को जीवन मिलने के बाद भगवान शिव ने उन्हें विशेष वरदान दिया।

उन्होंने कहा कि गणेश सभी गणों के अधिपति होंगे और किसी भी शुभ काम की शुरुआत उनकी पूजा से की जाएगी। इसी वजह से गणेश जी को प्रथम पूज्य, गणपति और विघ्नहर्ता कहा जाता है। भक्त किसी नए काम, पूजा या शुभ अवसर पर सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करते हैं।

गणेश जी की कहानी क्या है

गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा में शौनक आदि ऋषियों के सवाल और सूतजी के उत्तर का प्रसंग मिलता है। एक समय नैमिषारण्य में शौनक सहित हजारों ऋषि एकत्र हुए। वहां उन्होंने सूतजी से पूछा कि ऐसा कौन सा देवता है, जिसकी पूजा करने से जीवन के काम बिना बाधा के पूरे हो सकते हैं? धन, सुख, परिवार की खुशहाली और सौभाग्य बना रहे, पति-पत्नी के बीच प्रेम रहे और भाई-बंधुओं में आपसी मतभेद न हों, इसके लिए किसकी आराधना करनी चाहिए? ऋषियों ने यह भी जानना चाहा कि पढ़ाई, व्यापार, खेती और दूसरे महत्वपूर्ण कामों में सफलता पाने के लिए कौन सा पूजन शुभ माना गया है।

ऋषियों के सवाल का जवाब देते हुए सूतजी ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया। जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध की तैयारी चल रही थी, तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि युद्ध में विजय और अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उन्हें किस देवता की पूजा करनी चाहिए।

तब श्रीकृष्ण ने उन्हें भगवान गणेश की आराधना करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि गणपति की श्रद्धा से पूजा करने पर काम में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सफलता का मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता है। इसके बाद युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि गणेश जी की पूजा किस दिन और किस प्रकार करनी चाहिए।

श्रीकृष्ण ने बताया कि भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इसके अलावा कुछ परंपराओं में श्रावण, अगहन और माघ मास की चतुर्थी पर भी गणेश पूजा का विधान बताया गया है। हालांकि गणेश चतुर्थी के अवसर पर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

कथा में आगे पूजा की तैयारियों का वर्णन मिलता है। व्रत रखने वाला व्यक्ति सुबह स्नान करके पूजा के लिए तैयार हो और श्रद्धा के साथ गणपति का ध्यान करे। प्राचीन वर्णन में सामर्थ्य के अनुसार धातु की गणेश प्रतिमा बनवाने की बात कही गई है। यदि सोने या चांदी की प्रतिमा संभव न हो तो मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा से पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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